सिंध नदी में अवैध रेत खनन पर एनजीटी सख्त, 6 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
एनजीटी ने भिंड-दतिया में सिंध नदी में हो रहे अवैध रेत खनन पर स्वत: संज्ञान लिया है। 3-सदस्यीय समिति गठित, 6 सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 7 अगस्त 2026
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), सेंट्रल जोन बेंच भोपाल ने मध्य प्रदेश के भिंड और दतिया जिलों में सिंध नदी के प्रवाह क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध और मशीनीकृत रेत उत्खनन पर कड़ा रुख अपनाया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, एनजीटी ने इस गंभीर मामले की जांच के लिए तीन-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
याचिकाकर्ता डॉ. गोविन्द सिंह की ओर से पेश हुए अधिवक्ता पुलकित गोधा और महिमा सिंह ने एनजीटी के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि भिंड जिले के 18 और दतिया जिले के 6 गांवों में सिंध नदी में भारी अर्थ-मूविंग मशीनों और सक्शन-ड्रेजिंग नौकाओं का उपयोग करके अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। उन्होंने बताया कि यह उत्खनन किसी भी मान्य पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) और जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) के बिना किया जा रहा है, और निकाली गई रेत को बिना वैध ट्रांजिट परमिट के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में धड़ल्ले से सप्लाई किया जा रहा है।
पारिस्थितिक संकट का दावा
याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सिंध नदी राष्ट्रीय चंबल (घड़ियाल) वन्यजीव अभयारण्य का एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक हिस्सा है। यह क्षेत्र मगरमच्छों, घड़ियालों, इंडियन फ्लैपशेल कछुओं और दुर्लभ प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्रमुख प्रजनन स्थल है। याचिका के अनुसार, भारी मशीनों द्वारा किए जा रहे अवैध उत्खनन से नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह और इन जलीय जीवों के अस्तित्व पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है, जो पर्यावरण के लिए अत्यंत चिंताजनक है।
एनजीटी के निर्देश और अगली सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए, एनजीटी के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शिवकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने एक 3-सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया है। इस समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), पर्यावरण विभाग मध्य प्रदेश और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हैं। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस जांच के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
एनजीटी ने गठित समिति को निर्देश दिया है कि वह प्रभावित स्थलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करे और छह सप्ताह के भीतर एक तथ्यात्मक (फैक्टुअल) और की गई कार्रवाई (एक्शन टेकन) रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में प्रस्तुत करे। इसके साथ ही, ट्रिब्यूनल ने मध्य प्रदेश शासन सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
