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शिक्षक दिवस पर पीएम मोदी ने 82 उत्कृष्ट शिक्षकों से की अनौपचारिक बातचीत, समग्र विकास पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस पर 82 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत की। उन्होंने बच्चों के समग्र विकास, व्यवहारिक बदलावों और डिजिटल लत से बचाव पर जोर दिया।

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शिक्षक दिवस पर पीएम मोदी ने 82 उत्कृष्ट शिक्षकों से की अनौपचारिक बातचीत, समग्र विकास पर दिया जोर

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 सितंबर 2026

शिक्षक दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 5 सितंबर 2026 को अपने आधिकारिक निवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चयनित 82 उत्कृष्ट शिक्षकों और एजुकेटर्स के साथ एक अनौपचारिक संवाद किया। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के अनुभव सुनना और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, बच्चों के समग्र विकास तथा बदलती सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझावों का आदान-प्रदान करना था।

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि एक शिक्षक के लिए छात्र की शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ उसके व्यक्तिगत व्यवहार और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के स्वभाव और व्यवहार में होने वाले सूक्ष्म बदलावों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों के अनियंत्रित उपयोग से उत्पन्न होने वाले स्क्रीन एडिक्शन तथा नशे जैसी अन्य बुरी आदतों से बच्चों को बचाने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

बच्चों के व्यवहार और व्यक्तित्व पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षाओं में अंक प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, उनकी रुचियों, व्यवहारिक कुशलता और सामाजिक जुड़ाव को गहराई से समझने की आवश्यकता है। उनका मानना था कि शिक्षक, जो विद्यार्थियों के साथ लंबे समय तक जुड़े रहते हैं, उनके व्यवहार में किसी भी प्रकार के अचानक परिवर्तन को सबसे पहले पहचानने की स्थिति में होते हैं।

उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि यदि किसी छात्र के व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव देखे जाएं, तो उसके मूल कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में, उन्होंने नशीले पदार्थों और डिजिटल लत जैसी गंभीर समस्याओं से बच्चों को बचाने के लिए परिवार और विद्यालय के बीच सुदृढ़ समन्वय की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

बदलती पारिवारिक संरचना में शिक्षकों की बढ़ती भूमिका

प्रधानमंत्री ने बदलते सामाजिक परिदृश्य और संयुक्त परिवारों में आई कमी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके परिणामस्वरूप बच्चों के जीवन में शिक्षकों की भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि पूर्व में, बच्चों को परिवार के विभिन्न सदस्यों से जीवन के अनुभव और संस्कार सीखने का अवसर मिलता था, परंतु परिवारों के छोटे आकार के कारण अब विद्यालय और शिक्षक उनके व्यक्तित्व निर्माण में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे स्वयं को केवल एक विषय-विशेषज्ञ के रूप में न देखें, बल्कि विद्यार्थियों के लिए एक मार्गदर्शक, प्रेरक और उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास में सहायक के रूप में कार्य करें।

शिक्षकों द्वारा साझा किए गए नवोन्मेषी शिक्षण पद्धतियाँ

अनौपचारिक बातचीत के दौरान, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों ने अपने-अपने शिक्षण संस्थानों में अपनाई जा रही नवीन और रचनात्मक शिक्षण विधियों के बारे में अपने अनुभव प्रधानमंत्री के साथ साझा किए। इन शिक्षकों ने बताया कि किस प्रकार उन्होंने स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग, तकनीक का समावेश, गतिविधि-आधारित शिक्षण और व्यावहारिक अनुभवों को अपनी शिक्षण शैली का अभिन्न अंग बनाकर विद्यार्थियों की रुचि और जुड़ाव को बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री ने ऐसे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा को केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, बच्चों को वास्तविक दुनिया से जोड़ने, उन्हें व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने और विभिन्न प्रकार के कौशलों के विकास पर बल देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कक्षा से बाहर, वास्तविक दुनिया से बच्चों को जोड़ना

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से यह भी आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों और चुनौतियों को समझने का अवसर भी प्रदान करें। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय समुदायों, प्रकृति, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों से जोड़कर बच्चों के सीखने के अनुभव को अधिक व्यापक और समृद्ध बनाया जा सकता है।

उन्होंने शिक्षकों द्वारा शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए किए जा रहे इन प्रयोगों और नवाचारों को देश के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयास बताया। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य केवल पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों का सम्मान करना नहीं था, बल्कि उनके बहुमूल्य अनुभवों और सफलताओं से संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को लाभान्वित करना भी था।

82 शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

इस वर्ष, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए कुल 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स का चयन किया गया है। इनमें स्कूली शिक्षा विभाग से 48, उच्च शिक्षा से 21 और कौशल विकास मंत्रालय से 13 शिक्षक शामिल हैं। इन चयनित शिक्षकों को शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के साथ यह अनौपचारिक संवाद, पुरस्कार वितरण समारोह से पूर्व इन शिक्षकों को अपने अनूठे अनुभव साझा करने और शिक्षा के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। इस चर्चा में बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके व्यवहार, व्यक्तित्व विकास और जीवन कौशल पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश प्रमुख रहा।

शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री की यह बातचीत, शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम और परीक्षाओं से परे ले जाकर बच्चों के समग्र और सर्वांगीण विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। विशेष रूप से डिजिटल युग में विद्यार्थियों के समक्ष उभरती नई चुनौतियों को देखते हुए, शिक्षकों की भूमिका अब केवल ज्ञान के प्रसारक तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मार्गदर्शक, संरक्षक और व्यक्तित्व निर्माता के रूप में भी उनकी महत्ता अत्यधिक बढ़ गई है।