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सोनम राणा का राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शॉट पुट में स्वर्ण पदक

भारतीय पैरा एथलीट सोनम राणा ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शॉट पुट F57 स्पर्धा में 13.40 मीटर थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने ड्यूटी...

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सोनम राणा का राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शॉट पुट में स्वर्ण पदक

द क्लिफ न्यूज़ | ग्लासगो | 1 अगस्त 2026

भारतीय पैरा एथलेटिक्स के दिग्गज खिलाड़ी सोनम राणा ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुषों की शॉट पुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। ग्लासगो में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में, राणा ने 13.40 मीटर के उत्कृष्ट थ्रो के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में भारत के शुभम जुयाल ने 13.28 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जिससे भारत ने इस इवेंट में एक शानदार डबल पोडियम उपलब्धि दर्ज की।

यह स्वर्ण पदक केवल एक खेल प्रतियोगिता की जीत नहीं है, बल्कि यह सोनम राणा के असाधारण संघर्ष, अदम्य साहस और अटूट इच्छाशक्ति की एक प्रेरणादायक गाथा का प्रतीक है। भारतीय सेना के एक पूर्व जवान के रूप में, सोनम राणा ने वर्ष 2006 में जम्मू-कश्मीर में अपनी ड्यूटी के दौरान एक दुखद माइन विस्फोट में अपना दायां पैर खो दिया था। इस भयावह हादसे ने उनके जीवन की दिशा को पूरी तरह से बदल दिया, लेकिन उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय, उन चुनौतियों को ही अपनी ताकत बनाने का संकल्प लिया।

एक सैनिक से विश्व स्तरीय पैरा एथलीट तक का सफर

दुर्घटना से पहले, सोनम राणा एक कुशल मुक्केबाज थे और भारतीय सेना में रहते हुए खेलों में अपने करियर को आगे बढ़ा रहे थे। पैर गंवाने के बाद, उन्होंने खेल की दुनिया से कुछ समय के लिए दूरी बना ली थी। इसी अवधि के दौरान, कर्नल गौरव दत्त ने उन्हें खेल के मैदान में लौटने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद, उन्होंने मुक्केबाजी को छोड़कर शॉट पुट और भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) को अपना नया लक्ष्य बनाया। कठिन प्रशिक्षण और अथक प्रयासों के माध्यम से, वह F57 वर्ग में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में से एक बन गए और लंबे समय तक शॉट पुट में दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाए रखी।

सोनम की यह वापसी आसान नहीं थी। सेना से रिटायरमेंट के बाद, उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में अपने नए सफर की शुरुआत की। शुरुआत में, उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अपने कृत्रिम पैर के साथ संतुलन बनाना और शॉट पुट को प्रभावी ढंग से फेंकना एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि, कर्नल दत्त के मार्गदर्शन और अपने स्वयं के दृढ़ संकल्प ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी। उन्होंने हर दिन अपनी सीमाएं पार करने का प्रयास किया, घंटों अभ्यास किया और अपने शरीर की सुनी। यह अटूट समर्पण ही था जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार किया।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय उपलब्धियों का अंबार

सोनम राणा का अंतरराष्ट्रीय करियर भी उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने एशियन पैरा गेम्स, विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया है। उनके नाम 28 अंतरराष्ट्रीय पदक और 60 राष्ट्रीय पदक दर्ज हैं। ट्यूनीस में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कई स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं।

इन पदकों के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत, अनगिनत यात्राएं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दबाव को झेलने का अनुभव है। हर पदक उनके लिए एक नई सीख और आत्मविश्वास का स्रोत रहा है। उन्होंने न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल की हैं, बल्कि युवा पैरा एथलीटों के लिए भी एक मिसाल कायम की है, उन्हें प्रेरित किया है कि वे भी अपनी शारीरिक सीमाओं को पार कर सकते हैं और खेल में अपना नाम कमा सकते हैं। उन्होंने हमेशा खेल भावना को सर्वोपरि रखा है और अपने विरोधियों का सम्मान किया है।

प्रेरणा का स्रोत: एक अदम्य भावना

फरवरी 2025 में चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी सोनम राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी शानदार फॉर्म और निरंतरता का परिचय दिया था। वहीं, 2022 में हुए एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने रजत पदक हासिल कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को गौरवान्वित किया था। जून 2021 में दिल्ली में आयोजित चयन ट्रायल में अपने बेहतरीन प्रदर्शन के बाद, उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ वर्ष बेहद चुनौतीपूर्ण रहे, लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी और अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में जीता गया यह स्वर्ण पदक, सोनम राणा के लंबे और कठिन संघर्ष तथा उनके समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। एक सैनिक से विश्व स्तरीय पैरा एथलीट बनने तक का उनका सफर, भारत भर के लाखों युवाओं और विशेषकर दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एक महान प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन यह सशक्त संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि किसी व्यक्ति का संकल्प मजबूत हो, तो वह हर बाधा को पार कर सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

यह पदक सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती पैरा खेल शक्ति का भी प्रतीक है। सोनम राणा की कहानी उन अनगिनत दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आशा की किरण है जो अक्सर समाज में उपेक्षित महसूस करते हैं। उनका खेल में वापसी करना और सर्वोच्च स्तर पर प्रदर्शन करना यह साबित करता है कि किसी भी प्रकार की शारीरिक चुनौती मनुष्य की क्षमता को सीमित नहीं कर सकती। वह युवा पीढ़ी के लिए एक रोल मॉडल हैं, जो उन्हें अपने सपनों का पीछा करने और कभी हार न मानने के लिए प्रेरित करती है। उनकी जीत खेल के मैदान से परे, सामाजिक समावेशिता और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण का एक बड़ा संदेश देती है।