सात वर्षीय शौर्य श्रीवास्तव ने मोबाइल से दूरी बनाकर रचा सफलता का कीर्तिमान
गोण्डा के सात वर्षीय शौर्य श्रीवास्तव को शैक्षणिक और खेलकूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ग्रेटर नोएडा में सम्मानित किया गया। उन्होंने एक वर्ष तक...

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: बी पी त्रिपाठी
द क्लिफ न्यूज़ | गोण्डा | 28 सितंबर 2026
गोण्डा के आवास विकास कॉलोनी निवासी और ग्रेटर नोएडा स्थित सेंट जॉन्स स्कूल में कक्षा तीन के छात्र सात वर्षीय शौर्य श्रीवास्तव ने मोबाइल फोन की आभासी दुनिया से एक वर्ष का पूर्ण अलगाव बनाए रखते हुए अपनी असाधारण प्रतिभा और अनुशासन का परिचय दिया है। शौर्य, जो डॉ. जी.सी. श्रीवास्तव के पौत्र हैं, ने इस अवधि में अपना सारा ध्यान पूरी तरह से अपनी शिक्षा और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों पर केंद्रित रखा।
शौर्य की इस अथक लगन और अनुशासित जीवनशैली का फल अब दिखाई दे रहा है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मैथ ओलंपियाड में अपनी मेधा का लोहा मनवाया है, साथ ही तैराकी, कराटे और स्केटिंग जैसी खेल प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इन बहुआयामी उपलब्धियों से प्रभावित होकर, प्रगतिशील विचार मंच, ग्रेटर नोएडा ने एक विशेष प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में, शौर्य को उनकी उपलब्धियों के लिए एक शील्ड, मोमेंटो और अन्य उपहारों से सम्मानित किया गया।
शैक्षणिक और खेलकूद में अद्भुत प्रदर्शन
शौर्य श्रीवास्तव ने न केवल अकादमिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, बल्कि खेलकूद में भी अपनी क्षमता साबित की है। अंतर्राष्ट्रीय मैथ ओलंपियाड में उनकी भागीदारी और सफलता उनकी विश्लेषणात्मक और समस्या-समाधान क्षमताओं को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, तैराकी, कराटे और स्केटिंग में उनकी महारत शारीरिक फिटनेस, आत्म-रक्षा कौशल और संतुलन के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करती है। यह संयोजन एक सर्वांगीण विकास का प्रतीक है, जो आज के बच्चों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।
तकनीक से दूरी, प्रेरणा का स्रोत
ग्रेटर नोएडा में आयोजित सम्मान समारोह में मंच से बोलते हुए, वक्ताओं ने शौर्य के माता-पिता द्वारा किए गए मार्गदर्शन की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में बच्चों को तकनीकी उपकरणों पर अत्यधिक निर्भर होने से बचाना और उन्हें शिक्षा व खेलकूद जैसी स्वस्थ गतिविधियों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। शौर्य की सफलता को केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानते हुए, इसे अन्य बच्चों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बताया गया। इस अवसर पर, शौर्य के माता-पिता, प्रिया श्रीवास्तव को भी मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
अपनी सभी सफलताओं का श्रेय देते हुए, शौर्य ने विनम्रतापूर्वक अपनी मां प्रिया श्रीवास्तव, नानी गीता और अपने शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। समारोह में उपस्थित अभिभावकों और गणमान्य व्यक्तियों ने उनके प्रयासों की खूब सराहना की। शौर्य का यह सम्मान इस बात की पुष्टि करता है कि एक स्पष्ट लक्ष्य और अटूट अनुशासन के साथ, कम उम्र में भी महान उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं। उनका यह अनुकरणीय कार्य पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आया है।
