शेयर बाजार में तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 76,570 पर बंद, निवेशकों को ढाई लाख करोड़ का घाटा
2 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 373 अंक गिरकर 76,570 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 141 अंक फिसलकर 23,914 पर आ गया।

द क्लिफ न्यूज़ | 3 सितंबर 2026
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 373.93 अंक (0.49%) की भारी गिरावट के साथ 76,570.35 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 141.35 अंक यानी 0.59% की कमजोरी के साथ 23,914.45 पर लुढ़क गया। इस व्यापक बिकवाली के दबाव के चलते शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, गिरावट के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी प्रमुख कारण रहे। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध के बढ़ने से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं। इस वृद्धि ने आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके अतिरिक्त, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी वैश्विक निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है, जिससे वे उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव
सेंसेक्स और निफ्टी में शामिल प्रमुख शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), बैंकिंग और रियल्टी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के शेयर सबसे अधिक प्रभावित हुए। प्रमुख बैंकों, जैसे एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), के शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसने बैंकिंग सूचकांक को नीचे धकेलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑटो शेयरों में मंदी का असर उत्पादन और मांग दोनों पर पड़ने की आशंका है, जबकि आईटी कंपनियों पर वैश्विक मंदी की आहट के बीच लाभप्रदता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों पर नियंत्रण और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो मुद्रास्फीति (Inflation) पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति पर भी असर पड़ सकता है। बॉन्ड यील्ड की दिशा भी बाजार के उतार-चढ़ाव को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। आगामी सत्रों में बाजार किस दिशा में बढ़ेगा, यह प्रमुख आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों पर काफी हद तक निर्भर करेगा।
