सिद्ध चक्र महामंडल विधान: विश्व शांति के लिए 528 अर्घ्य समर्पित
इटावा के श्री दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के सातवें दिन विश्व शांति की कामना के साथ 528 अर्घ्य...

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 28 जुलाई 2026
इटावा के श्री दिगंबर जैन नया शहर जैन मंदिर में चल रहे श्री 1008 सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के सातवें दिन आस्था और भक्ति का संगम देखने को मिला। इस दौरान मुनि श्री विशल्य सागर महाराज के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर विश्व शांति और जन कल्याण की कामना की।
धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में, विधान के सातवें दिन 528 अर्घ्य समर्पित किए गए। प्रतिष्ठाचार्य पंडित श्री संजय शास्त्री के निर्देशन में संपन्न हुए इस आयोजन में, श्रद्धालुओं ने अष्टद्रव्य से श्री जी की पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ प्राप्त किया। यह आयोजन एक विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है, जहाँ सामूहिक प्रार्थनाओं के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जाता है।
शांति धारा और पाद प्रक्षालन
कार्यक्रम में श्री जी की प्रथम शांति धारा करने का सौभाग्य श्री दिगंबर जैन विकास समिति के प्रदेश महामंत्री धर्मेंद्र जैन को प्राप्त हुआ। वहीं, द्वितीय शांति धारा अभिषेक जैन द्वारा की गई। मुनि श्री विशल्य सागर महाराज ने अपनी अमृतमयी वाणी से शांति धारा कराते हुए श्रद्धालुओं को धर्म मार्ग पर चलने का संदेश दिया और जीवन में शांति व सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा दी।
इसके अतिरिक्त, मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य श्रीमती चंद्रकला जैन, अजीत कुमार जैन एवं धर्मेंद्र जैन परिवार को मिला, जो एक पुण्य का कार्य माना जाता है।
धार्मिक भूमिकाओं का निर्वहन
इस महामंडल विधान के दौरान विभिन्न श्रद्धालुओं को महत्वपूर्ण धार्मिक भूमिकाएं निभाने का अवसर मिला। सौधर्म इंद्र गौरव जैन, यज्ञ नायक पवन जैन, गणपति कुबेर अभिषेक जैन, ईशान इंद्र नवनीत जैन, सनत कुमार इंद्र विशाल जैन, महेंद्र इंद्र सुमित प्रकाश जैन, ब्रह्मोद इंद्र जयवीर जैन एवं लान्तव इंद्र विजय जैन बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इन भूमिकाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय सहभागिता निभाई।
विश्व शांति महायज्ञ का समापन 29 जुलाई को
महिला मंडल अध्यक्ष बेबी जैन और अध्यक्ष सुदर्शन जैन ने बताया कि इस विधान का अंतिम दिन 29 जुलाई को होगा, जिस दिन विश्व शांति महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा। आयोजकों को उम्मीद है कि इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर विश्व शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करेंगे। यह कार्यक्रम जैन समुदाय की धार्मिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सामाजिक एकता और आध्यात्मिक उत्थान को बढ़ावा देता है।
