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सूर्य के कोरोना की अत्यधिक गर्मी का रहस्य सुलझा भारतीय शोधकर्ताओं ने

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने सूर्य के बाहरी वायुमंडल, कोरोना के अत्यधिक गर्म होने के रहस्य से पर्दा उठाया है।

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सूर्य के कोरोना की अत्यधिक गर्मी का रहस्य सुलझा भारतीय शोधकर्ताओं ने

सूर्य के कोरोना की अत्यधिक गर्मी का रहस्य सुलझा भारतीय शोधकर्ताओं ने

द क्लिफ न्यूज़ | 15 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने सूर्य से जुड़े एक लंबे समय से चले आ रहे रहस्य को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है: इसके कोरोना (बाहरी वायुमंडल) का आश्चर्यजनक रूप से उच्च तापमान।

कोरोना का अत्यधिक तापमान

सूर्य का बाहरी वायुमंडल, जिसे कोरोना के नाम से जाना जाता है, आम तौर पर लगभग एक मिलियन डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है। यह इसकी दृश्य सतह के तापमान के विपरीत है, जो केवल 6,000 डिग्री सेल्सियस है। तीव्र सौर ज्वालाओं के दौरान, यह तापमान दसियों मिलियन डिग्री तक बढ़ सकता है, जो दुनिया भर के खगोल भौतिकीविदों के लिए एक बड़ी पहेली रहा है।

सौर कोरोना की अत्यधिक गर्मी

IIA की एक समर्पित टीम द्वारा किए गए इस अभूतपूर्व अध्ययन में उन तंत्रों की पड़ताल की गई है जो सौर कोरोना में इन असाधारण तापीय स्थितियों को जन्म देते हैं। शोध का उद्देश्य सूर्य की सबसे बाहरी परत को उसकी ज्ञात सतह से कहीं अधिक तापमान तक गर्म करने के लिए जिम्मेदार भौतिक प्रक्रियाओं को उजागर करना है। सूर्य की सतह के तापमान और उसके कोरोना के बीच का यह अंतर सौर भौतिकी में एक निरंतर प्रश्न रहा है।

सौर गतिशीलता में नई अंतर्दृष्टि

IIA शोधकर्ताओं का काम सूर्य की जटिल चुंबकीय गतिविधि को प्रमुख चालक के रूप में इंगित करता है। सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र स्थिर नहीं है; यह लगातार गतिमान रहता है, गतिशील पैटर्न और ऊर्जावान घटनाओं का निर्माण करता है। अध्ययन से पता चलता है कि सूर्य के बाहरी वायुमंडल के भीतर होने वाला जटिल "चुंबकीय नृत्य" ऊर्जा स्थानांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे कोरोना अपने चरम तापमान तक गर्म हो जाता है। इसमें चुंबकीय पुनर्संयोजन (magnetic reconnection) जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं, जहां उलझी हुई चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं अचानक पुनर्व्यवस्थित होती हैं, जिससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है।