शाहपुरा तालाब: NGT का 50 मीटर दायरे में निर्माण रोकने का आदेश, 3 माह में होगी कार्रवाई
भोपाल के शाहपुरा तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए NGT ने सख्त रुख अपनाया है। तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर के दायरे में सभी अवैध कब्जे और निर्माण 3 महीने में हटाए जाएंगे।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 4 सितंबर 2026
भोपाल के प्रतिष्ठित शाहपुरा तालाब को अतिक्रमण और अवैध निर्माण से मुक्ति दिलाने की दिशा में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। NGT की सेंट्रल जोनल बेंच ने आदेश दिया है कि तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर की परिधि में जितने भी अवैध कब्जे और पक्के निर्माण मौजूद हैं, उन्हें अगले तीन महीनों के भीतर हर हाल में हटाना होगा।
इस आदेश के माध्यम से शाहपुरा तालाब के चारों ओर 50 मीटर का क्षेत्र 'नो-कंस्ट्रक्शन जोन' घोषित किया गया है। NGT ने स्पष्ट किया है कि शाहपुरा तालाब एक अधिसूचित आर्द्रभूमि (Notified Wetland) है, इसलिए इसके FTL से 50 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के स्थायी या अस्थायी निर्माण की इजाजत नहीं होगी। इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य तालाब के जलग्रहण क्षेत्र और इसके प्राकृतिक पर्यावरणीय स्वरूप को अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों से बचाना है, क्योंकि ऐसे निर्माण जल प्रवाह, प्राकृतिक जल निकासी और आर्द्रभूमि के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
अवैध निर्माणों को हटाने की समय-सीमा निर्धारित
ट्रिब्यूनल ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए तीन महीने की समय-सीमा प्रदान की है। इसका अर्थ है कि प्रशासन को जल्द से जल्द चिन्हित अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करनी होगी और निर्धारित अवधि में उन्हें हटाना सुनिश्चित करना होगा। यह आदेश शाहपुरा तालाब के आसपास लंबे समय से चल रहे अतिक्रमण और निर्माण संबंधी विवादों के समाधान की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, प्रशासन को पर्यावरण मानकों और न्यायाधिकरण द्वारा जारी किए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा।
SDM कोलार को सौंपी गई निगरानी की जिम्मेदारी
NGT ने इस कार्रवाई की निगरानी का भार एसडीएम कोलार को सौंपा है। एसडीएम को निर्देशित किया गया है कि वे पूरी प्रक्रिया पर पैनी नज़र रखें और प्रत्येक 15 दिनों में अपनी प्रगति रिपोर्ट न्यायाधिकरण को प्रस्तुत करें। यह व्यवस्था प्रशासनिक कार्रवाई की नियमित निगरानी सुनिश्चित करेगी और यह भी स्पष्ट रखेगी कि अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया तय समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ रही है या नहीं।
16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, ATR प्रस्तुत करने का निर्देश
मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई के दौरान, संबंधित प्रशासन को अब तक की गई कार्रवाई की एक विस्तृत Action Taken Report (ATR) प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट में अतिक्रमण की पहचान, हटाए गए निर्माणों का विवरण और भविष्य की कार्ययोजना की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। ऐसे में, प्रशासन पर NGT के आदेश को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने का महत्वपूर्ण दबाव रहेगा।
शहरी आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए एक सशक्त संदेश
शाहपुरा तालाब भोपाल के प्रमुख शहरी जल निकायों में से एक है, और NGT का यह फैसला न केवल अवैध निर्माणों को हटाने तक सीमित है, बल्कि यह शहरी आर्द्रभूमियों और जल निकायों के संरक्षण की महत्ता को लेकर भी एक सशक्त पर्यावरणीय संदेश देता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तीन महीने की समय-सीमा के भीतर प्रशासन 50 मीटर के दायरे को किस प्रकार अतिक्रमण मुक्त करता है और 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई में NGT के समक्ष किस प्रकार की कार्रवाई रिपोर्ट पेश की जाती है।
