रीवा में SIR ड्यूटी के दौरान 61 वर्षीय BLO को ब्रेन हैमरेज, परिवार ने लगाया ‘अत्यधिक दबाव’ का आरोप
मध्य प्रदेश में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बीते दो हफ्तों में चार BLO की मौतों के बाद एक और गंभीर मामला सामने...
मध्य प्रदेश में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बीते दो हफ्तों में चार BLO की मौतों के बाद एक और गंभीर मामला सामने आया है। रीवा ज़िले में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) विजय पांडे अचानक बेहोश होकर गिर पड़े और उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ। घटना ने फिर से SIR व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीमारी के बावजूद ड्यूटी—परिवार बोला, “डर के कारण काम जारी रखा”
61 वर्षीय विजय पांडे पुष्पराज नगर में सहायक शिक्षक हैं और SIR के लिए BLO के रूप में नियुक्त थे। परिवार का आरोप है कि वे कई दिनों से बीमार थे, लेकिन रिपोर्टिंग प्रेशर और कार्रवाई के डर से छुट्टी नहीं ले पा रहे थे।
पांडे की पत्नी सुशीला पांडे ने बताया:
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दो महीने पहले डॉक्टरों ने प्रोस्टेट संबंधी समस्या, बुखार और ऑपरेशन की सलाह दी थी।
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छुट्टी के लिए आवेदन दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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घटना वाले दिन भी उन्हें तेज़ बुखार था, फिर भी ड्यूटी पर भेजा गया।
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“एक वरिष्ठ अधिकारी ने सिर्फ नाड़ी देखकर कहा कि उन्हें बुखार नहीं है और चेतावनी दी कि लक्ष्य में देरी हुई तो निलंबन होगा,” परिवार का आरोप है।
उसके बाद रात लगभग 10:30 बजे पांडे अचानक बेहोश होकर गिर पड़े और उन्हें तत्काल रीवा अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है।
“फोन पर लगातार दबाव भरे कॉल आते रहे”—बेटे का आरोप
उनके बड़े बेटे परियार्त्र पांडे, जो एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र हैं, ने बताया कि स्वास्थ्य कारणों से छूट मांगी गई थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा,
“हमने पिता को अस्पताल पहुंचाया और सोचा कि कार्रवाई बाद में देखेंगे—जान पहले ज़रूरी है।”
परिवार के अनुसार लगातार फील्ड-वर्क, घर-घर जाकर फॉर्म भरने का दबाव और हालिया निलंबन ने पांडे की मानसिक स्थिति को और खराब कर दिया था।
SIR प्रक्रिया पर फिर सवाल—अत्यधिक लक्ष्य, दबाव और निलंबन का डर
SIR (Special Intensive Revision) मतदाता सूची के डिजिटल अपडेट के लिए चलाया जा रहा सबसे तेज़ और कठिन अभियान माना जा रहा है। BLOs पर फॉर्म अपडेट, घर-घर सत्यापन, डिजिटल अपलोड और समयसीमा के कड़े नियमों का दबाव रहता है।
राज्य में 11 नवंबर से अब तक चार BLO की मौतें स्वास्थ्य और कार्यदबाव से जोड़ी जा चुकी हैं, जिसे लेकर कर्मचारी संगठनों ने सरकार से राहत और सुरक्षा मानकों में सुधार की मांग की है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य जोखिम के बावजूद मैदान में बड़े पैमाने पर स्टाफ की तैनाती “सिस्टम की खामियां उजागर करती है।”
डिजिटलाइजेशन में रोचक पैटर्न—शहरी क्षेत्र पीछे, आदिवासी ज़िले आगे
एक दिलचस्प ट्रेंड यह है कि आदिवासी बहुल ज़िले इस बार डिजिटल फॉर्म अपलोड में तेज़ी दिखा रहे हैं:
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बरवानी, अलीराजपुर और झाबुआ—तीनों जिलों में BLOs ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद तेज़ प्रगति की है।
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यहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों की वजह से एंट्री पूरी करने में तकनीकी और समय संबंधी चुनौतियाँ हैं, लेकिन स्थिति अपेक्षा से बेहतर है।
इसके उलट—
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भोपाल, इंदौर और ग्वालियर, राज्य के तीन सबसे बड़े शहरी जिले, लगातार निचले स्थानों पर हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े शहरों में आबादी का दबाव, बार-बार होने वाले पते बदलने, और स्टाफ की कमी प्रमुख कारण हैं।
24 नवंबर को शाम 3 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार:
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मध्य प्रदेश ने 65.17% डिजिटलाइजेशन पूरा किया
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12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में चौथे स्थान पर है
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पाँच करोड़ से अधिक मतदाताओं वाले राज्यों में राजस्थान के बाद दूसरे स्थान पर है।
यह घटना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला कई गंभीर प्रश्न उठाता है:
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क्या SIR जैसी विस्तृत प्रक्रियाओं के लिए स्टाफ की सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक पर्याप्त हैं?
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क्या सरकारी कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर इतना बढ़ गया है कि वे बीमार होने पर भी छुट्टी नहीं ले पाते?
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क्या डिजिटाइजेशन लक्ष्य तय करते समय मानव संसाधन और फील्ड स्थितियों का सही आकलन किया गया था?
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, BLOs चुनावी प्रक्रिया की नींव हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनावी विश्वसनीयता का हिस्सा है।
