SCO शिखर सम्मेलन: मोदी की कूटनीति, आतंकवाद पर कड़ा रुख, शरीफ के वायरल वीडियो पर नजर
बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने आतंकवाद के खात्मे पर जोर दिया, जबकि पाक पीएम शहबाज शरीफ का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसने कूटनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी।

द क्लिफ न्यूज़ | बिश्केक | 2 सितंबर 2026
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में संपन्न हुए 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति एक बार फिर चर्चा का विषय रही। सम्मेलन के दौरान, जहाँ एक ओर श्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों के साथ संवाद स्थापित किया, वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ उनकी किसी भी प्रकार की औपचारिक द्विपक्षीय मुलाकात या हाथ मिलाने की तस्वीर सामने नहीं आई। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चाएँ छेड़ दी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO के मंच से आतंकवाद के विरुद्ध भारत के अडिग रुख को मजबूती से रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के संपूर्ण इकोसिस्टम को जड़ से खत्म करने की आवश्यकता है। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने तथा उन्हें सुरक्षित पनाह देने वाली व्यवस्थाओं के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई पर बल दिया। इस संदर्भ में, यह महत्वपूर्ण है कि श्री मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना, अप्रत्यक्ष रूप से उसी नीति को निशाना बनाया, जिसे भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।
चीन और रूस से संवाद, पाकिस्तान से दूरी
SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हाथ मिलाकर संक्षिप्त बातचीत की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी गर्मजोशीपूर्ण मुलाकात की। श्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में मुख्य रूप से व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक आपूर्ति, क्षेत्रीय संघर्षों का समाधान तथा यूरेशियाई कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
यह कूटनीतिक दृष्टिकोण भारत की उस सुविचारित रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत नई दिल्ली एक ओर चीन और रूस जैसे प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संवाद बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर ईरान और अन्य देशों के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत कर रही है। भारत की विदेश नीति स्पष्ट रूप से किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय, अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विभिन्न शक्तियों के साथ मजबूत संबंध विकसित करने पर केंद्रित दिखाई दे रही है। यह बहुध्रुवीय कूटनीति का एक स्पष्ट उदाहरण है, जहाँ भारत सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलन साधने का प्रयास कर रहा है।
शहबाज शरीफ का वायरल वीडियो
इसी बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने काफी ध्यान आकर्षित किया। SCO की सामूहिक तस्वीर खिंचवाए जाने के बाद, जब राष्ट्रपति पुतिन आगे बढ़ रहे थे, तब श्री शरीफ तेजी से उनके पास पहुंचे। वायरल वीडियो में श्री शरीफ को राष्ट्रपति पुतिन का हाथ पकड़कर उन्हें रोकते हुए और उनसे बातचीत करते हुए देखा जा सकता है। इस दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और इसे पाकिस्तान द्वारा रूस के साथ अपनी निकटता बढ़ाने के एक प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि, केवल इस एक वीडियो के आधार पर पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'अलग-थलग' होने का निष्कर्ष निकालना शायद जल्दबाजी होगी। SCO स्वयं एक बहुपक्षीय मंच है, जहाँ विभिन्न देशों के नेताओं के बीच औपचारिक और अनौपचारिक बातचीत अलग-अलग समय पर स्वाभाविक रूप से होती रहती है। इस तरह की मुलाकातें शिखर सम्मेलनों का एक सामान्य हिस्सा होती हैं, जिनका अर्थ निकालना जटिल हो सकता है।
कूटनीतिक संदेश और रणनीतिक संतुलन
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई बातचीत के दृश्यों ने भी वैश्विक भू-राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच विशेष महत्व प्राप्त किया। तीनों नेताओं का एक साथ नजर आना, वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे परिवर्तनों का संकेत माना गया। वहीं, शहबाज शरीफ से जुड़े कुछ दृश्य और सोशल मीडिया पोस्ट उनकी कूटनीतिक स्थिति को लेकर चल रही बहस को और हवा दे रहे थे।
प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि भारत ने पाकिस्तान पर सीधे हमले करने के बजाय, आतंकवाद के मुद्दे को एक व्यापक वैश्विक चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया। आतंकवाद, उसके वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों को बिना नाम लिए निशाना बनाना, भारत को कूटनीतिक रूप से अधिक व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की स्थिति में रखता है। इससे भारत को उन देशों का समर्थन प्राप्त होता है जो आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में उसके रुख से सहमत हैं।
दूसरी ओर, चीन और रूस जैसे प्रभावशाली देशों के साथ संवाद बनाए रखना तथा ईरान जैसे अन्य देशों के साथ भी संपर्क बढ़ाना, यह स्पष्ट संकेत देता है कि भारत की प्राथमिकता किसी एक विशिष्ट गुट में शामिल होने के बजाय, अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संबंधों का संतुलन बनाए रखना है।
संतुलित कूटनीति की पहचान
बिश्केक में आयोजित SCO मंच भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस मंच का उपयोग करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के साथ किसी भी सार्वजनिक टकराव से बचते हुए, आतंकवाद पर अपना कड़ा संदेश सफलतापूर्वक पहुंचाया। साथ ही, उन्होंने रूस, चीन और अन्य प्रमुख देशों के साथ संवाद के सभी रास्ते खुले रखे। यह संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण ही भारत की वर्तमान बहुध्रुवीय विदेश नीति की एक प्रमुख पहचान बनता जा रहा है, जहाँ वह अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका निभा रहा है।
