स्वतंत्रता दिवस पर मप्र में 115 कैदियों की रिहाई, जेल मंत्री ने दीं शुभकामनाएं
मध्य प्रदेश की जेलों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 115 कैदियों को रिहा किया गया है। अच्छे आचरण और नियमों के पालन के आधार पर यह रिहाई समय पूर्व रिहाई नीति के तहत दी गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 15 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश की जेलों में बंद 115 पात्र कैदियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में रिहा कर दिया गया है। यह रिहाई मध्य प्रदेश शासन, जेल विभाग की 'समय पूर्व रिहाई नीति, 2025' के तहत की गई है। इन रिहा किए गए बंदियों में 110 पुरुष और 5 महिला कैदी शामिल हैं। यह कदम जेल में बंदियों के अच्छे आचरण, अनुशासित व्यवहार और निर्धारित नियमों के पालन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
समय पूर्व रिहाई नीति के तहत, प्रदेश की जेलों से वर्ष में पांच विशेष अवसरों पर - गणतंत्र दिवस, अंबेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती और राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस - पर पात्र कैदियों को रिहा करने का प्रावधान है। यह नीति न केवल कैदियों को सुधार के लिए प्रेरित करती है, बल्कि जेलों में सकारात्मक वातावरण बनाने में भी सहायक है।
प्रदेश भर की जेलों से कैदियों की रिहाई
प्रदेश की विभिन्न जेलों से बंदियों को रिहा किया गया है। जबलपुर सर्किल से 18, भोपाल सर्किल से 15, रीवा सर्किल से 15, सतना सर्किल से 11, इंदौर सर्किल से 12, उज्जैन सर्किल से 12, सागर सर्किल से 08, नर्मदापुरम सर्किल से 07, बड़वानी सर्किल से 07, ग्वालियर सर्किल से 06 और नरसिंहपुर सर्किल से 04 बंदियों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जेल से मुक्त किया गया है। यह प्रक्रिया प्रदेश के विभिन्न जिलों की जेलों में एक साथ संपन्न हुई।
पुनर्वास पर विशेष जोर
डॉ. वरुण कपूर, महानिदेशक, जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, मध्य प्रदेश ने रिहा हुए बंदियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी कैदियों से आग्रह किया कि वे जेल से बाहर निकलने के बाद पुनः किसी भी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त न हों और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज की मुख्यधारा में लौटें। डॉ. कपूर ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि रिहा होने वाले कैदियों को जेल में रहते हुए विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए गए हैं। इनमें टेलरिंग, कारपेंट्री, लोहारी, भवन मिस्त्री और भवन-सामग्री निर्माण जैसे कौशल शामिल हैं। इन कौशलों का उद्देश्य कैदियों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज में एक नया जीवन शुरू करने में मदद करना है।
