शिक्षा का सार: चरित्र निर्माण, संस्कार और मानवीय मूल्य - नौगाँव में संगोष्ठी
नौगाँव स्थित जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान में शिक्षकों के लिए आयोजित संगोष्ठी में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और मानवीय व्यवहार पर बल दिया गया। प्राचार्य आर.के....

नौगाँव मध्य प्रदेश | संवाददाता: राकेश पाठक
द क्लिफ न्यूज़ | 7 अक्टूबर 2026
नौगाँव स्थित जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित एक विशेष संगोष्ठी में भावी शिक्षकों को शिक्षा के वास्तविक अर्थ और समाज निर्माण में उनकी भूमिका पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया गया। संगोष्ठी में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि शिक्षा का सर्वोपरि उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, संस्कारों का विकास और मानवीय मूल्यों को जीवन में उतारना है।
संस्थान के प्राचार्य श्री आर.के. वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा या धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके संस्कारों, व्यवहार और सेवा की भावना से होती है। उन्होंने कानूनी दंड और सामाजिक बहिष्कार के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि कानूनी दंड सीमित अवधि का हो सकता है, जिसे एक निश्चित समय के बाद भुलाया जा सकता है। किंतु, सामाजिक कलंक और उपेक्षा व्यक्ति के मन पर जीवनभर गहरा नकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं, जिससे वह मानसिक ग्लानि का शिकार हो सकता है। इसलिए, शिक्षा प्रणाली में संस्कारों को प्राथमिकता देना अत्यंत अनिवार्य है।
नैतिक मूल्यों का महत्व और समाज निर्माण
श्री वर्मा ने शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें नैतिकता, अनुशासन और संवेदनशीलता जैसे गुणों से भी समृद्ध करें। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था का उदाहरण देते हुए समझाया कि जहाँ न्यायालय अपराधों के लिए दंड तय करता है, वहीं सामाजिक उपेक्षा व्यक्ति को अंतर्मन से प्रभावित करती है।
इस अवसर पर समाजसेवी संतोष गंगेले कर्मयोगी ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित करने और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। गंगेले ने कहा कि शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि एक ऐसे श्रेष्ठ नागरिक का निर्माण करना है जो अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को भली-भांति समझ सके। उन्होंने ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ जीवन में प्रगति करने का मंत्र दिया।
वर्तमान समय में नैतिक शिक्षा की आवश्यकता
संगोष्ठी में उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों ने वक्ताओं के विचारों को वर्तमान समय के लिए अत्यंत प्रासंगिक और मार्गदर्शक बताया। उन्होंने सर्वसम्मति से इस बात पर बल दिया कि आज के दौर में नैतिक शिक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता है, जो युवाओं को सही दिशा दिखाने में सहायक सिद्ध हो सकती है। कार्यक्रम के समापन पर, वक्ताओं ने सभी प्रतिभागियों को राष्ट्र सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
