श्री सद्गुरु आश्रम में शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ, पोथी यात्रा में उमड़े भक्त
नर्मदापुरम के श्री सद्गुरु आश्रम में शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। समर्थ सद्गुरु बलभीम बाबा की समाधि से निकाली गई पोथी यात्रा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। कथा व्यास प्रफुल्ल जी महाराज ने मंत्र स्नान और आध्यात्मिक जीवन का महत्व बताया।

द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 15 अगस्त 2026
नर्मदापुरम स्थित श्री सद्गुरु आश्रम में भक्ति और अध्यात्म के माहौल में श्री शिवमहापुराण कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के पहले दिन, समर्थ सद्गुरु बलभीम बाबा की समाधि से श्री शिवमहापुराण की पोथी को श्रद्धापूर्वक कथा स्थल तक ले जाने के लिए एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जो भगवान शिव के जयकारों और भक्तिमय संगीत से वातावरण को सराबोर कर रहे थे।
पोथी को विधि-विधान के साथ कथा स्थल पर विराजमान किया गया, जिसके पश्चात कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस की कथा में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया और भगवान शिव की महिमा का श्रवण किया। आश्रम परिसर में एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार था, जहाँ भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से लीन नजर आए।
मंत्र स्नान और आत्मिक शुद्धता का महत्व
कथा के प्रथम दिन, कथा व्यास प्रफुल्ल जी महाराज ने श्री शिवमहापुराण के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन जीने की कला और मन की शांति का गहरा महत्व समझाया। उन्होंने ध्यान मुद्रा का प्रयोग करते हुए भक्तों को 'मंत्र स्नान' की अवधारणा से अवगत कराया। महाराज श्री ने इस बात पर जोर दिया कि मनुष्य के जीवन में बाहरी पवित्रता के साथ-साथ आंतरिक, अर्थात मन की शुद्धता भी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि मन को शांत और स्थिर रखने के लिए धार्मिक ग्रंथों का श्रवण और उनका अध्ययन एक महत्वपूर्ण माध्यम है। श्रद्धालुओं को श्री शिवमहापुराण का नियमित रूप से श्रवण करने और इसके उपदेशों को अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया गया। महाराज श्री ने भगवान शिव के 'भोलेनाथ' स्वरूप के साथ-साथ उनकी 'सर्वसमर्थता' का भी उल्लेख किया। उन्होंने सलाह दी कि ईश्वर के प्रति कभी छल-कपट का भाव नहीं रखना चाहिए, बल्कि सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ समर्पित होना ही कल्याण का मार्ग है।
शिवमहापुराण: जीवन का आध्यात्मिक मार्गदर्शक
कथा के प्रथम दिन, महाराज श्री ने श्री शिवमहापुराण के असाधारण महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवमहापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ या कथा मात्र नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को जीवन की दिशा दिखाने वाला एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। कथा श्रवण के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक विचारों का विकास कर सकता है, जो उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सहायता करते हैं।
भगवान शिव की भक्ति, ध्यान, आत्म-संयम, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलकर जीवन में वास्तविक शांति और आत्मिक संतोष की अनुभूति प्राप्त की जा सकती है। कथा के दौरान, आश्रम का वातावरण 'हर-हर महादेव' के जयघोषों से गूंजता रहा, जो भक्तों के उत्साह और भक्ति का प्रतीक था।
दैनिक अनुष्ठान: पार्थिव शिवलिंग अभिषेक
शिवमहापुराण कथा के आयोजन के साथ-साथ, प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जा रहा है। कथा के पहले दिन प्रातःकाल में पूजन और पार्थिव शिवलिंग अभिषेक का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर, प्रथम दिवस के यजमानों ने विधि-विधान पूर्वक भगवान शिव का पूजन-अर्चन और अभिषेक किया।
श्री अनिल जी गुप्ता, श्री शिरिष उपाध्याय, श्री सुनील कुमार त्रिवेदी, श्री लोकेन्द्र सिंह झाला, श्री विकास जडिया और श्री राजेश सेन ने सामूहिक रूप से पूजन-अर्चन एवं पार्थिव शिवलिंग अभिषेक में सहभागिता की। इन दैनिक अनुष्ठानों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को अपनी आस्था व्यक्त करने और आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान करना है।
आश्रम में भक्ति और आध्यात्मिकता का संगम
श्री सद्गुरु आश्रम में आयोजित शिवमहापुराण कथा के प्रथम दिन, श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक अनूठा वातावरण देखा गया। पोथी यात्रा से लेकर पार्थिव शिवलिंग अभिषेक और कथा श्रवण तक, सभी आयोजनों में भक्तों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को भगवान शिव की अपार महिमा, शिवमहापुराण के गहन आध्यात्मिक संदेश और सनातन धार्मिक परंपराओं से जोड़ना है।
आगामी दिनों में, कथा व्यास प्रफुल्ल जी महाराज शिवमहापुराण के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों और उनके गहन आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन करेंगे। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण के साथ-साथ अपने परिवार और समाज की सुख-शांति व मंगल की कामना भगवान शिव से की। यह कथा न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह लोगों को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने का एक माध्यम भी है।
