सड़कों पर घूमते मवेशियों से दुर्घटनाओं का खतरा: आठ सरपंचों को नोटिस
भिंड जिला पंचायत सीईओ ने सड़कों पर मवेशियों के विचरण और दुर्घटनाओं के बढ़ते खतरे के चलते आठ सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किया...

भिण्ड | संवाददाता: दीपेंद्र बोहरे
द क्लिफ न्यूज़ | 12 सितंबर 2026
भिंड जिले में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर मवेशियों के खुलेआम विचरण से उत्पन्न हो रहे हादसों के खतरे को देखते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) वीरसिंह चौहान ने एक बड़ा कदम उठाया है। सीईओ चौहान ने जिले की आठ ग्राम पंचायतों के सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। यह कार्रवाई 11 सितंबर 2026 को किए गए निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद की गई है।
निरीक्षण में पाया गया कि जनपद पंचायत भिंड, लहार और रौन के तहत आने वाली इन ग्राम पंचायतों में मवेशी सड़कों, चौराहों और किसानों की फसलों के आसपास बेरोकटोक घूम रहे हैं। प्रशासन ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए इसे जनहित के विरुद्ध और सरपंचों के पदीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही माना है। खुले में घूम रहे मवेशियों के कारण न केवल यातायात में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बढ़ रही है, जिससे जन और धन दोनों की हानि का खतरा है।
सरपंचों से मांगा गया स्पष्टीकरण, पद से पृथक करने की चेतावनी
सीईओ वीरसिंह चौहान द्वारा जारी नोटिस में संबंधित सरपंचों से पूछा गया है कि मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत उन्हें पद से क्यों न हटा दिया जाए। यह नोटिस उन आठ सरपंचों को थमाया गया है जिनकी ग्राम पंचायतों में मवेशियों के खुले विचरण की समस्या गंभीर पाई गई है।
नोटिस प्राप्त करने वाले सरपंचों में मानपुरा के ओमवीर सिंह चौहान, बाराकलां की ममता बघेल, ऊमरी के वीरेंद्र सिंह यादव, ढ़ोंचरा के सुनील कुमार, खेरा श्यामपुरा की प्रीति देवी, लपवाहा के अरविंद शर्मा, ररी की सावित्री बाई और मेहदा की उमा देवी शामिल हैं। इन सभी को 15 सितंबर 2026 तक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने पक्ष में साक्ष्यों के साथ स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो संबंधित सरपंचों के विरुद्ध एकपक्षीय दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। यह कदम ग्राम सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने और सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
