शनि वक्री: ज्योतिषाचार्य जता रहे वैश्विक उथल-पुथल व बड़े बदलावों की आशंका
ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल ने शनि की वक्री चाल व गुरु की अतिचारी गति को वैश्विक उथल-पुथल का संकेत बताया है। 31 जुलाई से बनने वाला 'बंधक योग' भी बड़ी चुनौतियों की ओर इशारा कर रहा है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 27 जुलाई 2026
ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल ने ग्रहों की वर्तमान चाल और स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह समय वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण उथल-पुथल का संकेत दे रहा है। संस्थान के ज्योतिषाचार्य एवं भविष्यवक्ता पंडित विनोद गौतम के अनुसार, 28 जुलाई की रात्रि 8:42 बजे न्याय के देवता शनिदेव अपनी वक्री गति प्रारंभ करेंगे, जबकि देवगुरु बृहस्पति पहले से ही अतिचारी (तेज़ गति) अवस्था में चल रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बृहस्पति की अतिचारी चाल और शनि की वक्री चाल का यह संयोग बड़े परिवर्तनों और चुनौतियों का अग्रदूत माना जा रहा है।
पंडित गौतम ने प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा, “अतिचारे गते जीवे, शनि वक्रत्व मांगते। हा हा भूतं जगत सर्वं, रूडमुंडा च मेधनी।” इसका अर्थ है कि जब बृहस्पति शीघ्र गति में हो और शनि वक्री हो, तो यह विश्व स्तर पर अस्थिरता, संघर्ष और बड़े परिवर्तनों का सूचक होता है। ऐसी स्थिति में युद्ध जैसी परिस्थितियां बनने और विभिन्न देशों के बीच तनाव बढ़ने की प्रबल आशंका जताई गई है। ज्योतिष का यह दृष्टिकोण, ग्रहों की विशेष गतियों को पृथ्वी पर होने वाली घटनाओं से जोड़कर देखता है, और प्राचीन काल से ही इन ज्योतिषीय संकेतों को गंभीरता से लिया जाता रहा है।
जलीय राशियों पर विशेष प्रभाव की आशंका
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि देव इस समय जलीय राशि मीन में वक्री हो रहे हैं। इस कारण ज्योतिषीय दृष्टिकोण से समुद्री क्षेत्रों, तटीय इलाकों और जल से जुड़े अन्य क्षेत्रों पर विशेष प्रभाव की संभावना व्यक्त की गई है। पंडित गौतम ने प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप और अन्य विपदाओं के संकेतों की भी चर्चा की है। उन्होंने बताया कि बृहस्पति ग्रह की अतिचारी अवस्था में शनि के वक्री होने से ग्रहों की यह स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। ज्योतिष मठ संस्थान के अनुसार, ग्रहों की यह स्थिति वर्ष के अंत तक प्रभावी रहने की संभावना है। इसलिए, ऐसे समय में समाज को संयम, एकजुटता और अत्यधिक सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। जल से संबंधित आपदाएं, समुद्री व्यापार में व्यवधान और तटीय समुदायों के लिए विशेष चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं, ऐसे संकेत प्राप्त हो रहे हैं।
31 जुलाई से बनेगा 'बंधक योग'
पंडित विनोद गौतम ने आगामी 31 जुलाई से एक और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटनाक्रम के बनने का दावा किया है। उनके अनुसार, इस दिन से राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाएंगे, जिसे ज्योतिष शास्त्र में 'बंधक योग' के नाम से जाना जाता है। यह योग 31 जुलाई को सुबह 6:20 बजे चंद्रमा के कुंभ राशि में प्रवेश के साथ बनने की उम्मीद है और यह 15 अगस्त तक प्रभावी रहने की संभावना है। यह स्थिति तब बनती है जब राहु और केतु के अक्ष में अन्य सभी ग्रह आ जाते हैं, जो ज्योतिषीय रूप से एक चुनौतीपूर्ण अवधि का संकेत माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 'बंधक योग' की अवधि में कई देशों की राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव देखे जा सकते हैं। समुद्री गतिविधियों, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी इसके व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। यह योग विशेष रूप से उन देशों के लिए चिंताजनक हो सकता है जिनकी अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर करती है या जो भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ सकती है।
भारत और मध्य प्रदेश पर प्रभाव
पंडित गौतम ने भारत की प्रभाव राशि कुंभ बताई है, जिसके स्वामी स्वयं शनि देव हैं। शनि के वक्री होने से भारत की आंतरिक एवं बाहरी दोनों ही परिस्थितियों में परिवर्तन के संकेत मिल सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और सरकार विरोधी गतिविधियों को लेकर भी ज्योतिषीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। भारत जैसे विशाल देश के लिए, जहां विभिन्न प्रकार की भौगोलिक और राजनीतिक स्थितियां हैं, ऐसे ज्योतिषीय प्रभावों का विश्लेषण महत्वपूर्ण हो जाता है।
मध्य प्रदेश की प्रभाव राशि मकर है, जिसके स्वामी भी शनि देव हैं। इस कारण प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलावों की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। मकर राशि के जातक और प्रदेश के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में अप्रत्याशित घटनाक्रम देखे जा सकते हैं, जिससे व्यवस्था में परिवर्तन आ सकता है।
कुछ राशियों पर पड़ेगा विशेष प्रभाव
ज्योतिष मठ संस्थान के अनुसार, 'बंधक योग' का प्रभाव कुछ विशेष राशियों पर अधिक केंद्रित हो सकता है। इन राशियों में कुंभ (न्याय व्यवस्था), मीन (जल, धर्म-कर्म), मेष (सैन्य क्षेत्र), वृष (फिल्म जगत), मिथुन (व्यापार), कर्क (जल, मन, मस्तिष्क) और सिंह (सत्ता, शासन) शामिल हैं। इन राशियों से जुड़े जातकों को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है।
पंडित गौतम के अनुसार, इन विशिष्ट राशियों से जुड़े जातकों को इस अवधि में अपने कार्यों में अप्रत्याशित बाधाएं, उन्नति में विलंब, आर्थिक चुनौतियां और मानसिक तनाव जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने इन सभी लोगों से धैर्य बनाए रखने और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ इन परिस्थितियों का सामना करने की अपील की है। यह सलाह विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है जो इन प्रभावित राशियों से संबंधित हैं और जो अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
उन्होंने अंत में कहा कि ग्रहों की चाल प्रकृति का नियम है और यह समय-समय पर परिवर्तन का संकेत देती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में व्यक्ति को अपने विवेक, संयम और आपसी सहयोग से कार्य करना चाहिए। यह एक ऐसा समय है जब व्यक्तिगत स्तर पर शांत रहने और सामूहिक हित को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। ग्रहों की चाल अप्रत्याशित परिवर्तन ला सकती है, लेकिन मानव विवेक और एकजुटता इन चुनौतियों से निपटने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
