सीएम योगी: कांग्रेस अड़ जाती तो बंटवारा न होता, मोदी होते तो बचते लाखों हिंदू
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परमहंस रामचंद्र दास की पुण्यतिथि पर कहा कि 1947 में कांग्रेस के अडिग रहने पर देश का विभाजन नहीं होता। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में परमहंस के योगदान को भी याद किया।

द क्लिफ न्यूज़ | अयोध्या | 14 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यदि 1947 में कांग्रेस अपने रुख पर अड़ जाती तो देश का विभाजन नहीं होता। साथ ही, उन्होंने कहा कि यदि उस समय देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जैसा कोई नेतृत्व होता, तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होने पाता। मुख्यमंत्री ने यह बातें दिगंबर अखाड़े में परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज की 23वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में परमहंस रामचंद्र दास के योगदान को भी याद किया और कहा कि जो राम का द्रोही होगा, उससे अंतिम समय तक मुकाबला किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश के सभी राम भक्तों की ओर से परमहंस रामचंद्र दास को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बताया कि पूज्य महाराज का जीवनकाल प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के ध्येय को समर्पित रहा। 1949 से लेकर उनके देहांत तक, महाराज का पूरा जीवन श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लिए समर्पित था। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इतिहास केवल पढ़ने और परीक्षा के लिए नहीं होता, बल्कि यह प्रेरणा और सबक भी सिखाता है। उन्होंने कहा कि इतिहास से जुड़े क्षणों से गर्व महसूस होता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। जब हम इतिहास की अनदेखी करते हैं, तो इसका अर्थ है कि हम अतीत की गलतियों को दोहराने का प्रयास कर रहे हैं।
ऐतिहासिक विभाजन और सुरक्षा पर सीएम की टिप्पणी
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में यदि कांग्रेस एक बार अडिग रहती तो देश का विभाजन शायद नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उस समय सरदार वल्लभभाई पटेल या नरेंद्र मोदी जैसे दृढ़ निश्चयी प्रधानमंत्री होते, तो लाखों हिंदुओं का नरसंहार रुक सकता था। श्री आदित्यनाथ ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति, देश के भीतर माओवाद और नक्सलवाद के उन्मूलन जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया, जिन्हें वे कांग्रेस सरकारों की विफलता के रूप में देखते हैं, क्योंकि ये उनकी 'कमाई के जरिया' थे और देश को अस्थिर करने का माध्यम थे।
मुख्यमंत्री ने वर्तमान भारत की वैश्विक छवि की सराहना करते हुए कहा कि आज जब कोई भारतीय नागरिक विदेश जाता है, तो उसे सम्मान मिलता है, जो यूपीए सरकार के कार्यकाल में संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि तब सनातन धर्म की चर्चा नहीं होती थी, अयोध्या में राम मंदिर, काशी में काशी विश्वनाथ धाम और मथुरा-वृंदावन का सौंदर्यीकरण संभव नहीं हो पाया था। उन्होंने समाजवादी पार्टी के एक नेता के बयान का भी जिक्र किया, जिन्होंने कथित तौर पर कहा था कि सरकार आने पर सपा कंस की मूर्ति लगाएगी, जिसके बाद उनके निधन का उल्लेख किया।
संभल में ऐतिहासिक विनाश और वर्तमान स्थिति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1526 में, लगभग 500 साल पहले, संभल में श्री हरिहर मंदिर को तोड़कर एक 'गुलामी का ढांचा' खड़ा किया गया था। यदि उसी समय संभल में एकजुट होकर इसका प्रतिकार किया गया होता, तो 1528 में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि को क्षति पहुंचाने का दुस्साहस कोई नहीं करता। उन्होंने कहा कि मात्र दो वर्ष के भीतर, अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर को क्षतिग्रस्त किया गया और सनातन धर्मावलंबियों का अपमान करते हुए एक गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया। 14 अगस्त 1947 को, स्वतंत्रता से एक दिन पहले, न केवल हिंदू और सिख मारे गए थे, बल्कि भारत का भी विभाजन हुआ था।
मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में आज भी निर्दोष हिंदुओं के मारे जाने का जिक्र किया और कहा कि भारत के कुछ राजनेता वहां की घटनाओं पर मौन रहते हैं, जबकि देश के भीतर हर घटना पर हाय-तौबा मचाते हैं। उन्होंने 14 अगस्त 1947 की घटना के लिए जवाबदेही तय करने का प्रश्न उठाया और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें केवल सत्ता से मतलब था, देश की जनता से नहीं। उन्होंने कहा कि आज भी वही स्थिति है, भले ही नाम और चेहरे बदल गए हों, लेकिन काम करने का तरीका वही है।
सपा सरकार के दौरान हुए दंगों और मुकदमे वापसी पर सवाल
