सांसद नारोलिया ने केंद्रीय गृह मंत्री शाह को पेंशनरों की राहत पर सौंपा आभार पत्र
राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पेंशनरों को महंगाई राहत (DR) के संवितरण में दो दशक पुरानी विसंगति के स्थायी समाधान के लिए आभार पत्र सौंपा।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 13 अगस्त 2026
राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस भेंट के दौरान उन्होंने गृह मंत्री का कुशलक्षेम जाना और विभिन्न सांगठनिक, जनहितैषी तथा विकासपरक विषयों पर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। सांसद नारोलिया ने विशेष रूप से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा 'भारत पेंशनर्स समाज' की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करने वाला एक पत्र सौंपा।
यह पत्र पेंशनभोगियों को महंगाई राहत (DR) के संवितरण में पिछले दो दशकों से आ रही प्रशासनिक अनिश्चितता और विसंगति के स्थायी समाधान के संदर्भ में था। इस समस्या का मूल मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49(6) की वैधानिक बाध्यता में निहित था, जिसके कारण दोनों राज्यों के बीच पारस्परिक सहमति के अभाव में पेंशनरों को राहत राशि के भुगतान में जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा था।
पेंशनरों को राहत का स्थायी समाधान
सांसद नारोलिया ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संवेदनशील नेतृत्व और कुशल दिशा-निर्देशन के परिणामस्वरूप, अब दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति की अनिवार्य बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इसके स्थान पर, अब सीधे कार्यपालिक आदेशों के माध्यम से केंद्रीय देय तिथि से ही महंगाई राहत का त्वरित और निर्बाध संवितरण सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस निर्णय से पेंशनभोगियों को प्रशासनिक बाधाओं से मुक्ति मिलेगी और वे समय पर अपनी महंगाई राहत राशि प्राप्त कर सकेंगे।
मुलाकात के उपरांत सांसद माया नारोलिया ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और विशाल संगठनात्मक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में अपना जीवन समर्पित करने वाले पेंशनधारियों को मानसिक संबल और आर्थिक स्थायित्व प्रदान करने वाले इस निर्णय हेतु संपूर्ण पेंशनभोगी समाज गृह मंत्री जी का सदैव ऋणी रहेगा। इस कदम को पेंशनरों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो पिछले बीस वर्षों से इस विसंगति से जूझ रहे थे।
