साइबर ठगी: 'ऑपरेशन मैट्रिक्स' में मल्टी-स्टेट गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
इंदौर क्राइम ब्रांच ने 'ऑपरेशन मैट्रिक्स' के तहत 5 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन वाले म्यूल बैंक खाते और फर्जी सिम के जरिए ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को पकड़ा है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 7 सितंबर 2026
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत की जा रही लगातार कार्रवाइयों में एक बड़ी सफलता मिली है। इंदौर क्राइम ब्रांच ने 'ऑपरेशन मैट्रिक्स' के तहत एक मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी म्यूल बैंक खातों और बैंकिंग ओटीपी से जुड़े फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल कर देश भर में साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे। जांच में आरोपियों से जुड़े एक यूको बैंक खाते में 5 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है, जो विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों से जुड़ा हुआ है।
पुलिस मुख्यालय को साइबर अपराध संबंधी राष्ट्रीय डेटाबेस और संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की निगरानी से प्राप्त तकनीकी सूचनाओं के आधार पर यह कार्रवाई की गई। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), गृह मंत्रालय, भारत सरकार, NCRP और साइबर क्राइम पोर्टल से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करते हुए संदिग्ध खातों की जांच की जा रही थी। इसी क्रम में यूको बैंक की महू शाखा, इंदौर के एक खाते की पड़ताल के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जांच में इस म्यूल खाते से 5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का संदिग्ध लेन-देन पाया गया। इस खाते से जुड़ी साइबर अपराध की शिकायतें देश के कई राज्यों से सामने आई हैं, जिनमें तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, गोवा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य शामिल हैं।
गिरफ्तारी और संदिग्ध लेन-देन का खुलासा
जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक ने अपना बैंक खाता 'म्यूल अकाउंट' के रूप में उपलब्ध कराया था। इसके साथ ही, उसके नाम पर पंजीकृत वह सिम कार्ड, जिस पर बैंकिंग संबंधी ओटीपी प्राप्त होते थे, दूसरे आरोपी को मुहैया कराया गया था। दोनों आरोपियों ने मिलकर इस सुनियोजित व्यवस्था का इस्तेमाल संगठित रूप से मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड और आर्थिक धोखाधड़ी के लिए किया। इंदौर क्राइम ब्रांच ने इन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस उनके संपर्क में रहे अन्य व्यक्तियों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सिम कार्डों और इस साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े नेटवर्क की विस्तृत जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
बरामदगी और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण
आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 4 मोबाइल फोन, 8 एक्टिव सिम कार्ड, 10 बैंक अकाउंट पासबुक और 11 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। इनमें यूको बैंक का वह मुख्य म्यूल बैंक खाता भी शामिल है, जिसमें 5 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन पाया गया है। मामले की विवेचना के दौरान, आरोपियों से मिले मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का गहन तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस अंतर्राज्यीय साइबर अपराध सिंडिकेट से कोई और लोग जुड़े हैं। इस दिशा में पूछताछ और वैधानिक कार्रवाई जारी है।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
मध्यप्रदेश पुलिस ने आम नागरिकों से ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन में अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी व्यक्ति अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड, ओटीपी या कोई अन्य बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति को उपलब्ध न कराए। यदि किसी भी नागरिक के साथ साइबर ठगी होती है, तो तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। समय पर की गई शिकायत अपराधियों को पकड़ने और ठगी गई राशि को वापस दिलाने में सहायक हो सकती है।
