शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में बड़ा फर्जीवाड़ा: NSUI ने CBI जांच की मांग की
NSUI ने मप्र के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्राचार्य, फैकल्टी की कमी और फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों पर CBI जांच की मांग की है। संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 23 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहां अब निजी कॉलेजों के साथ-साथ शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। छात्र संगठन NSUI ने रविवार को एक पत्रकार वार्ता में मध्य प्रदेश शासन द्वारा संचालित इन कॉलेजों में प्राचार्य, उप प्राचार्य और आवश्यक शैक्षणिक फैकल्टी की भारी कमी, साथ ही मान्यता प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। संगठन ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने पत्रकार वार्ता में बताया कि सत्र 2026-27 की मान्यता के लिए आवेदन करने वाले 22 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में से तीन, जिनमें राजधानी भोपाल का बीएमएचआरसी नर्सिंग कॉलेज, अनुपपुर का अमरकंटक विश्वविद्यालय का शासकीय नर्सिंग कॉलेज और दतिया का शासकीय नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं, को मान्यता नहीं दी गई है। यह स्थिति तब है जब इन कॉलेजों में शैक्षणिक कर्मचारियों की भारी कमी है।
अधिकारियों और फैकल्टी की कमी पर गंभीर आरोप
रवि परमार ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में 06 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्राचार्य (प्रिंसिपल) का पद खाली है, जबकि 10 कॉलेजों में उप प्राचार्य (वाइस प्रिंसिपल) की नियुक्ति नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त, अधिकांश शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और ट्यूटर जैसे आवश्यक शैक्षणिक पदों पर मध्यप्रदेश शासन के मान्यता नियम 2018 के अनुसार पर्याप्त संख्या में फैकल्टी मौजूद नहीं है। यह स्थिति सीधे तौर पर सैकड़ों नर्सिंग विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य को प्रभावित कर रही है।
फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों का गंभीर आरोप
NSUI ने आरोप लगाया कि सत्र 2026-27 की मान्यता प्राप्त करने के लिए शासकीय नर्सिंग कॉलेजों द्वारा प्रस्तुत किए गए आवेदनों में कई मामलों में प्राचार्य, उप प्राचार्य और एसोसिएट प्रोफेसर जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए फर्जी और कूटरचित (कथित तौर पर) अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए गए। इसका एक प्रमुख उदाहरण भोपाल के शासकीय नर्सिंग कॉलेज बीएमएचआरसी का बताया गया, जहां असिस्टेंट प्रोफेसर को सीधा वाइस प्रिंसिपल दर्शाया गया, जबकि उप प्राचार्य को एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत दिखाया गया। इसी प्रकार, अमरकंटक विश्वविद्यालय के नर्सिंग कॉलेज, जो अभी तक शुरू भी नहीं हुआ है, वहां के प्राचार्य ने 1 वर्ष 06 माह और उप प्राचार्य ने 3 वर्ष का अनुभव दर्शाया है, जो कि असंभव है।
हाईकोर्ट में याचिका दायर, उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए, अधिवक्ताओं अभिषेक पाण्डेय और अंशुल तिवारी ने बताया कि इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने की प्रक्रिया, फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों और शैक्षणिक स्टाफ की कमी की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल द्वारा नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने के लिए मध्यप्रदेश शासन का मान्यता नियम 2018 लागू है, जिसके तहत किसी भी कॉलेज को मान्यता के लिए एक प्राचार्य, एक उप प्राचार्य, दो एसोसिएट प्रोफेसर, तीन असिस्टेंट प्रोफेसर या तीन ट्यूटर होना अनिवार्य है। सीटों की संख्या बढ़ने पर फैकल्टी की संख्या में भी आनुपातिक वृद्धि का प्रावधान है।
अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने इस ओर भी इशारा किया कि पूर्व में भी दो बार नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच हो चुकी है, जिसमें कई शासकीय कॉलेजों में कमियां पाई गई थीं, लेकिन लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा उन कमियों को दूर करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
NSUI नेताओं ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा सीधे तौर पर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे में, यदि सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में ही प्राचार्य, उप प्राचार्य और आवश्यक फैकल्टी उपलब्ध नहीं होंगे, और मान्यता प्रक्रिया में प्रस्तुत दस्तावेजों पर ही सवाल उठेंगे, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर हजारों नर्सिंग विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ेगा।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में व्याप्त इन गंभीर अनियमितताओं पर तत्काल संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक सुधार की कार्रवाई नहीं की, तो NSUI विद्यार्थियों के साथ मिलकर चरणबद्ध आंदोलन करेगा। संगठन ने कहा है कि इस मुद्दे को सड़क से लेकर न्यायालय तक मजबूती से उठाया जाएगा।
