सोनम वांगचुक से मिले केंद्रीय मंत्री, अनशन खत्म करने की अपील
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।

द क्लिफ न्यूज़ | 22 जुलाई 2026
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने वांगचुक के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनसे अपना भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर अनशन पर थे। अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।
स्वास्थ्य जानकारी और बातचीत का आग्रह
मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने डॉक्टरों से वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी सेहत को लेकर गंभीर है और चाहती है कि बातचीत के माध्यम से सभी मुद्दों का समाधान निकाला जाए। राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी उनसे अनशन समाप्त कर लोकतांत्रिक संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अपील की।
सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात को सरकार की ओर से गतिरोध समाप्त करने और सकारात्मक संवाद शुरू करने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह माना जा रहा है कि सरकार आंदोलनकारियों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहती है, ताकि शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर आम सहमति बन सके।
समर्थकों की उम्मीदें और आगे का रास्ता
वहीं, सोनम वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं के हितों की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर है। समर्थकों ने उम्मीद जताई है कि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी।
फिलहाल, सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। उनकी चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की उपचार प्रक्रिया तय की जाएगी। राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या नहीं।
