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रिश्ते में बॉयफ्रेंड का गुस्सा न दिखाना: परिपक्वता या भावनाओं का दमन?

एक 28 वर्षीय महिला ने अपने बॉयफ्रेंड के कभी गुस्सा न दिखाने पर सवाल उठाया है। विशेषज्ञ का कहना है कि यह परिपक्वता का संकेत नहीं, बल्कि भावनाओं के दमन का परिणाम हो सकता है।

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रिश्ते में बॉयफ्रेंड का गुस्सा न दिखाना: परिपक्वता या भावनाओं का दमन?

द क्लिफ न्यूज़ | 30 जुलाई 2026

क्या आपके साथी का कभी गुस्सा या नाराजगी व्यक्त न करना उनके रिश्ते के प्रति गंभीरता की कमी का सूचक है? यह सवाल एक 28 वर्षीय महिला ने क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जया सुकुल के सामने उठाया है। महिला ने बताया कि उसका बॉयफ्रेंड जन्मदिन या मिलने का समय भूल जाने जैसी बातों पर भी कभी नाराज नहीं होता। ऐसे में यह समझना मुश्किल है कि क्या यह परिपक्वता है, भावनाओं को दबाने की आदत है, या फिर रिश्ते के प्रति उदासीनता।

डॉ. जया सुकुल, जो नोएडा में कार्यरत हैं, ने इस व्यवहार पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुस्सा एक स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया है और किसी व्यक्ति का कभी भी नाराज न होना एक असामान्य स्थिति है। इसके कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें भावनात्मक परिपक्वता, टकराव से बचने की तीव्र इच्छा, अपनी भावनाओं को दबाने की प्रवृत्ति, या अपनी भावनाओं को समझने और पहचानने में कठिनाई शामिल है।

भावनाओं को दबाने के गहरे कारण

विशेषज्ञ के अनुसार, कुछ व्यक्ति अपने बचपन के अनुभवों के कारण असहमतियों और बहसों से कतराते हैं। ऐसी स्थितियाँ उनके लिए तनावपूर्ण हो सकती हैं, इसलिए वे टकराव से बचने के लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करने से बचते हैं। इसके विपरीत, कुछ लोग दूसरों को खुश रखने की अत्यधिक इच्छा के कारण अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और नाराजगी को दबा देते हैं। यह व्यवहार, हालांकि सतह पर शांतिपूर्ण प्रतीत हो सकता है, लंबे समय में मानसिक थकान और आंतरिक असंतोष का कारण बन सकता है।

डॉ. सुकुल ने 'इमोशनल रेगुलेशन' (भावनाओं को स्वस्थ तरीके से प्रबंधित करना) और 'इमोशनल सप्रेशन' (भावनाओं को दबाना) के बीच महत्वपूर्ण अंतर को समझाया। जहाँ एक ओर भावनात्मक रूप से परिपक्व व्यक्ति अपनी भावनाओं को पहचानता है और उन्हें सम्मानपूर्वक व्यक्त करता है, वहीं भावनाओं को दबाने वाला व्यक्ति अक्सर 'कोई बात नहीं' कहकर अपनी वास्तविक भावनाओं को छिपा लेता है। यह आंतरिक संघर्ष रिश्ते की नींव को कमजोर कर सकता है, भले ही यह तुरंत दिखाई न दे।

रिश्ते की मजबूती: केवल झगड़ों से परे

विशेषज्ञ ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी रिश्ते की गुणवत्ता केवल इस बात से नहीं मापी जाती कि उसमें कितनी बार झगड़े या असहमति होती है। बल्कि, रिश्ते की असली मजबूती इस बात में निहित है कि दोनों साथी अपनी नाराजगी, खुशी, दुख और व्यक्तिगत जरूरतों को कितनी सहजता और खुलेपन से एक-दूसरे के साथ साझा कर पाते हैं। एक स्वस्थ रिश्ता वह है जहाँ दोनों पार्टनर एक-दूसरे को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक सुरक्षित और सहायक वातावरण प्रदान करते हैं।

डॉ. सुकुल ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का प्यार केवल गुस्सा जताने या न जताने से परिभाषित नहीं होता। प्यार का वास्तविक प्रमाण समय देने, एक-दूसरे का सहयोग करने, जिम्मेदारियों को निभाने और मुश्किल वक्त में साथ खड़े रहने जैसे कार्यों से झलकता है। ये व्यवहारिक पहलू अक्सर भावनाओं के मौखिक प्रदर्शन से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

एक स्वस्थ संवाद की ओर

रिश्ते को मजबूत और स्वस्थ बनाने के लिए, डॉ. सुकुल ने कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी है। सबसे पहले, पार्टनर्स को एक-दूसरे के लिए सुरक्षित माहौल बनाना चाहिए, जहाँ वे बिना किसी डर के अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें। दूसरे, एक-दूसरे की भावनाओं को समझने की कोशिश करना और उनकी राय का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है। बातचीत के दौरान, दोषारोपण की बजाय समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

यदि पार्टनर का शांत स्वभाव उनकी समझदारी और भावनात्मक परिपक्वता का परिणाम है, तो यह रिश्ते के लिए एक अत्यंत सकारात्मक संकेत है। हालांकि, यदि यह शांति अनकही भावनाओं को दबाने या टकराव से बचने के डर का नतीजा है, तो यह एक ऐसी समस्या है जिस पर दोनों पार्टनर्स को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। खुले और ईमानदार संवाद से ही किसी भी रिश्ते की गहराई और दीर्घायु सुनिश्चित की जा सकती है।