सागर पुलिस का पर्दाफाश: 5.50 करोड़ के फर्जी फर्म व म्यूल खाते से जुड़ा गिरोह
सागर पुलिस ने बेरोजगारों के दस्तावेजों से 16 से अधिक फर्जी फर्मों और म्यूल खातों के ज़रिए 5.50 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। दो गिरफ्तार।

द क्लिफ न्यूज़ | सागर | 16 अगस्त 2026
सागर पुलिस ने साइबर अपराध के संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बेरोजगारों और आम नागरिकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते खोलकर करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन कर रहा था। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में 16 से अधिक फर्जी फर्मों के नाम पर खोले गए बैंक खातों से 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य की तलाश जारी है।
यह कार्रवाई मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराध एवं ठगी के नेटवर्क को समाप्त करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियानों का हिस्सा है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग लेन-देन के विश्लेषण और डिजिटल जांच के माध्यम से ऐसे गिरोहों पर शिकंजा कस रही है।
गिरोह की कार्यप्रणाली और पुलिस की कार्रवाई
घटना की शुरुआत 13 अगस्त 2026 को तब हुई जब फरियादी रोहित पिता रूपराज पटेल ने थाना मकरोनिया में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम से 'ग्लैमर इंटरप्राइजेस' नामक एक फर्जी फर्म खोली गई है। इसी फर्म के नाम पर फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में एक चालू खाता (करंट अकाउंट) खुलवाया गया था।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सागर श्री अनुराग सुजानिया के निर्देशन में पुलिस ने तत्काल संबंधित बैंक खाते का तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण शुरू किया। प्रारंभिक जांच में ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। फरियादी के नाम पर खोले गए इस एक खाते में फरवरी 2026 से लेकर अब तक, यानी लगभग छह महीने की अवधि में करीब 90 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था।
विस्तृत जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी
इस एक खाते से हुए बड़े लेन-देन और फर्जी फर्म के खुलासे के बाद, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। इस टीम ने विभिन्न बैंक खातों में हुए लेन-देन, संबंधित फर्मों के विवरण, बैंकिंग चैनलों और उपलब्ध सभी तकनीकी साक्ष्यों का गहनता से विश्लेषण किया।
जांच के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से की गई पूछताछ और उनसे मिले तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण से इस गिरोह के विस्तृत नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है।
बेरोजगारों को लालच देकर ठगी का जाल
जांच में यह बात सामने आई है कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें कमीशन का लालच देकर या आसान कमाई का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज प्राप्त किए जाते थे। इन दस्तावेजों का उपयोग कर उनके नाम से फर्जी फर्म पंजीकृत कराई जाती थीं और विभिन्न निजी बैंकों में चालू खाते खुलवाए जाते थे।
गिरोह इन बैंक खातों को अपने नियंत्रण में लेकर 'म्यूल खातों' के तौर पर इस्तेमाल करता था। साइबर ठगी और अन्य आपराधिक गतिविधियों से अर्जित की गई राशि को इन खातों के माध्यम से इधर-उधर भेजा जाता था, जिससे पैसे के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाता था। यह गिरोह इसी तरह से प्राप्त राशि को विभिन्न खातों में सर्कुलेट करने का काम करता था।
16 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा
आरोपियों से मिली जानकारी और किए गए तकनीकी-वित्तीय विश्लेषण के आधार पर अब तक पुलिस 16 से अधिक ऐसी फर्जी फर्मों का पता लगा चुकी है जिनके नाम पर बैंक खाते खोले गए थे। इन सभी खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण से 5 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि हुई है। पुलिस इन सभी खातों के विस्तृत लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है ताकि राशि के अंतिम गंतव्य का पता लगाया जा सके।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन फर्मों का पंजीकरण और बैंक खातों को खोलने की प्रक्रिया में किन सरकारी अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों या अन्य संस्थाओं की संलिप्तता रही है। यदि जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही या आपराधिक भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार सक्रिय हैं और संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
नागरिकों के लिए पुलिस की अपील
मध्यप्रदेश पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के कमीशन या आसान कमाई के लालच में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी या अन्य किसी भी प्रकार की बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को न दें। किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से फर्म खुलवाकर या बैंक खाता खोलकर उसका संचालन किसी और को सौंपना आपके लिए गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे खातों का उपयोग साइबर ठगी या किसी अन्य अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन में पाया जाता है, तो खाताधारक भी पुलिस जांच के दायरे में आ सकता है और उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें और साइबर अपराधों से सतर्क रहें।
