शिक्षक का 2 साल से अनूठा संकल्प: घर की छत पर रोज फहराते हैं तिरंगा
जरहगांव के शिक्षक पीताम्बर दास मानिकपुरी ने राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान को जीवन का अनुशासन बना लिया है। पिछले दो वर्षों से वे प्रतिदिन अपने घर की छत पर विधिवत ध्वजारोहण कर रहे हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | जरहगांव | 14 अगस्त 2026
देशभक्ति केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन जाए तो वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत साबित होती है। जरहगांव नगर पंचायत के निवासी शिक्षक पीताम्बर दास मानिकपुरी ने पिछले करीब दो वर्षों से अपने घर की छत पर प्रतिदिन तिरंगा फहराकर राष्ट्रध्वज के प्रति अपने सम्मान और देश के प्रति निष्ठा का एक अनूठा मिसाल पेश किया है। उनका यह दैनिक अनुष्ठान राष्ट्रप्रेम को व्यावहारिक रूप देने का एक सशक्त उदाहरण है।
पीताम्बर दास की दिनचर्या का एक अभिन्न अंग राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान है। वे प्रतिदिन सुबह लगभग 8 बजे अपने घर की छत पर विधिवत ध्वजारोहण करते हैं। पूरा दिन तिरंगा सम्मान के साथ शान से फहराता रहता है। इसके पश्चात, शाम को निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए वे राष्ट्रध्वज को अत्यंत सम्मानपूर्वक उतारते हैं। ध्वजारोहण और ध्वजावतरण के हर चरण में वे राष्ट्रध्वज से जुड़े नियमों और मर्यादाओं का बारीकी से ध्यान रखते हैं। उनके लिए तिरंगा केवल एक वस्त्र का टुकड़ा नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, गौरव और राष्ट्रीय अस्मिता का जीवंत प्रतीक है।
राष्ट्रप्रेम का दो वर्षों से अटूट सिलसिला
यह परंपरा लगभग दो वर्षों से निर्बाध रूप से जारी है। पीताम्बर दास किसी विशेष अवसर, जैसे स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस, का इंतजार किए बिना प्रतिदिन यह कार्य करते हैं। चाहे मौसम कैसा भी हो - मूसलाधार बारिश, प्रचंड गर्मी या कड़ाके की सर्दी - राष्ट्रध्वज के सम्मान को उनकी दैनिक दिनचर्या में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलती है। आज के परिदृश्य में, जहाँ राष्ट्रीय पर्वों पर ही जगह-जगह तिरंगा दिखाई देता है, वहीं पीताम्बर दास का यह प्रयास इस मायने में भिन्न है कि उन्होंने राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान को अपने दैनिक जीवन का एक सहज और स्वाभाविक हिस्सा बना लिया है।
बचपन से स्काउट-गाइड से जुड़ाव और संस्कारों का प्रभाव
शिक्षक पीताम्बर दास मानिकपुरी का राष्ट्रध्वज और राष्ट्रसेवा के प्रति यह गहरा लगाव कोई आकस्मिक घटना नहीं है। बचपन से ही वे स्काउट-गाइड गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। स्काउटिंग के दौरान प्राप्त प्रशिक्षण ने उनके जीवन में अनुशासन, सेवा, जिम्मेदारी और राष्ट्रप्रेम जैसी भावनाओं को गहराई से स्थापित किया। स्काउट-गाइड से मिले ये संस्कार आज भी उनकी दिनचर्या में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं। राष्ट्रध्वज के प्रति उनकी सजगता, नियमों का कड़ाई से पालन और इसके प्रति प्रदर्शित सम्मान, इसी गहन प्रशिक्षण और संस्कारों का परिणाम माना जा सकता है।
बच्चों और समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
एक शिक्षक के रूप में, पीताम्बर दास का यह कार्य केवल व्यक्तिगत आस्था या धार्मिक निष्ठा तक ही सीमित नहीं है। उनके घर पर प्रतिदिन फहराता हुआ तिरंगा आसपास के बच्चों और अन्य नागरिकों में भी राष्ट्रध्वज के प्रति स्वाभाविक रूप से सम्मान की भावना को जागृत करता है। वे मानते हैं कि बच्चों को देशभक्ति की शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार और अनुशासन के माध्यम से सिखाना अधिक प्रभावी होता है। राष्ट्रध्वज के सम्मान की उनकी यह छोटी सी, परंतु निरंतर चलने वाली पहल, आने वाली पीढ़ी में देश के प्रति जिम्मेदारी और गौरव की भावना को अंकुरित करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
राष्ट्रप्रेम को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प
पीताम्बर दास मानिकपुरी का स्पष्ट मानना है कि देशभक्ति किसी एक विशेष दिन या राष्ट्रीय पर्व तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान प्रत्येक नागरिक का एक मौलिक कर्तव्य और जिम्मेदारी है। इसी दृढ़ भावना के साथ वे पिछले दो वर्षों से अपने निवास पर नियमित रूप से राष्ट्रध्वज फहरा रहे हैं। उनकी यह अनूठी पहल इस बात को रेखांकित करती है कि राष्ट्रप्रेम किसी बड़े आयोजन या भव्यता का मोहताज नहीं होता। एक व्यक्ति का अनुशासित और निरंतर चलने वाला प्रयास भी समाज में एक अत्यंत सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश संप्रेषित कर सकता है। जरहगांव में शिक्षक पीताम्बर दास का यह दैनिक संकल्प निश्चित रूप से राष्ट्रध्वज के सम्मान और देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुँचाने वाली एक प्रेरणादायक मिसाल के रूप में स्थापित हुआ है।
