शिक्षा मंत्री का शिक्षकों को संदेश: नालंदा की तर्ज पर बिहार को फिर बनाएंगे ज्ञान का केंद्र
शिक्षक दिवस पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बिहार के शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने नालंदा की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए राज्य को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से ज्ञान की राजधानी बनाने का संकल्प दोहराया।

द क्लिफ न्यूज़ | पटना | 5 सितंबर 2026
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के समस्त शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक न केवल ज्ञान के प्रसारक हैं, बल्कि संस्कारों के वाहक, व्यक्तित्व के निर्माता और राष्ट्र के प्रथम शिल्पी हैं। उन्होंने गुरु की महत्ता को भारतीय संस्कृति में सर्वोपरि बताते हुए कहा कि यह दिवस महान दार्शनिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति में शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का पावन अवसर है।
शिक्षा मंत्री ने बिहार की प्राचीन ज्ञान परंपरा का स्मरण करते हुए नालंदा की गौरवशाली विरासत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिहार विश्व स्तरीय शिक्षा और ज्ञान का प्रमुख केंद्र था। अब उसी ज्ञान परंपरा को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्जीवित कर प्रदेश को पुनः ज्ञान की राजधानी बनाने का संकल्प लिया गया है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का नया दृष्टिकोण
तिवारी ने बिहार में एक ऐसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, विज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ मानवीय संवेदना और आधुनिकता का भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ उत्कृष्ट समन्वय हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की कक्षाओं में ही कल का बिहार आकार ले रहा है, जहाँ शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही दिशा, आत्मविश्वास और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षक का व्यवहार, विचार, अनुशासन और संवेदनशीलता विद्यार्थियों के व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ती है।
'विकसित भारत' में शिक्षकों की भूमिका
शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत@2047' के महत्वपूर्ण संकल्प में शिक्षा की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, नवाचार, कौशल, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों के आधार पर भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में लाने में शिक्षकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बिहार को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का अंतिम लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को ज्ञानवान, कुशल, संस्कारयुक्त, आत्मनिर्भर और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना है।
उन्होंने विद्यालयों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विज्ञान, गणित तथा तकनीक के प्रति रुचि उत्पन्न करने, कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने, भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा से विद्यार्थियों को जोड़ने तथा नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया।
शिक्षकों के सम्मान की प्रतिबद्धता
शिक्षा मंत्री ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के सम्मान और गरिमा के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने, विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा को निखारने, शिक्षा में संस्कार और आधुनिकता का सामंजस्य स्थापित करने तथा नालंदा की ऐतिहासिक शैक्षिक विरासत को एक नवीन स्वरूप में आगे बढ़ाने के अपने संकल्प को पुनः व्यक्त किया। संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े…' का उल्लेख करते हुए तिवारी ने गुरु को ज्ञान का वास्तविक सम्मान बताया। उन्होंने शिक्षकों के त्याग, तपस्या, परिश्रम और समर्पण को नमन करते हुए उन्हें शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई दी।
