संत रविदास जयंती पर नरसिंहगढ़ में समरसता कलश यात्रा, भाईचारे का संदेश
नरसिंहगढ़ में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती पर भव्य समरसता कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा ने समाज में समानता और भाईचारे का संदेश दिया।

संवाददाता: महेंद्र शर्मा
द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 5 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ में संत शिरोमणि संत रविदास जी महाराज की 650वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में समरसता कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य संत रविदास के विचारों और उनके द्वारा प्रसारित समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना था। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, ग्रामवासियों और नगरवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसने सामाजिक समरसता के महत्व को रेखांकित किया।
समरसता कलश यात्रा के दौरान संत रविदास जी महाराज के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों द्वारा यात्रा का स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने संत रविदास जी के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज में समानता, भाईचारा और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का दृढ़ संकल्प लिया। इस आयोजन ने समुदाय के सभी वर्गों को एक साथ लाकर सामाजिक एकता की भावना को बल प्रदान किया।
संत रविदास के जीवन और विचारों पर प्रकाश
नगर के रामी बाई धर्मशाला में एक सम्मान समारोह और उद्बोधन कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। इस सत्र में वक्ताओं ने संत रविदास जी महाराज के जीवन, उनके संघर्षों और समाज सुधार में उनके अभूतपूर्व योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि संत रविदास ने अपने कर्मों और उपदेशों के माध्यम से समाज को जाति-पाति, भेदभाव और ऊंच-नीच जैसी सामाजिक बुराइयों से ऊपर उठकर मानवता और समानता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में नरसिंहगढ़ नगरपालिका के सीएमओ अभिषेक जैन और स्थानीय विधायक मोहन शर्मा का स्वागत और सम्मान किया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने संत रविदास जी महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि संत रविदास की शिक्षाएं, जो मानव मात्र की समानता, प्रेम, करुणा और सामाजिक सद्भाव पर आधारित हैं, आज भी समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।
इस समरसता कलश यात्रा और आयोजित कार्यक्रम ने समाज के सभी वर्गों को एकजुट करने और आपसी भाईचारे की भावना को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन संत रविदास जी महाराज के जयघोष और उनके आदर्शों को अपनाने के संकल्प के साथ हुआ, जो इस आयोजन की सफलता का प्रतीक था।
