सीधी: निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज में 22 छात्रों का आवंटन, CBI जांच की मांग
मध्य प्रदेश के सीधी में आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग पर फर्जीवाड़े का आरोप है। NSUI ने निर्माणाधीन भवन वाले कॉलेज में 22 छात्रों के आवंटन पर CBI जांच की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | 7 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संचालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुसमी तहसील अंतर्गत भादौरा स्थित आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज पर आरोप है कि जिस कॉलेज के भवन और वास्तविक अस्तित्व को लेकर संदेह है, उसे जीएनएम (GNM) के 15 और बीएससी नर्सिंग (B.Sc. Nursing) के 7, यानी कुल 22 विद्यार्थियों का प्रवेश के लिए आवंटन कर दिया गया है। इस मामले में छात्र संगठन NSUI ने कॉलेज प्रबंधन के साथ-साथ मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाए हैं और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है कि ऐसे कॉलेज, जिसका भवन तक निर्माणाधीन है और जिसके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लगे हों, उसे 120 सीटों की मान्यता कैसे दी गई और फिर उसमें 22 छात्रों का आवंटन कैसे संभव हुआ। उन्होंने सवाल किया कि क्या विद्यार्थियों के आवंटन से पहले कॉलेज का कोई भौतिक सत्यापन किया गया था? यदि हाँ, तो उस दौरान भवन, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, आवश्यक उपकरण, फैकल्टी और क्लीनिकल प्रशिक्षण की सुविधाएं वास्तव में मौजूद थीं या नहीं? यदि ये सुविधाएं मौजूद नहीं थीं, तो छात्रों को उस कॉलेज में आवंटित करने का आधार क्या था?
सांसद परिवार की भूमिका पर उठे सवाल
रवि परमार ने इस कथित फर्जीवाड़े के तार सीधी के भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा से जोड़ते हुए उनके बेटे अनुप मिश्रा और बहू बीना मिश्रा की भूमिका पर भी संदेह जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज के संचालन और प्रबंधन में सांसद के परिवार के सदस्यों सहित अन्य लोगों की भूमिका है। ऐसे में, एक निर्माणाधीन भवन वाले 'भूतिया' कॉलेज को मान्यता देने और फिर उसमें विद्यार्थियों का आवंटन करने की पूरी प्रक्रिया की गहन जांच होनी चाहिए।
परमार ने कहा कि ऐसे कॉलेजों के कारण ही मध्य प्रदेश के हजारों नर्सिंग छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उनकी परीक्षाएं आयोजित नहीं हो पा रही हैं और न ही उनके परीक्षा परिणाम जारी हो पा रहे हैं। इसके बावजूद, सरकार द्वारा ऐसे कॉलेजों को संचालित करने की अनुमति देना, छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की साजिश प्रतीत होती है।
नर्सिंग काउंसिल की कार्यप्रणाली संदिग्ध
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष ने केवल कॉलेज प्रबंधन को ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को भी जांच के दायरे में लिया है। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक रसूख के चलते नियमों को ताक पर रखकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है, तो संबंधित अधिकारियों और कॉलेज संचालकों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए।
इस पूरे मामले में NSUI ने CBI से कॉलेज की मान्यता, उसके भवन, फैकल्टी, दस्तावेजों और विद्यार्थियों के आवंटन की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, सांसद परिवार से जुड़े लोगों की भूमिका का भी पर्दाफाश करने का आग्रह किया है। यह मामला मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और नियामक निकायों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।
