शराब पीकर ड्यूटी पर आए भृत्य की दो वेतनवृद्धियां रोकी गईं
गुना में कलेक्टर ने एक भृत्य को ड्यूटी पर शराब पीकर आने और सुरक्षा गार्ड से बहस करने के आरोप में दो वेतनवृद्धियां रोकने की सजा सुनाई है।

द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 24 अगस्त 2026
जिला गुना के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट किशोर कुमार कन्याल ने कार्यालय कलेक्टर में पदस्थ भृत्य दिनेश कुमार भील के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करते हुए उनकी आगामी दो वेतनवृद्धियों को असंचयी प्रभाव से रोकने का दंड अधिरोपित किया है। यह निर्णय भृत्य द्वारा अनुशासनहीनता के गंभीर मामले में लिया गया है।
आदेश के अनुसार, दिनेश कुमार भील 14 जून 2026 को रात्रिकालीन ड्यूटी पर थे, जब उन्होंने रात लगभग 10:30 बजे ईवीएम सुरक्षा गार्ड गौरव रघुवंशी के साथ शराब के नशे में बहस की। जांच के दौरान ब्रेथलाइजर परीक्षण में भील द्वारा शराब का सेवन किए जाने की पुष्टि हुई थी, जो कर्तव्य निर्वहन के दौरान कदाचार का स्पष्ट प्रमाण था। यह घटना न केवल शासकीय नियमों का उल्लंघन थी, बल्कि ड्यूटी के प्रति उनकी निष्ठा पर भी सवाल उठाती है।
विभागीय कार्रवाई और बचाव का अवसर
इस मामले में, मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 16 के तहत दिनेश कुमार भील को आरोप-पत्र जारी किया गया था। आरोप-पत्र में उन पर लगाए गए आरोपों का विस्तृत विवरण दिया गया था, जिसके आधार पर विभागीय जांच की जानी थी। उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए 10 दिनों का विधिवत अवसर दिया गया था। यह प्रक्रिया शासकीय नियमों के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई थी।
हालांकि, आरोप-पत्र प्राप्त होने के बावजूद, दिनेश कुमार भील ने निर्धारित अवधि में कोई जवाब दाखिल नहीं किया। यह निष्क्रियता उनके ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार करने के समान मानी गई और इससे प्रकरण में आगे की कार्रवाई आवश्यक हो गई। नियमों के तहत, सरकारी कर्मचारियों को विभागीय जांच के दौरान अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार होता है, और इस अधिकार का उपयोग न करना स्वयं को दोषी ठहराने जैसा हो सकता है।
दंड का निर्धारण
जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दिनेश कुमार भील ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के उपनियम (1), (2), (3) और नियम 23 का उल्लंघन किया है। नियम 3 सरकारी कर्मचारियों के लिए आचरण के सामान्य सिद्धांतों को निर्धारित करता है, जिसमें अनुशासन, सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता शामिल हैं। नियम 23 विशिष्ट रूप से मादक द्रव्यों के सेवन के संबंध में दिशा-निर्देश देता है। इन नियमों के उल्लंघन को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 10 के अंतर्गत, उन्हें लघु शास्ति के रूप में उनकी आगामी दो वेतनवृद्धियों को असंचयी प्रभाव से रोकने का दंड सुनाया है।
इस दंड का प्रभाव यह होगा कि उनकी अगली दो वेतन वृद्धियां रोक दी जाएंगी। 'असंचयी प्रभाव' का अर्थ है कि यह दंड केवल भविष्य में मिलने वाली वेतन वृद्धि को प्रभावित करेगा, न कि पिछली वेतन वृद्धियों पर इसका कोई असर पड़ेगा। यह दंड अनुशासनहीनता के कृत्य के लिए एक स्पष्ट संदेश देता है कि कर्तव्य निर्वहन के दौरान मादक द्रव्यों का सेवन स्वीकार्य नहीं है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस तरह की कार्रवाई सरकारी महकमे में व्यवस्था बनाए रखने और कर्मचारियों के बीच अनुशासनात्मक माहौल को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
