सिंहस्थ-2028: मध्य प्रदेश पुलिस ने मास्टर ट्रेनर्स सेमिनार से तैयारियों को दी गति
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए मध्य प्रदेश पुलिस ने 303 मास्टर ट्रेनर्स को राज्य स्तरीय सेमिनार में प्रशिक्षित किया। डीजीपी ने सुरक्षित और व्यवस्थित आयोजन...

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 24 जुलाई 2026
विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक, सिंहस्थ-2028 की व्यापक तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से शुक्रवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में 'सिंहस्थ-2028: ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कोर्स' का राज्य स्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य सिंहस्थ की तैयारियों के लिए संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा करना, जिलों में प्रशिक्षण की प्रगति का मूल्यांकन करना, फील्ड के अनुभव साझा करना और प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार तथा नवाचारों को पूरे प्रदेश में लागू करने की रणनीति तैयार करना रहा। इस सेमिनार में प्रदेशभर के 303 मास्टर ट्रेनर्स, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और सिंहस्थ-2028 से जुड़े अधिकारी शामिल हुए।
सेमिनार को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री कैलाश मकवाणा ने कहा कि सिंहस्थ-2028 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक विशाल आध्यात्मिक समागम है। उन्होंने इस आयोजन की सफलता को मध्य प्रदेश पुलिस की पेशेवर दक्षता, संवेदनशीलता और समन्वित कार्यशैली की कसौटी बताया। डीजीपी ने इस बात पर जोर दिया कि मध्य प्रदेश पुलिस पिछले तीन वर्षों से सिंहस्थ-2028 की तैयारियों पर योजनाबद्ध और चरणबद्ध तरीके से काम कर रही है। उन्होंने फरवरी 2026 में उज्जैन में हुए मंथन और विषय विशेषज्ञों के सेमिनार से मिले सुझावों के आधार पर विकसित प्रशिक्षण अवधारणा का भी उल्लेख किया। अप्रैल 2026 में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पुलिस ड्यूटी पोर्टल, eHRMS आधारित मानव संसाधन प्रबंधन, साइबर सुरक्षा योजना और विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। यह सेमिनार इन्हीं प्रयासों की अगली कड़ी था, जिसमें अब तक हुए प्रशिक्षण कार्यों की समीक्षा और आगामी कार्ययोजना का निर्धारण किया गया।
सिंहस्थ की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक और भर्ती पर जोर
डीजीपी श्री मकवाणा ने बताया कि सिंहस्थ-2028 के लिए आवश्यक पुलिस अधोसंरचना के विकास हेतु विस्तृत डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार कर शासन को भेजा गया है, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है और कई महत्वपूर्ण कार्य प्रगति पर हैं। उन्होंने आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग पर ज़ोर देते हुए विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्य प्रणाली विकसित करने की बात कही। पुलिस मुख्यालय द्वारा विकसित eHRMS (Electronic Human Resource Management System) अंतिम चरण में है, जिससे सिंहस्थ के दौरान हजारों पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी, तैनाती और मानव संसाधन प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन से मिले महत्वपूर्ण अनुभवों का भी ज़िक्र किया। पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रयागराज जाकर वहां की व्यवस्थाओं, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और अन्य सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का अध्ययन किया गया था, जिन्हें अब सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में शामिल किया जा रहा है। श्री मकवाणा ने बताया कि पुलिस बल को प्रशिक्षित करने के लिए दो चरणों में 'ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स' (ToT) कार्यक्रम संचालित किए गए, जिनके माध्यम से प्रदेशभर में 303 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए गए हैं। ये प्रशिक्षित अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने जिलों में हजारों पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भूमिका आधारित प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
पुलिस बल की क्षमता वृद्धि और भर्ती प्रक्रिया
डीजीपी श्री मकवाणा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2025 में 8,500 और वर्ष 2026 में 9,662 पदों पर भर्ती की स्वीकृति मिलने को पुलिस बल की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 18 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया से सिंहस्थ-2028 सहित भविष्य की कानून-व्यवस्था संबंधी आवश्यकताओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा। उन्होंने यह भी बताया कि लंबे समय बाद उप निरीक्षक और सूबेदार संवर्ग में भर्ती की गई है, जिसका प्रशिक्षण शीघ्र ही प्रारंभ होगा। आने वाले समय में पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी और उनकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
श्री मकवाणा ने वर्ष 2004 के सिंहस्थ का स्मरण करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्ट योजना और बेहतर समन्वय से उस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया था। उन्होंने कहा कि आज तकनीकी संसाधनों और आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्थाओं के साथ मध्य प्रदेश पुलिस कहीं अधिक सक्षम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिंहस्थ-2028 के दौरान भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, अंतर्राज्यीय समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली सबसे महत्वपूर्ण विषय होंगे, जिन पर अभी से विशेष ध्यान देते हुए व्यापक तैयारी की जा रही है।
मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका और सेवा भाव पर बल
