सूडान की शिक्षा के लिए यूएन में भारत का 'दीक्षा' मॉडल अपनाने का सुझाव
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में सूडान में शिक्षा संकट के समाधान के लिए 'दीक्षा' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाने का सुझाव दिया है।

द क्लिफ न्यूज़ | न्यूयॉर्क | 10 अगस्त 2026
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 'सूडान में शिक्षा की सुरक्षा: शांति, रिकवरी और स्थिरता में निवेश' विषय पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में भारत ने सूडान में शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर संकट को दूर करने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए हैं। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर एल्डोस मैथ्यू पुन्नूस ने सूडान में बच्चों के लिए शिक्षा की बहाली के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए विस्थापन, सुरक्षा और भोजन व दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
काउंसलर पुन्नूस ने हालिया संघर्षों के कारण सूडान में शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और ऐसी घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना जवाबदेही के सुरक्षा प्रभावी नहीं हो सकती, और जो लोग शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बना रहे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए। यूएन के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों के संघर्ष के कारण सूडान में 1.7 करोड़ से अधिक बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है, और स्कूलों पर हमलों में 57 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
डिजिटल माध्यमों से शिक्षा की निरंतरता
भारत ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों में शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग का प्रस्ताव रखा, जहां युद्ध के कारण भौतिक स्कूल नष्ट हो गए हैं। इस संदर्भ में, काउंसलर पुन्नूस ने भारत के 'दीक्षा' (डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग) प्लेटफॉर्म का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ज्ञान साझा करने और शिक्षा प्रदान करने में सफलता प्राप्त की है, और इसी तरह के मॉडल को सूडान में भी अपनाया जा सकता है।
पुन्नूस ने सूडान में 600 लाभार्थियों के लिए भारत द्वारा आयोजित कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक लिम्ब) कैंप का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जहां भौतिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया है, वहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) शिक्षा से जुड़ी कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत का यह सुझाव सूडान की मौजूदा नाजुक स्थिति में शिक्षा को एक प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के प्रयासों को रेखांकित करता है।
