सिक्किम सुरंग हादसा: 8 शव मिले, 18 फंसे, मीथेन गैस से बचाव कार्य बाधित
सिक्किम में तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भूस्खलन से 8 श्रमिकों के शव मिले हैं। 12 बचाए गए, 18 फंसे हैं। मीथेन गैस के रिसाव से बचाव कार्य बाधित हो रहा है।

द क्लिफ न्यूज़ | गंगटोक | 21 जुलाई 2026
सिक्किम के गंगटोक के पास तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के तहत पटेल इंजीनियरिंग द्वारा निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण भूस्खलन हादसे में अब तक आठ श्रमिकों के शव बरामद किए गए हैं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 12 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, हालांकि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, अभी भी 18 अन्य श्रमिकों के सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है, और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
यह हादसा सोमवार दोपहर लगभग 3:09 बजे हुआ, जब सुरंग के भीतर निर्माण कार्य चल रहा था। अचानक हुए भूस्खलन के कारण सुरंग का एक बड़ा हिस्सा मलबे और मिट्टी से भर गया, जिससे अंदर काम कर रहे कई मजदूर फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, भूस्खलन की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसने निर्माण स्थल पर काम कर रहे श्रमिकों को संभलने का मौका नहीं दिया।
मीथेन गैस का रिसाव बना बड़ी बाधा
स्थिति तब और भी भयावह हो गई जब फंसे हुए श्रमिकों के बचाव के प्रयास जारी थे, तभी सुरंग के भीतर मीथेन गैस का रिसाव शुरू हो गया। गैस के इस रिसाव ने बचाव दलों के लिए सुरंग के अंदर प्रवेश करना अत्यंत जोखिमपूर्ण बना दिया है। मीथेन एक ज्वलनशील गैस है और इसका उच्च सांद्रता में होना विस्फोट के खतरे को बढ़ा सकता है। बचाव अभियान में जुटे कर्मी विशेष सुरक्षा उपकरणों, जैसे कि सेल्फ-कन्टेन्ड ब्रीदिंग एपरेटस (SCBA) और गैस मॉनिटरिंग प्रणाली की मदद से अत्यंत सावधानी और धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
अधिकारियों द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय सुरंग में लगभग 27 लोगों के फंसे होने का अनुमान लगाया गया था। अब तक आठ शवों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है, जबकि अन्य लापता मजदूरों की तलाश और उन्हें बचाने का अभियान लगातार जारी है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें समन्वय में काम कर रही हैं। इस बचाव अभियान में कई एजेंसियां जुटी हुई हैं, और प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है, हालांकि मीथेन गैस के रिसाव और मलबे की अस्थिरता जैसी चुनौतियां अभियान को जटिल बना रही हैं।
परियोजना की सुरक्षा व्यवस्थाओं और मलबे के निपटान के तरीकों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि बचाव कार्य पूरा होने के बाद दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी। इस बीच, प्रभावित श्रमिकों के परिवारों को सहायता प्रदान की जा रही है और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया गया है। बचाव दल नवीनतम तकनीक और उपकरणों का उपयोग करके मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। सुरंग की भूवैज्ञानिक स्थिति और भूस्खलन के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर मौजूद है।
