श्रीअन्न महोत्सव में 'विकसित भारत' के लिए नागरिकों से सहयोग का आह्वान
फर्रुखाबाद में श्रीअन्न महोत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें नागरिकों को मोटे अनाज के लाभों से अवगत कराया गया। सांसद ने 2047 तक विकसित राष्ट्र के...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 1 अक्टूबर 2026
फर्रुखाबाद के जेजेआर पैलेस में शासन के निर्देशानुसार जनपद स्तरीय श्रीअन्न महोत्सव एवं जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सत्रह सितंबर से सत्रह अक्टूबर तक संचालित सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को मोटे अनाज (मिलेट्स) के स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक करना था। इस अवसर पर 'विकसित भारत' के निर्माण में नागरिकों के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद मुकेश राजपूत ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के सामूहिक संकल्प को पूरा करने के लिए प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को अपनी प्राथमिकता में शामिल करना चाहिए। उन्होंने इस दौरान सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनियों का भी उद्घाटन किया, जिनका उद्देश्य नागरिकों को योजनाओं से अवगत कराना था।
मिलेट्स का स्वास्थ्य और आर्थिक महत्व
अमृतपुर विधायक सुशील कुमार शाक्य ने अपने संबोधन में मोटे अनाज के पारंपरिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप श्रीअन्न के उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह आज समय की मांग है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से आग्रह किया कि वे परिवार को स्वस्थ एवं सशक्त बनाने के उद्देश्य से मिलेट्स से बने पारंपरिक और आधुनिक व्यंजनों को अपनी दैनिक भोजन थाली का अभिन्न अंग बनाएं।
भोजपुर विधायक नागेन्द्र सिंह राठौर ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने खेतों में मोटे अनाज की फसलों को स्थान दें। उनका मानना था कि इससे न केवल समाज शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त होगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
किसानों के लिए आय का नया स्रोत
कृषि उपनिदेशक अरविंद मोहन ने कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि जनपद फर्रुखाबाद में सामा, कोदो और रागी जैसे मोटे अनाजों के उत्पादन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित रोगियों के लिए इन अनाजों को विशेष रूप से लाभकारी बताया। साथ ही, यह भी बताया कि सामा की फसल सीमित पानी में भी आसानी से तैयार हो जाती है, जिससे यह किसानों के लिए एक व्यवहार्य विकल्प बनता है। बाजार में इन फसलों की बढ़ती मांग को देखते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। सफल प्रतिभागियों को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत प्रशासिका मोनिका यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद्र वर्मा सहित कई विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में नागरिकों से आह्वान किया कि वे 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प को पूर्ण करने के लिए अपने-अपने स्तर पर सक्रिय योगदान सुनिश्चित करें।
