सावन के अंतिम सोमवार पर द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़
सावन के अंतिम सोमवार पर मालाखेड़ी स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक आदि कर सुख-समृद्धि की कामना की। 'हर हर महादेव' के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर।

द क्लिफ न्यूज़ | 24 अगस्त 2026
सावन माह के अंतिम सोमवार का अवसर शनिवार को अत्यंत भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। इस पावन अवसर पर मालाखेड़ी स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, दही, शहद और गंगाजल से किया। मंत्रोच्चार और 'हर हर महादेव' के जयघोषों के बीच समूचा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।
मंदिर में पंडितों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राष्टक और शिव चालीसा का पाठ किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, अक्षत और सफेद पुष्प अर्पित करते हुए भारतवर्ष की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान पूरे मंदिर प्रांगण में एक अद्भुत आध्यात्मिक और उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा।
धार्मिक महत्व और श्रद्धालुओं की आस्था
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस माह में की गई पूजा-अर्चना का विशेष फल प्राप्त होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन माह में प्रतिदिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है, लेकिन सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस वर्ष सावन के अंतिम सोमवार को यह धार्मिक अनुष्ठान बड़े पैमाने पर किया गया, जिसने भक्तों की आस्था को और गहरा किया।
पूजा में शामिल श्रद्धालु धीरेन्द्र मालवीय ने इस महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, 'सावन माह में शिवलिंग पर जल चढ़ाना विशेष फलदायक होता है। हमने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव से प्रार्थना की है कि वह सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और देश में सुख-समृद्धि का वास हो।' उनका यह कथन मंदिर में उपस्थित अन्य श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी दर्शाता है, जो इसी कामना के साथ पूजा में शामिल हुए थे।
मंदिर में उपस्थित प्रमुख भक्तगण
द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में इस विशेष अवसर पर जगदीश मालवीय, धीरेन्द्र मालवीय, सुयश मिश्रा, श्रीमती वंदना मालवीय, श्रीमती अचला मालवीय, श्रीमती मीनाक्षी मिश्रा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर प्रभु शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया और सावन माह की समाप्ति का विधिवत समापन किया। मंदिर के पुजारियों ने भी इस अवसर पर विशेष मंत्रोच्चार के साथ सभी के कल्याण की कामना की।
यह अवसर न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का प्रतीक था, बल्कि यह सामुदायिक भावना और साझा आस्था को भी प्रदर्शित करता है। भक्तों की भीड़ और उनके उत्साह ने सावन माह के अंत को एक यादगार और पवित्र अनुभव में बदल दिया। द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर, मालाखेड़ी, इस तरह के धार्मिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बना रहा, जहां लोग अपनी आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आते हैं।
