सवर्ण समाज का विरोध: यूजीसी व जातिगत आरक्षण हटाने की मांग
सवर्ण आर्मी ने यूजीसी के नए नियमों व जातिगत आरक्षण का विरोध किया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में आर्थिक आधार पर आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट समाप्त करने की मांग की गई।

संवाददाता: अनिरुद्ध शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 5 सितंबर 2026
सवर्ण समाज के युवाओं ने रविवार को यूजीसी के नए नियमों और जातिगत आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सवर्ण आर्मी के बैनर तले बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित एक चार सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष अभय शुक्ल और मीडिया प्रभारी शिवांशु शुक्ल ने किया। मार्च वीर विनय चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
जातिगत आरक्षण की जगह आर्थिक आधार पर हो आरक्षण
जिला अध्यक्ष अभय शुक्ल ने मांग करते हुए कहा कि जातिगत आरक्षण समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि यह आरक्षण आर्थिक आधार पर लागू होना चाहिए। उनका मानना है कि इससे वास्तविक गरीब और पिछड़े लोगों को लाभ मिल सकेगा। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान जाति-आधारित आरक्षण प्रणाली योग्य उम्मीदवारों को अवसर से वंचित कर सकती है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, जो किसी भी जाति के हो सकते हैं, सुविधाओं से अछूते रह जाते हैं। अभय शुक्ल ने ज़ोर देकर कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़ापन किसी भी व्यक्ति के लिए मुख्य समस्या है, न कि उसकी जाति। इसलिए, आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, चाहे उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
यूजीसी के नियमों पर चिंता
सवर्ण आर्मी के जिला उपाध्यक्ष अनुपम पाठक ने यूजीसी के नए नियमों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यूजीसी लागू होने से शिक्षा संस्थानों में छात्रों के बीच दूरियां बढ़ेंगी। साथ ही, बेवजह छात्र-छात्राओं को कानूनी पचड़ों में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद करना पड़ेगा। अतः यूजीसी को समाप्त किया जाना चाहिए। पाठक ने विस्तार से बताया कि यूजीसी के नए नियम, खासकर शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और आचरण से संबंधित, छात्रों पर अत्यधिक प्रतिबंध लगा सकते हैं। उनका मानना है कि इन नियमों का दुरुपयोग होने की संभावना है, जिससे निर्दोष छात्र भी अनावश्यक कानूनी कार्यवाही का शिकार बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वातावरण भय और अत्यधिक नियमों के बोझ तले दबना नहीं चाहिए, बल्कि स्वतंत्रता और रचनात्मकता को बढ़ावा देना चाहिए। इसलिए, इन नियमों को छात्रों के हित में नहीं माना जा सकता और इन्हें वापस लेना आवश्यक है।
सवर्ण आयोग और एससी-एसटी एक्ट की समाप्ति की मांग
जिला संयोजक रवि पाठक ने कहा कि समाज के लिए एक 'सवर्ण आयोग' का गठन किया जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, जिसे आमतौर पर एससी-एसटी एक्ट कहा जाता है, को समाप्त करने की मांग की। रवि पाठक ने कहा कि सवर्ण आयोग का गठन सवर्ण समुदाय की उन समस्याओं और चिंताओं का समाधान करने के लिए किया जाना चाहिए जो वर्तमान में अनसुनी रह जाती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब अन्य समुदायों के लिए आयोग हैं, तो सवर्णों के लिए भी एक ऐसे मंच की आवश्यकता है जो उनकी विशिष्ट सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का अध्ययन कर सके और समाधान सुझा सके। एससी-एसटी एक्ट के संबंध में, उन्होंने कहा कि इस कानून का अक्सर दुरुपयोग किया जाता है, जिससे निर्दोष लोगों को झूठे आरोपों में फंसाया जाता है। उनका मानना है कि कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी समुदाय को विशेष रूप से दंडित करने का माध्यम बनना।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ब्लॉक अध्यक्ष विपुल मिश्र, मुकेश तिवारी, मनोज शुक्ला, संदीप कौशल, पंकज गुप्ता, उत्कर्ष, प्रभात शुक्ला, मनोज शुक्ला, हरीश सिंह, रूपेश सिंह, नितिन गुप्ता, सुमित शर्मा सहित बड़ी संख्या में सवर्ण युवा मौजूद रहे, जिन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से इन मांगों पर तत्काल ध्यान देने और उचित कार्यवाही करने का आग्रह किया।
