शिवपुरी में पीएम आवास योजना के प्लॉटों के खरीदार नहीं, अधूरे विकास कार्यों पर सवाल
शिवपुरी: मेडिकल कॉलेज के पास पीएम आवास योजना के तहत विकसित हो रही आवासीय परियोजना की धीमी गति चिंताजनक है। अधूरे विकास कार्य और प्लॉटों की अधिक कीमत खरीदारों को आकर्षित करने में विफल साबित हो रही है।

संवाददाता: रंजीत गुप्ता
द क्लिफ न्यूज़ | शिवपुरी | 29 अगस्त 2026
शिवपुरी नगर पालिका क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'सबको घर' योजना के तहत मेडिकल कॉलेज के समीप विकसित की जा रही आवासीय परियोजना अब धीमी रफ्तार और अधूरे विकास कार्यों के चलते मुश्किलों में घिर गई है। अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) योजना के तहत काटे गए लगभग एक हजार से अधिक प्लॉटों के लिए नगर पालिका को अपेक्षित खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे योजना की प्रगति पर गंभीर सवालिया निशान लग गया है।
नगर पालिका ने एमआईजी, एलआईजी और अन्य श्रेणियों के प्लॉटों की बिक्री के लिए अब तक चार से पांच बार विज्ञप्तियां प्रकाशित की हैं, लेकिन खरीदारों की संख्या उम्मीद से काफी कम रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस स्थिति का मुख्य कारण मौके पर बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों का अत्यंत धीमा होना है। एक आवासीय कॉलोनी में प्लॉट बेचने से पहले सड़क, बिजली, पानी, नाली और पार्क जैसी आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए, लेकिन टीएनसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) प्लान के अनुरूप प्रस्तावित विकास कार्य अभी भी अपूर्ण हैं। कई हिस्सों में सड़क और विद्युत व्यवस्था की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जिससे शाम ढलते ही क्षेत्र में अंधेरा छा जाता है, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी उत्पन्न होती हैं।
विकास कार्यों की कमी और उच्च दरें खरीदारों को कर रहीं हतोत्साहित
स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि जब तक कॉलोनी पूरी तरह विकसित होकर रहने योग्य नहीं बन जाती, तब तक प्लॉट बिक्री की कोशिशें सफल नहीं होंगी। वर्तमान स्थिति में, लोग ऐसी जगहों पर निवेश करने से कतरा रहे हैं जहां उन्हें तुरंत रहने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध न हों। प्लॉटों की निर्धारित कीमतें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। छोटे प्लॉट की कीमत लगभग 15 लाख रुपये और बड़े प्लॉट की कीमत लगभग 22 लाख रुपये तक बताई जा रही है। यह क्षेत्र शहर से लगभग तीन किलोमीटर दूर है और यहां पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, ऐसे में इन कीमतों पर प्लॉट खरीदने में आम लोगों की रुचि कैसे बढ़ेगी, यह एक बड़ा सवाल है। प्रधानमंत्री आवास योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराना है, इसलिए कीमतों का निर्धारण करते समय क्षेत्र की वर्तमान सुविधाएं, कनेक्टिविटी और आसपास के विकास को ध्यान में रखना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण में भी देरी
एएचपी योजना के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण की गति भी चिंताजनक है। एक हजार से अधिक आवासों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक लगभग 600 आवास ही बनकर तैयार हो पाए हैं। शेष आवासों का निर्माण लंबे समय से गति नहीं पकड़ पा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई हितग्राहियों ने आवास के लिए निर्धारित राशि जमा कर दी है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अभी तक आवास का लाभ नहीं मिला है। निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की ओर से ठेकेदार को भुगतान न मिलने की बात भी सामने आ रही है, जिसे निर्माण कार्य की गति प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव बनी बड़ी समस्या
निर्माणाधीन आवासों के साथ-साथ मौके पर बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। यदि मकान निर्माण के साथ-साथ आधारभूत सुविधाएं समय पर विकसित नहीं होतीं, तो योजना का मूल उद्देश्य, जो कि जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है, प्रभावित हो सकता है। केवल मकान बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक आवासीय क्षेत्र को रहने योग्य बनाने के लिए आवश्यक सुविधाओं का समय पर उपलब्ध होना भी अनिवार्य है।
स्थानीय लोगों की मांग: पहले सुविधाएं, फिर प्लॉट बिक्री
स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका से मांग की है कि प्लॉटों की बिक्री पर जोर देने से पहले मौके पर सभी आवश्यक विकास कार्य, जैसे सड़क, बिजली, पानी और प्रकाश व्यवस्था, को पूरा किया जाए। जब तक ये सुविधाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक प्लॉटों की बिक्री को गति मिलना मुश्किल है। इसके अतिरिक्त, प्लॉटों की कीमतों की भी व्यावहारिक समीक्षा किए जाने की मांग उठाई गई है। उनका मानना है कि यदि नगर पालिका योजना को व्यवस्थित तरीके से विकसित कर सुविधाएं उपलब्ध कराती है, तो न केवल प्लॉट खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे मकानों में हितग्राहियों को समय पर बसाया भी जा सकेगा। वर्तमान में, अधूरे विकास कार्य और धीमी निर्माण गति के कारण यह आवासीय योजना अपने निर्धारित उद्देश्यों से काफी दूर नजर आ रही है।
