सीधी में निर्माणाधीन भवन में खुले नर्सिंग कॉलेज पर CBI जांच की मांग
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज को निर्माणाधीन भवन में मान्यता मिलने का आरोप है। NSUI ने CBI से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | सीधी | 5 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक नए नर्सिंग कॉलेज की मान्यता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज, कुसमी तहसील के भादौरा में, निर्माणाधीन भवन में 120 सीटों के लिए मान्यता दिए जाने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह मान्यता नियमों का उल्लंघन कर दी गई है और इसमें राजनीतिक दखलअंदाजी की संभावना है।
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया है कि भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनुप मिश्रा और बहू बीना मिश्रा से जुड़े लोगों द्वारा संचालित इस कॉलेज को उन परिस्थितियों में मान्यता दी गई जब भवन का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि कॉलेज के संचालन, प्रबंधन और आर्थिक लेन-देन में सांसद के परिवार के सदस्यों तथा उनके करीबियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। NSUI ने मुख्यमंत्री और विभाग के आला अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की गुहार लगाई है।
सांसद परिवार पर कॉलेज संचालन का आरोप
NSUI ने दावा किया है कि आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज का संचालन अनुप मिश्रा, बीना मिश्रा, वैष्णवी मिश्रा, शरद पाठक, राजेश सिंह चौहान, रामजियावन पटेल और रीवा के संजय द्विवेदी द्वारा सीधी चैलेंज कप टूर्नामेंट स्पोर्ट समिति सीधी के माध्यम से किया जा रहा है। रवि परमार ने सवाल उठाया है कि क्या सांसद पुत्र और उनके करीबियों को नियमों की अवहेलना कर नर्सिंग कॉलेज की मान्यता प्रदान की गई। उन्होंने मध्यप्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों पर नियमों को ताक पर रखकर काम करने का आरोप लगाया है।
संगठन की ओर से CBI से मांग की गई है कि वह कॉलेज के स्वामित्व, संचालन, प्रबंधन, आर्थिक लेन-देन, मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच करे। NSUI का कहना है कि यदि राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल कर नियमों के साथ खिलवाड़ हुआ है, तो इसकी जांच अनिवार्य है।
निर्माणाधीन भवन में 120 सीटों की मान्यता पर सवाल
NSUI की शिकायत के अनुसार, कॉलेज ने बी.Sc. Nursing की 60 और GNM Nursing की 60, कुल 120 सीटों के लिए मान्यता का आवेदन किया था। रवि परमार का आरोप है कि मान्यता प्रक्रिया के दौरान कॉलेज का भवन पूरी तरह से निर्माणाधीन था और वर्तमान में भी निर्माण कार्य जारी है। इसके बावजूद, निरीक्षण दल ने कॉलेज को मान्यता के लिए उपयुक्त पाया। NSUI ने इस पर आपत्ति जताते हुए पूछा है कि यदि निरीक्षण के समय भवन, प्रयोगशालाएं और अन्य आवश्यक संसाधन निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध नहीं थे, तो निरीक्षण दल ने किस आधार पर कॉलेज को मान्यता के योग्य माना।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता को लेकर पहले से ही गंभीर सवाल उठते रहे हैं। पूर्व में हुए घोटालों के कारण हजारों नर्सिंग छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। दो बार CBI जांच हो चुकी है और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर-चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों की CBI जांच को अनिवार्य कर दिया है।
फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों की प्रामाणिकता पर संदेह
NSUI ने कॉलेज द्वारा प्रस्तुत किए गए फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों को भी फर्जी बताया है। संगठन का आरोप है कि शैक्षणिक फैकल्टियों द्वारा जमा किए गए अनुभव प्रमाण-पत्रों की प्रामाणिकता संदिग्ध है। इसलिए, CBI से यह मांग की गई है कि प्रत्येक प्रमाण-पत्र को संबंधित अस्पताल, संस्था अथवा नियोक्ता से सीधे सत्यापित कराया जाए। यदि कोई प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है, तो इसके आधार पर मान्यता प्राप्त करने में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।
NSUI का कहना है कि छात्र लाखों रुपये खर्च कर नर्सिंग शिक्षा प्राप्त करते हैं। यदि उन्हें ऐसी जगहों पर प्रवेश दिया जाता है जहां आवश्यक भवन, प्रयोगशालाएं और क्लीनिकल प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ेगा। बाद में कॉलेज की मान्यता, परीक्षा, डिग्री या पंजीयन को लेकर विवाद उत्पन्न होने पर सबसे अधिक कीमत विद्यार्थियों को चुकानी पड़ सकती है।
मान्यता देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग
NSUI के जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने जोर देकर कहा कि जांच केवल कॉलेज संचालकों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने मध्यप्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्ट्रार, मान्यता प्रक्रिया में शामिल निरीक्षण दल के सदस्यों और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। यह भी जांच का विषय है कि निरीक्षण के दौरान कॉलेज में वास्तव में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध थीं और निरीक्षण रिपोर्ट में उनका क्या उल्लेख किया गया था।
NSUI ने CBI, मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारियों से निम्नलिखित विशिष्ट जांच की मांग की है: कॉलेज के मान्यता संबंधी सभी दस्तावेजों का सत्यापन, भवन एवं प्रयोगशालाओं का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन, सभी फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों की जांच, निरीक्षण दल एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच, मान्यता प्रक्रिया में किसी राजनीतिक अथवा प्रशासनिक प्रभाव की भूमिका की जांच। संगठन ने यह भी मांग की है कि फर्जी दस्तावेज अथवा कूटरचना की पुष्टि होने पर संबंधित सभी व्यक्तियों के विरुद्ध FIR और वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, जांच के दौरान विद्यार्थियों के हितों और उनके शैक्षणिक भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। NSUI ने स्पष्ट किया है कि नर्सिंग शिक्षा के नाम पर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
