स्वामी रामात्मानन्द गिरि ने पनामा में भारतीय ज्ञान-परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता पर की चर्चा
स्वामी रामात्मानन्द गिरि महाराज ने पनामा के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और सनातन धर्म के सार्वभौमिक मूल्यों पर विस्तृत चर्चा की।

संवाददाता: दीपक कुमार त्यागी
द क्लिफ न्यूज़ | 24 अक्टूबर 2026
दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र पनामा में, स्वामी रामात्मानन्द गिरि महाराज ने भारतीय ज्ञान-परंपरा और आध्यात्मिक चिंतन की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह चर्चा पनामा के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (MICI) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षण के निदेशक एस. हरदीप सिंह भुल्लर के निमंत्रण पर मंत्रालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान की। यह कदम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर साझा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस अवसर पर स्वामी रामात्मानन्द गिरि महाराज ने भारत की सदियों पुरानी ज्ञान-परंपरा और आध्यात्मिक विचारों के वैश्विक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से योग और आयुर्वेद के माध्यम से मानव कल्याण को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर सार्थक चर्चा की। इसके साथ ही, उन्होंने सनातन धर्म के सार्वभौमिक जीवन-मूल्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित करने के महत्व को भी रेखांकित किया। महाराज ने इस बात पर बल दिया कि ये प्राचीन पद्धतियाँ केवल भारत तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए कल्याणकारी सिद्ध हो सकती हैं।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक सद्भाव पर जोर
स्वामी रामात्मानन्द गिरि ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) की उदात्त भावना और विश्वबंधुत्व के शाश्वत संदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने भारत और पनामा के बीच परस्पर सहयोग, सद्भाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने के विभिन्न आयामों पर भी विचार साझा किए। इस वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना और आपसी समझ को बढ़ाना था, जिससे दोनों राष्ट्रों की उन्नति और उत्थान के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त हो सके।
यह आयोजन भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ताकतों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहाँ योग और आयुर्वेद जैसे भारतीय योगदानों को मानव कल्याण के लिए एक प्रभावी माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। इन प्राचीन भारतीय विज्ञानों में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की अपार क्षमता है, जिसे विश्व भर में अपनाया जा सकता है। पनामा जैसे देश में इस चर्चा का होना, दक्षिण अमेरिका में भारतीय मूल्यों के प्रसार की संभावनाओं को दर्शाता है।
स्वामी रामात्मानन्द गिरि महाराज ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि किस प्रकार योग का अभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि यह मन की शांति और एकाग्रता को भी बढ़ाता है, जो आज के तनावपूर्ण जीवन में अत्यंत आवश्यक है। आयुर्वेद, जो कि एक समग्र चिकित्सा पद्धति है, बीमारियों के मूल कारणों का उपचार करने पर केंद्रित है, न कि केवल लक्षणों को दबाने पर। उन्होंने सुझाव दिया कि पनामा के साथ मिलकर इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है, जिससे वहां के नागरिकों को भी इन प्राचीन ज्ञान का लाभ मिल सके।
यह वार्ता भारत और पनामा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध हुई। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को आत्मसात करते हुए, भारत विश्व के अन्य देशों के साथ अपने ज्ञान और संस्कृति को साझा करने के लिए सदैव तत्पर रहा है। स्वामी रामात्मानन्द गिरि महाराज की यह पहल इसी व्यापक दृष्टिकोण का एक प्रमाण है, जिसका लक्ष्य संपूर्ण विश्व में शांति, सद्भाव और कल्याण को बढ़ावा देना है।
