सपा पर सीएम योगी का वार: कहा, विपक्ष ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा रोकी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा पर विधानसभा में हंगामा कर महत्वपूर्ण विधेयकों और जनकल्याणकारी प्रस्तावों पर चर्चा बाधित करने का आरोप लगाया है।

द क्लिफ न्यूज़ | लखनऊ | 5 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य विपक्षी दलों पर विधानसभा के भीतर हंगामे के जरिए महत्वपूर्ण विधेयकों और जनकल्याणकारी प्रस्तावों पर चर्चा बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सदन की मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन करते हुए जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक संवाद का अवसर छिन लिया।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार नियम-59 के तहत न्यायालय या न्यायाधिकरण में विचाराधीन मामलों पर चर्चा न होने के नियम का पालन कर रही थी। इसके बावजूद, विपक्ष ने तख्तियां लहराकर और शोरगुल मचाकर कार्यवाही को बाधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आचरण उत्तर प्रदेश की जनता के हितों के विरुद्ध एक अलोकतांत्रिक रवैया दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सदन में युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा का अवसर था, जिसे विपक्ष ने अपने हंगामे से प्रभावित किया। सरकार प्रदेश के विकास और जनकल्याण से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने इसे प्राथमिकता न देकर हंगामे को चुना।
सदन में गतिरोध और मुख्यमंत्री का संबोधन
विधानसभा में राम जन्मभूमि से जुड़े कानूनी मामलों सहित कई अन्य मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों द्वारा चर्चा की मांग को लेकर हंगामा हुआ। इस हंगामे के कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना पूरा संबोधन प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर सके। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ा रुख अपनाया और सभी सदस्यों से नियमों का पालन करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, परंतु सदन की गरिमा और व्यवस्था बनाए रखना प्रत्येक सदस्य की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्मरण कराया कि सर्वदलीय बैठक में सभी विषयों पर सकारात्मक चर्चा का आश्वासन दिया गया था, जिसे विपक्ष ने सदन में नहीं निभाया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के इस रवैये को प्रदेश की जनता के प्रति घोर उपेक्षा करार दिया। उन्होंने कहा कि सदन जनता के मुद्दों को उठाने और उनके समाधान खोजने का एक मंच है, न कि हंगामा करने का। सपा और अन्य विपक्षी दलों का आचरण इस गरिमामय मंच का अपमान है। यह जनता द्वारा चुने गए जन प्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायी प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभाएं, न कि उसे बाधित करें। इस गतिरोध के कारण कई महत्वपूर्ण विधेयक, जिन पर विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श आवश्यक था, वे अधर में लटक गए। सरकार प्रदेश की प्रगति और नागरिकों के कल्याण से जुड़े प्रस्तावों को सदन में मजबूती से रखना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने अपनी मांगों और विरोध के तरीके से इस अवसर को गंवा दिया।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि विधानमंडल के सदस्य के रूप में, सभी का यह कर्तव्य है कि वे सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करें। नियम-59 जैसे प्रावधान इसलिए बनाए गए हैं ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और विचाराधीन मामलों की निष्पक्षता बनी रहे। विपक्ष द्वारा इन नियमों का उल्लंघन करना न केवल अनुचित था, बल्कि यह विधायी निकायों के कामकाज के प्रति उनके सम्मान की कमी को भी दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विपक्ष से आग्रह करते हैं कि वे रचनात्मक विमर्श में भाग लें और प्रदेश के विकास में अपना योगदान दें, बजाय इसके कि वे ऐसे अवरोध पैदा करें जो अंततः जनता के ही हित में नहीं हैं।
