सागर पुलिस ने नाबालिग को ब्लैकमेल कर चोरी कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया
सागर पुलिस ने नाबालिग को ब्लैकमेल कर चोरी कराने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। लगभग 54.37 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 29 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश पुलिस ने सागर जिले में एक सनसनीखेज वारदात का खुलासा किया है। बीना थाना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो नाबालिगों को ब्लैकमेल कर उनसे लाखों की चोरी करवाता था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनकी निशानदेही पर करीब 54 लाख 37 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। जब्त की गई संपत्ति में सोने के आभूषण, कार, मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और घरेलू सामान शामिल हैं।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सागर श्री अनुराग सुजानिया के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीना श्री जयवीर सिंह भदौरिया के नेतृत्व में की गई। पुलिस की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ने न केवल चोरी का खुलासा किया है, बल्कि ऐसे अपराधों को अंजाम देने वाले गिरोह के हौसलों को भी पस्त करने का काम किया है।
पैतृक घर से हुई थी लाखों की चोरी
घटना का खुलासा तब हुआ जब एक फरियादी ने थाना बीना में रिपोर्ट दर्ज कराई। फरियादी ने बताया कि उनका परिवार एक नए मकान में रह रहा था, जबकि उनका पुराना पैतृक मकान खाली था। इस पैतृक मकान में उन्होंने नगद राशि, सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान सुरक्षित रखा था। 17 जून को जब उन्होंने पुराने मकान में जाकर सामान की जांच की, तो पाया कि नगद राशि और कीमती सामान गायब था। रिपोर्ट दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने चोरी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
पुलिस ने घटना के संबंध में गंभीरता दिखाते हुए तुरंत जांच दल गठित किया। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, जिसमें यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि सेंधमारी कैसे हुई और किन रास्तों का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही, आसपास के लोगों से विस्तृत पूछताछ की गई। संभावित संदिग्धों की पहचान और तस्दीक के लिए मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया। तकनीकी साक्ष्यों, जैसे कि घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और मोबाइल कॉल डेटा का विश्लेषण भी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। विभिन्न पहलुओं पर लगातार और गहन जांच के उपरांत ही पुलिस को इस मामले की परतें खोलने में सफलता मिली।
ब्लैकमेलिंग और धमकी का था खेल
जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल के निरीक्षण, लोगों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण से महत्वपूर्ण जानकारी मिली। जांच में यह बात सामने आई कि आरोपियों ने फरियादी के परिवार के एक नाबालिग सदस्य को निशाना बनाया था। नाबालिग को ब्लैकमेल किया जा रहा था और जान से मारने की धमकी देकर उस पर चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इसी दबाव के चलते नाबालिग ने चोरी की घटना को अंजाम दिया।
यह पता चला कि आरोपी, जो गिरोह का हिस्सा थे, नाबालिग की किसी निजी जानकारी या घटना का फायदा उठाकर उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। यह ब्लैकमेलिंग इतनी गंभीर थी कि नाबालिग को डर था कि अगर उसने आरोपियों के निर्देशों का पालन नहीं किया, तो उसके परिवार को नुकसान पहुंचाया जा सकता है या उसकी प्रतिष्ठा धूमिल हो सकती है। इस मनोवैज्ञानिक दबाव के कारण, नाबालिग के पास चोरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। पुलिस ने जब इस बात की पुष्टि की, तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई।
दो आरोपी गिरफ्तार, संपत्ति जब्त
साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने फरियादी परिवार से लगभग 13 लाख रुपये नगद और करीब 40 तोला सोने के आभूषण चुराए थे। आरोपी ने यह भी बताया कि उसने चुराई गई नगद राशि का उपयोग विभिन्न वस्तुओं और वाहनों की खरीदारी में किया, जबकि सोने के आभूषण उसने अपने मामा को दे दिए थे।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी के मामा को भी गिरफ्तार किया। मामा के कब्जे से पुलिस ने सोने का हार, चैन, ब्रेसलेट, अंगूठियां, पेंडल, गिन्नी, कड़े और मंगलसूत्र सहित लगभग 38 लाख रुपये के आभूषण जब्त किए हैं। यह बरामदगी आरोपियों द्वारा अपराध से अर्जित संपत्ति को छिपाने या उसका दुरुपयोग करने के प्रयासों को विफल करने में महत्वपूर्ण साबित हुई। सोने के आभूषणों को बरामद करने के लिए पुलिस ने एक गुप्त मुखबिर की मदद ली, जिसने मामा के ठिकाने की जानकारी दी।
वाहन और गैजेट्स भी बरामद
मुख्य आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी की रकम से खरीदी गई कई महंगी वस्तुएं भी बरामद कीं। इनमें हुंडई कार, मारुति सुजुकी अर्टिगा कार, रॉयल इनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल, आईफोन सहित अन्य मोबाइल फोन, एयर कंडीशनर (एसी), एलईडी टीवी, साउंड बॉक्स, बेड, लोहे का गेट और अन्य घरेलू सामान शामिल हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या चोरी की गई शेष राशि या संपत्ति का कोई और हिस्सा अभी भी बरामद होना बाकी है।
जब्त की गई संपत्ति की कुल कीमत लगभग 54 लाख 37 हजार रुपये बताई गई है, जो चोरी की गई राशि से काफी अधिक है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि गिरोह केवल चोरी तक ही सीमित नहीं था, बल्कि अपराध से प्राप्त धन का उपयोग कर अपनी संपत्ति को बढ़ाने में भी लगा हुआ था। पुलिस इस बात की भी तफ्तीश कर रही है कि क्या इन आरोपियों का किसी बड़े संगठित गिरोह से संबंध है या क्या उन्होंने पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है। वाहन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बरामदगी से यह भी स्पष्ट होता है कि आरोपी काफी लग्जरी जीवनशैली जी रहे थे, जो संभवतः चोरी की गई संपत्ति से ही संभव हुआ था।
आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश का पुलिस का दावा
मध्य प्रदेश पुलिस लगातार अपराधों की रोकथाम और त्वरित निराकरण के लिए प्रभावी कार्रवाई करने का दावा करती रही है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, त्वरित विवेचना और समन्वित प्रयासों के माध्यम से ऐसे मामलों का शीघ्र खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जा रहा है और अपराध से अर्जित संपत्ति की बरामदगी सुनिश्चित की जा रही है। यह घटना भी इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
सागर पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक महत्वपूर्ण चोरी का खुलासा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पुलिस आधुनिक तकनीक और अपनी पैनी नजर से अपराधियों को पकड़ने में सक्षम है। नाबालिगों को अपराध में शामिल करना, विशेष रूप से ब्लैकमेलिंग के माध्यम से, एक बेहद जघन्य अपराध है। इस मामले में पुलिस ने न केवल पीड़ित नाबालिग को बचाया, बल्कि उन अपराधियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया जो मासूमों को अपने गुनाहों के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस द्वारा अपराध से अर्जित संपत्ति की बरामदगी यह सुनिश्चित करती है कि अपराधियों को उनके कृत्यों का फल मिले और पीड़ितों को न्याय प्राप्त हो। पुलिस का यह भी कहना है कि आगे की जांच जारी है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों का भी पर्दाफाश किया जा सके और किसी भी अन्य संभावित अपराध को रोका जा सके।
