रेल संरक्षा आयुक्त ने किया व्यावरा-सोनकच्छ रेलखंड का निरीक्षण, 120 किमी/घंटा की गति से सफल ट्रायल
रेल संरक्षा आयुक्त ने भोपाल-रामगंजमंडी नई रेल लाइन के व्यावरा राजगढ़-सोनकच्छ 24.50 किमी रेलखंड का निरीक्षण किया। अधिकतम 120 किमी/घंटा की गति से स्पीड ट्रायल सफल रहा।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 21 अगस्त 2026
रेल संरक्षा आयुक्त (CRS), मध्य वृत्त के श्री गुरु प्रकाश ने आज, 21 अगस्त 2026 को भोपाल-रामगंजमंडी नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत नवनिर्मित 24.50 किलोमीटर लंबे व्यावरा राजगढ़-सोनकच्छ रेलखंड का विस्तृत निरीक्षण और संरक्षा परीक्षण किया। इस निरीक्षण के तुरंत बाद, इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति से एक सफल स्पीड ट्रायल आयोजित किया गया।
यह निरीक्षण रेल परियोजना के एक महत्वपूर्ण चरण को दर्शाता है, जो इस नए रेलमार्ग के यात्री और मालगाड़ी संचालन के लिए सुरक्षा और तकनीकी उपयुक्तता सुनिश्चित करेगा। दो दिवसीय निरीक्षण के दौरान, आयुक्त ने ट्रैक की गुणवत्ता, पुलों, समपार फाटकों, सिग्नलिंग तथा दूरसंचार प्रणालियों सहित सभी प्रमुख अवसंरचनाओं की बारीकी से जांच की। इस प्रक्रिया में मोटर ट्रॉली द्वारा रेलखंड के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन और निर्धारित संरक्षा मानकों का परीक्षण शामिल था।
नई रेलखंड की विशेषताएं और प्रगति
व्यावरा राजगढ़-सोनकच्छ रेलखंड की कुल लंबाई 24.50 किलोमीटर है। इस खंड में एक पीपलखेड़ा हाल्ट स्टेशन, चार मुख्य पुल और 53 छोटे पुलों का निर्माण किया गया है। निरीक्षण के पहले दिन, रेल संरक्षा आयुक्त ने व्यावरा राजगढ़ और सोनकच्छ स्टेशनों के यार्ड का भी गहन निरीक्षण किया, जिसमें स्टेशन परिसर में उपलब्ध विभिन्न रेल सुविधाओं और संरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। दूसरे दिन, अधिकतम 120 किमी/घंटा की गति से सफलतापूर्वक स्पीड ट्रायल संपन्न हुआ, जो इस खंड के संचालन के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
इस प्रकार, व्यावरा राजगढ़-सोनकच्छ खंड का सफलतापूर्वक निरीक्षण और स्पीड ट्रायल पूरा होना, भोपाल-रामगंजमंडी नई रेल लाइन परियोजना की प्रगति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह खंड यात्रियों और माल ढुलाई दोनों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी का मार्ग प्रशस्त करेगा।
भोपाल-रामगंजमंडी परियोजना का व्यापक परिदृश्य
समग्र रूप से, भोपाल-रामगंजमंडी नई रेल लाइन परियोजना 276 किलोमीटर लंबी है और इसमें कुल 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह महत्वाकांक्षी परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों को जोड़ेगी, जिससे भोपाल, सीहोर, राजगढ़, झालावाड़ और कोटा जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। यह परियोजना इन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को काफी बेहतर बनाने की क्षमता रखती है, विशेष रूप से उन पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में जहां रेल संपर्क पहली बार स्थापित किया जा रहा है।
परियोजना को दो मंडलों में विभाजित किया गया है: भोपाल मंडल के अंतर्गत 111 किलोमीटर और कोटा मंडल के अंतर्गत 165 किलोमीटर रेलखंड आता है। यह विभाजन परियोजना के कुशल प्रबंधन और निष्पादन को सुनिश्चित करता है।
भोपाल मंडल के हिस्से के तहत, निशातपुरा डी केबिन से व्यावरा तक 111 किलोमीटर में से, निशातपुरा डी केबिन-कुरावर और व्यावरा राजगढ़-सोनकच्छ खंडों सहित कुल 80 किलोमीटर का कमीशनिंग पहले ही हो चुका है। यह दर्शाता है कि परियोजना अपने निर्धारित समय-सीमा के भीतर आगे बढ़ रही है।
शेष खंडों की पूर्णता और वित्तीय वर्ष लक्ष्य
शेष कुरावर-नरसिंहगढ़ और नरसिंहगढ़-सोनकच्छ रेलखंडों को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य परियोजना के अंतिम चरण को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन शेष खंडों का पूरा होना परियोजना को एक साथ लाएगा और मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच रेल संपर्क को पूरी तरह से चालू कर देगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि मार्च 2026 तक, 276 किलोमीटर लंबी रामगंज मंडी-भोपाल लाइन का लगभग 50% ट्रैक निर्माण पूरा हो चुका था। यह आंकड़ा परियोजना की गति और योजनाबद्ध तरीके से प्रगति को रेखांकित करता है। कुल मिलाकर, परियोजना के दिसंबर 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि कुछ रिपोर्टों में 2026 को भी संभावित पूर्णता वर्ष बताया गया है, जो विभिन्न घटकों की प्रगति पर निर्भर करेगा।
परियोजना के अपेक्षित लाभ और आर्थिक प्रभाव
इस नई रेल लाइन के पूर्ण होने से यात्री और माल परिवहन दोनों के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। यह न केवल आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि आर्थिक विकास को भी गति प्रदान करेगा। वर्तमान ब्यावरा-झालावाड़ मार्ग की तुलना में, यह नया मार्ग लगभग 42 किलोमीटर छोटा होगा, जिससे यात्रा में लगने वाले समय में लगभग 3 घंटे की कमी आने की उम्मीद है। यह कमी यात्रियों के लिए अत्यंत सुविधाजनक होगी और यात्रा के समय का सदुपयोग करने में सहायक होगी।
इसके अलावा, मार्ग की संक्षिप्तता से ईंधन की बचत होगी, जिससे परिवहन लागत में कमी आएगी और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भोपाल मंडल के 111 किलोमीटर रेल लाइन और 12 स्टेशनों के निर्माण के लिए ₹1,255 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जो इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह परियोजना भोपाल और कोटा मंडलों के विभिन्न स्टेशनों के बीच सीधी और निर्बाध रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे यात्रा अधिक सुविधाजनक और तेज होगी, और माल ढुलाई अधिक कुशल बनेगी। इस नई लाइन से भोपाल और कोटा के बीच की दूरी लगभग 100 किलोमीटर कम होने की उम्मीद है।
सुरक्षा मानक और अधिकारी उपस्थिति
परियोजना के विभिन्न चरणों में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, जैसा कि रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा किए गए निरीक्षण से स्पष्ट है। इस अवसर पर डीआरएम श्री पंकज त्यागी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी/निर्माण श्री एम. एस. हाशमी, मुख्य परियोजना प्रबंधक श्री पंकज स्वाइन, उप मुख्य अभियंता (निर्माण) श्री मो. वसीम, मुख्य इंजीनियर (ट्रैक मशीन) श्री ए. के. तोमर सहित निर्माण एवं संबंधित विभागों मुख्यालय एवं मंडल के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इन अधिकारियों की उपस्थिति परियोजना के महत्व और इसके सफल निष्पादन के प्रति रेलवे के समर्पण को दर्शाती है।
