संस्कार भारती की गोष्ठी: साहित्यकारों ने रामायण व समरसता पर रखे विचार
फर्रुखाबाद में महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित संस्कार भारती की गोष्ठी में साहित्यकारों ने सामाजिक समरसता और रामायण की प्रासंगिकता पर अपने विचार...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 25 अक्टूबर 2026
फर्रुखाबाद में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर संस्कार भारती की स्थानीय इकाई ने एक विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन का आयोजन किया। जोगराज स्ट्रीट स्थित चीजी क्रेजी कैफे में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्यकारों ने सामाजिक समरसता की महत्ता और आधुनिक युग में रामायण की प्रासंगिकता जैसे विषयों पर गहनता से विचार व्यक्त किए। यह आयोजन समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था, जिसमें महर्षि वाल्मीकि के विचारों और रामायण के संदेशों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में समझने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि साहित्यकार भारती मिश्रा की नवीन पुस्तक 'साहित्य सारथी' का विमोचन रहा। इस पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम के महत्व को और बढ़ा गया। इसके अतिरिक्त, काव्य सत्र के दौरान वैभव सोमवंशी सुभग, उत्कर्ष अग्निहोत्री और राजेंद्र अवस्थी जैसे कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ कर उपस्थित साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे श्रोताओं को प्रेरणा मिली।
साहित्यिक योगदान और सांस्कृतिक संवर्धन
गोष्ठी में तुषमुल मिश्रा, रोचना बिश्नोई, महेश पाल सिंह उपकारी, संस्कार भारती के अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह और संयोजक अरविंद दीक्षित सहित साहित्य जगत से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों और बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वक्ताओं ने अपने संबोधन में समाज में समरसता की भावना को बनाए रखने में साहित्य की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साहित्य किस प्रकार विभिन्न वर्गों के बीच सेतु का कार्य कर सकता है और आपसी समझ को बढ़ा सकता है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में सामूहिक प्रयासों के महत्व पर भी जोर दिया और सभी ने मिलकर भारतीय संस्कृति को संवर्धित करने का संकल्प लिया। यह संकल्प भारतीय परंपराओं और मूल्यों के संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साहित्यकारों ने माना कि आज के दौर में भी रामायण जैसे ग्रंथ सामाजिक मूल्यों और आदर्शों की शिक्षा देते हैं, जो व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए आवश्यक हैं।
इस आयोजन को स्थानीय साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसने साहित्यिक संवाद को बढ़ावा दिया है। इस तरह के कार्यक्रम न केवल साहित्यकारों को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि आम जनता को भी साहित्य और संस्कृति से जुड़ने का अवसर देते हैं। यह आयोजन फर्रुखाबाद में साहित्यिक गतिविधियों के पुनरुत्थान में भी सहायक सिद्ध होगा, ऐसी उम्मीद जताई गई।