मुख्यमंत्री ने संभल की स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि वहां जाने लायक स्थिति नहीं थी और जिला बने हुए लगभग 30 साल बीत जाने के बावजूद उसका मुख्यालय नहीं बन पाया था। उन्होंने बताया कि न्यायालय के आदेश पर जब एक टीम सर्वे करने गई, तो उपद्रव किया गया, जिसमें पुलिसकर्मी और निर्दोष हिंदू निशाना बने। उन्होंने कहा कि 1947 के बाद से ऐसा कोई वर्ष नहीं बीता था जब वहां दंगे न हुए हों। 1976 और 1978 में इतने भीषण दंगे हुए थे कि एक साथ 150 हिंदुओं की हत्या कर दी गई। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 1996 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने बेशर्मी से सभी मुकदमे वापस ले लिए, जिसके कारण एक भी दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने इसे स्वतंत्र भारत में सामूहिक नरसंहार की घटना बताया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2024 में संभल दंगाइयों को चिन्हित कर कार्रवाई की गई और हालात नियंत्रित किए गए। जांच में पता चला कि संभल में केवल हरिहर मंदिर ही नहीं, बल्कि 67 तीर्थ, 19 कूप और 10 हजार एकड़ भूमि पर भी अवैध कब्जा हो गया था, जिसे मुक्त कराया गया। अब इस भूमि का आवंटन गरीबों, दलितों और कमजोर वर्ग के लोगों को किया जा रहा है। वहां जिला मुख्यालय का निर्माण भी हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संभल अब बदल चुका है, वहां दंगे नहीं होते और शांति व सौहार्द का माहौल है।
बदली हुई अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व में अयोध्या को पर्वों-त्योहारों से भी वंचित रखा जाता था। इसे संकरी गलियों और गंदगी का पर्याय बना दिया गया था। घाट, राम की पैड़ी और सरयू नदी का जल प्रदूषित रहता था, जिससे श्रद्धालु स्नान करने में मजबूर होते थे। उन्होंने कहा कि आज बदली हुई अयोध्या त्रेता युग का स्मरण कराती है। अब यहां के संतों को दुनिया में चिढ़ाया नहीं जाता, बल्कि अयोध्या का नाम सुनकर लोग उन्हें पूरा सम्मान देते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान संतों का संघर्ष अकल्पनीय था।
उन्होंने चेतावनी दी कि रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले और राम जन्मभूमि आंदोलन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पैरवी करने वाले लोग अब फिर साजिश कर रहे हैं। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि में चढ़ावा चोरी से संबंधित प्रकरण का उल्लेख किया, जिस पर एसआईटी का गठन हुआ और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज श्रीराम जन्मभूमि के खिलाफ लंबी पैरवी करने वाले खुद को राम भक्त घोषित करने की कोशिश कर रहे हैं।
परमहंस महाराज की स्मृतियाँ और राम द्रोहियों से संघर्ष
मुख्यमंत्री योगी ने महंत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज से जुड़े पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि उनका 1949 से पहले से गोरक्षपीठ से जुड़ाव रहा। सांसद रहने के दौरान दिल्ली से लखनऊ आते-जाते समय गोरखपुर की यात्रा के बीच वे दिगंबर अखाड़े में परमहंस जी महाराज से मिलते थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ अक्सर उन्हें परमहंस जी का आशीर्वाद लेने के लिए कहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि परमहंस जी महाराज के अंतिम दिनों में उन्होंने कई बार दर्शन किए और वे अक्सर राम मंदिर निर्माण के बारे में पूछते थे। मुख्यमंत्री ने परमहंस जी के गोरक्षपीठ आगमन की यादों को भी साझा किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1990 में जब राम भक्तों पर गोलियां चलाई गईं, तो परमहंस जी महाराज ने दिगंबर अखाड़े के बाहर राम भक्तों का स्मारक बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने डंके की चोट पर स्मारक बनवाने का काम किया, जिसे तत्कालीन सरकार भी रोक नहीं पाई थी। मुख्यमंत्री ने राम भक्ति के इस 'उद्भट स्वरूप' को दुर्लभ बताया।
मुख्यमंत्री ने चंदा चोरी की घटना पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि इस पर कार्रवाई हुई। हालांकि, उन्होंने कहा कि राम द्रोही अयोध्या धाम, श्रीराम जन्मभूमि और सनातन धर्म को अपमानित करने के साथ देश में माहौल खराब करने में जुटे हैं। उन्होंने सभी को इसके प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी चलने वाली है और सत्ता के मद में वे लोग चुप नहीं बैठेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, "जो राम द्रोही होगा, उससे अंतिम दम तक निपटेंगे और पूरी ताकत से उसका मुकाबला भी करेंगे।" उन्होंने कहा कि तभी पूज्य परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी स्मृति को नमन करना सार्थक होगा।
इस अवसर पर दिगंबर अखाड़ा के महंत पूज्य सुरेश दास जी महाराज, पूज्य संत डॉ. राजेंद्र देवाचार्य जी महाराज, पूज्य संत डॉ. रामकमल दास वेदांती जी महाराज, साध्वी ऋतंभरा जी, जगद्गुरु राघवाचार्य जी महाराज, जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्न दास जी, श्री महंत जन्मेजय शरण जी महाराज, श्री महंत माधव दास जी महाराज, महंत गंगा दास जी महाराज, महंत शिव शंकर दास जी महाराज, महंत भरत दास जी महाराज, महंत रविंद्र दास जी महाराज सहित अन्य संतगण भी उपस्थित रहे।
