सिविल जज भर्ती में आरक्षित वर्ग से एक भी चयन नहीं: हाई कोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप, SC/ST उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ में छूट और मुफ्त कोचिंग सेंटर शुरू करने का आदेश
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने सिविल जज भर्ती परीक्षा में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के शून्य चयन पर गंभीर चिंता जताते हुए परीक्षा प्रकोष्ठ को संशोधित...

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने सिविल जज भर्ती परीक्षा में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के शून्य चयन पर गंभीर चिंता जताते हुए परीक्षा प्रकोष्ठ को संशोधित चयन सूची जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने SC और ST उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम उत्तीर्णांक में छूट देने के साथ-साथ मुफ्त कोचिंग सेंटर स्थापित करने के निर्देश भी जारी किए हैं, ताकि न्यायिक सेवाओं में समावेशिता सुनिश्चित हो सके।
➡ मामला क्या है?
सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के लिए कुल 121 विज्ञापित पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग (SC/ST) से एक भी उम्मीदवार का चयन नहीं हुआ।
इस पर जबलपुर की एडवोकेट यूनियन ऑफ डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसके बाद यह सुनवाई हुई।
➡ कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय साराफ की द्वैध पीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किए:
1️⃣ न्यूनतम अंक में छूट
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ST उम्मीदवारों के लिए मुख्य परीक्षा में उत्तीर्णांक 40% तय
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SC उम्मीदवारों के लिए यह अंक 45% निर्धारित
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साक्षात्कार (इंटरव्यू) में SC/ST अभ्यर्थियों को 20 अंकों की छूट देने का निर्देश
2️⃣ संशोधित चयन सूची तैयार करें
अदालत ने परीक्षा प्रकोष्ठ को निर्देश दिया कि नए मानदंडों के अनुसार रिवाइज्ड लिस्ट तैयार कर अगली सुनवाई (3 दिसंबर) से पहले प्रस्तुत की जाए।
3️⃣ मुफ्त कोचिंग सेंटर स्थापित हों
कोर्ट ने कहा कि SC/ST उम्मीदवारों को न्यायिक सेवाओं की तैयारी में बेहतर अवसर देने के लिए फ्री प्रिपरेशन सेंटर स्थापित किए जाएं, ताकि तैयारी और मार्गदर्शन की कमी दूर हो सके।
➡ याचिकाकर्ता का पक्ष
वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश्वर सिंह ने अदालत को बताया कि हालिया भर्ती (191 पदों) में एक भी आदिवासी उम्मीदवार चयनित नहीं हुआ, जबकि राज्य की आरक्षण नीति लागू होना आवश्यक था।
याचिका में यह भी आरोप लगाए गए:
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लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में न्यूनतम अंक में कोई छूट नहीं दी गई
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बैकलॉग पद भी नहीं भरे गए
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मूल्यांकन प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को जानबूझकर कम अंक दिए गए, जिससे उनकी सिस्टमेटिक एक्सक्लूजन हुई
➡ क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश?
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न्यायपालिका में विविधता का अभाव लंबे समय से चिंता का विषय रहा है
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कोर्ट के निर्देश से आरक्षित वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे
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यह फैसला भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और संवैधानिक दायित्व को मजबूत करता है
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश न्यायिक सेवाओं में सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