डीजीपी श्री मकवाणा ने मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका को सिंहस्थ-2028 की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि उन्हीं के द्वारा प्रशिक्षित पुलिसकर्मी मैदान में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। इसलिए, प्रशिक्षण को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया न मानकर, पुलिस बल की कार्यकुशलता, अनुशासन, संवेदनशीलता और सेवा भावना विकसित करने का माध्यम बताया। उन्होंने सभी मास्टर ट्रेनर्स से आह्वान किया कि वे प्रत्येक पुलिसकर्मी में यह भावना विकसित करें कि सिंहस्थ में ड्यूटी केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि महाकाल की नगरी में करोड़ों श्रद्धालुओं की सेवा का एक पुण्य अवसर है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण, सुदृढ़ अधोसंरचना, प्रभावी समन्वय और जनसहभागिता के माध्यम से मध्य प्रदेश पुलिस सिंहस्थ-2028 को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित, तकनीक-सक्षम और अनुकरणीय आयोजन के रूप में स्थापित करेगी। उन्होंने सेमिनार के आयोजकों, वरिष्ठ अधिकारियों और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सिंहस्थ-2028 की सफलता मध्य प्रदेश पुलिस की सामूहिक प्रतिबद्धता, दूरदृष्टि और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक होगी।
अन्य राज्यों के अनुभवों का समावेश और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर ज़ोर
सेमिनार में महानिदेशक, रेलवे, उत्तर प्रदेश श्री डी. प्रकाश ने प्रयागराज महाकुंभ-2025 के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में उन सर्वोत्तम व्यवस्थाओं (Best Practices) का प्रभावी उपयोग करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता प्रशिक्षित मानव संसाधन, पर्याप्त बजट, संसाधनों की उपलब्धता और प्रभावी समन्वय पर निर्भर करती है। श्री प्रकाश ने मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक और परिस्थिति-आधारित बनाने, बहु-स्तरीय संचार व्यवस्था विकसित करने, होल्डिंग एरिया, वन-वे मूवमेंट, कलर कोडिंग एवं मार्शलिंग जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने और अफवाहों व भ्रामक सूचनाओं पर त्वरित नियंत्रण के लिए सुदृढ़ सूचना तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया।
विशेष पुलिस महानिदेशक, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ श्री उपेन्द्र जैन ने कहा कि सिंहस्थ-2028 में ड्यूटी करना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सेवा का पुण्य अवसर है। उन्होंने प्रशिक्षण में सेवा भाव, संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने प्रत्येक प्रशिक्षक को सिंहस्थ क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली, आधुनिक तकनीक, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तथा वैकल्पिक संचार व्यवस्था का व्यावहारिक प्रशिक्षण सुनिश्चित करने की सलाह दी। उन्होंने स्नान पर्वों, पीक ऑवर्स एवं आपात परिस्थितियों के लिए पृथक कार्ययोजना तथा सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को सुरक्षित एवं दुर्घटनामुक्त सिंहस्थ का आधार बताया।
महानिदेशक, उत्तर प्रदेश श्रीमती रेणुका मिश्रा ने पुलिसिंग के मानवीय पक्ष पर विशेष ज़ोर देते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन की सफलता केवल सुरक्षा व्यवस्था से नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के अनुभव से तय होती है। उन्होंने 'Police Service, Not Police Force' की अवधारणा को अपनाने का आह्वान किया और कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु के साथ सम्मानजनक एवं संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षकों से आग्रह किया कि वे पुलिस बल को केवल प्रक्रियाओं का ही नहीं, बल्कि सेवा, उत्तरदायित्व, आत्मानुशासन और सकारात्मक सोच का भी प्रशिक्षण दें, ताकि सिंहस्थ-2028 प्रत्येक श्रद्धालु के लिए एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार अनुभव बन सके।
कार्यक्रम के दौरान विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण श्री रवि कुमार गुप्ता तथा सेवानिवृत्त विशेष पुलिस महानिदेशक श्री सरबजीत सिंह ने प्रशिक्षण के विभिन्न आयामों, नेतृत्व क्षमता, व्यवहारिक प्रशिक्षण और अनुभव आधारित सीख पर अपने विचार साझा किए। दोपहर बाद आयोजित 'प्रशिक्षण में नवाचार की आवश्यकता' विषयक पैनल चर्चा में उज्जैन रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक श्री नवनीत भसीन, पीएसओ टू डीजीपी श्री विनीत कपूर, पुलिस अधीक्षक उज्जैन श्री प्रदीप शर्मा, उप निदेशक (एमपीपीए) भौंरी श्री रामजी श्रीवास्तव एवं पीटीएस उज्जैन की पुलिस अधीक्षक श्रीमती मनीषा पाठक सोनी ने प्रशिक्षण में नवाचार, तकनीक के उपयोग और व्यवहारिक अभ्यास आधारित प्रशिक्षण प्रणाली पर अपने विचार रखे।
इसके उपरांत 'जिलों में प्रशिक्षण के संबंध में फीडबैक, सुझाव एवं अनुभव साझा' विषय पर आयोजित सत्र में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक उज्जैन जोन श्री राकेश कुमार गुप्ता, सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक श्री अंशुमान सिंह तथा उप पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा) श्री तरुण नायक ने प्रभावी प्रशिक्षण व्यवस्था, प्रशिक्षकों की भूमिका और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। सेमिनार के अंतिम चरण में पुलिस अधीक्षक खंडवा ने ओंकारेश्वर ड्यूटी से संबंधित प्रशिक्षण तैयारियों पर एक प्रस्तुति दी। वहीं, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, उज्जैन जोन श्री राकेश कुमार गुप्ता ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण की आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का समापन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) श्री ए.साईं मनोहर द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।
