BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
Regional

सर्वसमाज संघर्ष मोर्चा का धरना शुरू: यूजीसी नियम और आरक्षण संशोधन का विरोध

गुना में सर्वसमाज संघर्ष मोर्चा ने यूजीसी के नियमों और आरक्षण संशोधन के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। मोर्चा ने सरकार की नीतियों को सामाजिक अधिकारों पर हमला बताया है।

Few hours ago
2 मिनट में पढ़ें
संवाददाता: राजा हतम वेग
सर्वसमाज संघर्ष मोर्चा का धरना शुरू: यूजीसी नियम और आरक्षण संशोधन का विरोध

संवाददाता: राजा हतम वेग

द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 3 सितंबर 2026

सर्वसमाज संघर्ष मोर्चा ने केंद्रीय और राज्य सरकारों की नीतियों के विरोध में गुना में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 'शिक्षा पर एकाधिकार नहीं चलेगा' और 'एकजुट समाज-सशक्त समाज' जैसे नारों के साथ मोर्चा के सदस्यों ने शहर में अपनी आवाज बुलंद की है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को तुरंत वापस लेने, आरक्षण व्यवस्था में प्रस्तावित संशोधनों को रद्द करने और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम में किए जा रहे बदलावों को रोकने की मांग की है।

धरना स्थल पर आयोजित एक सभा में वक्ताओं ने इन नीतियों को देश के सामाजिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया। उन्होंने 'अधिकारों पर डाका नहीं सहेंगे' और 'काला कानून वापस लो' जैसे नारे लगाते हुए सरकार के रुख का कड़ा विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार की नीतियां समाज के विभिन्न वर्गों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही हैं।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प

समाज संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। मोर्चा ने 'अधिकार हमारा-संकल्प हमारा' के मूल मंत्र को दोहराते हुए कहा कि पूरा समाज अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हो चुका है। उन्होंने इस एकजुटता को समाज को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जनविरोधी और समाज विरोधी नीतियों को वापस नहीं लिया गया, तो इस प्रदर्शन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी कदम की समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मोर्चा के वरिष्ठ पदाधिकारी, युवा कार्यकर्ता और प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए, जिन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।