रेल मंत्री से डॉ. राजगोपाल की अपील: ट्रेनों में स्वच्छता, खान-पान और वरिष्ठों को मिले रियायत
गांधीवादी समाजसेवी डॉ. राजगोपाल पी.वी. ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर ट्रेनों में स्वच्छता, खान-पान की गुणवत्ता और वरिष्ठ नागरिकों के लिए किराया रियायत जैसे मुद्दों पर सुधार का आग्रह किया है।

द क्लिफ न्यूज़ | मुरैना | 20 अगस्त 2026
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गांधीवादी समाजसेवी और महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा के अध्यक्ष डॉ. राजगोपाल पी.वी. ने भारतीय रेल में यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, खान-पान की गुणवत्ता और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली किराया रियायत जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक पत्र लिखकर ठोस सुधार की मांग की है। डॉ. राजगोपाल ने रेल व्यवस्था से जुड़े इन विषयों पर संवेदनशीलता के साथ पुनर्विचार करने और यात्रियों की सुविधाओं में आवश्यक सुधार के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है।
अपने पत्र को सार्वजनिक करते हुए डॉ. राजगोपाल ने कहा कि भारतीय रेल देश के करोड़ों लोगों के जीवन का एक अभिन्न अंग है। यह केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाला परिवहन माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों, श्रमिकों, किसानों, व्यापारियों, बुजुर्गों, महिलाओं और आम नागरिकों की रोजमर्रा की यात्राओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा है। इसलिए, रेल यात्रा के दौरान यात्रियों को सुरक्षित, स्वच्छ, सुविधाजनक और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना रेलवे की सर्वोपरि जिम्मेदारी है।
सामाजिक कार्यों के सिलसिले में देश के विभिन्न हिस्सों की नियमित यात्रा करने वाले डॉ. राजगोपाल ने अपने रेल यात्रा अनुभवों के आधार पर कई बुनियादी मुद्दों की ओर रेल मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया है। उनका मानना है कि रेलवे देश की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्थाओं में से एक है और इसकी सेवाओं का सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ता है। ऐसे में यात्रियों की छोटी से छोटी जरूरत को भी व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान मिलना चाहिए।
ट्रेनों में स्वच्छता की बदहाल स्थिति
डॉ. राजगोपाल ने ट्रेनों में साफ-सफाई और शौचालयों की स्थिति को विशेष रूप से चिंता का विषय बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए स्वच्छ शौचालय, साफ-सुथरे कोच और नियमित सफाई अत्यंत आवश्यक है। यदि इन बुनियादी सुविधाओं में कमी रहती है, तो यात्रियों को कई घंटे की यात्रा के दौरान गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। डॉ. राजगोपाल ने रेलवे से सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी और यात्रियों की शिकायतों पर प्रभावी और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया है।
खान-पान की गुणवत्ता पर सवाल
खान-पान की गुणवत्ता को लेकर भी उन्होंने रेल मंत्रालय का ध्यान खींचा है। उनका कहना है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों के लिए भोजन एक आवश्यक सेवा है, ऐसे में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, ताजगी और उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ. राजगोपाल का मानना है कि यात्रियों को ऐसा भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जो स्वच्छता और गुणवत्ता के सभी निर्धारित मानकों पर खरा उतरे। उन्होंने राजधानी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों का भी उल्लेख किया, जहां यात्रियों को सुविधाजनक अनुभव होना चाहिए, न कि असुविधाजनक।
रेलवे ट्रैक के आसपास कचरा प्रबंधन की चुनौती
डॉ. राजगोपाल ने रेलवे ट्रैक के आसपास बढ़ते कचरे को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, कई स्थानों पर पटरियों के आसपास प्लास्टिक और अन्य प्रकार का कचरा दिखाई देता है। ट्रेन के डिब्बों से निकलने वाला कचरा भी कई बार उचित तरीके से निपटाए जाने के बजाय रेलवे ट्रैक के आसपास ही जमा हो जाता है। यह स्थिति केवल रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक जिम्मेदारी का भी एक बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरे का रेलवे ट्रैक के आसपास जमा होना लंबे समय में पर्यावरण के लिए अत्यंत नुकसानदायक हो सकता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों की स्वच्छता प्रभावित होती है और जल निकासी तथा प्राकृतिक पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। डॉ. राजगोपाल ने रेलवे से कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को और मजबूत करने तथा यात्रियों में भी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए किराया रियायत बहाली की मांग
उन्होंने रेल किराए और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं के बीच संतुलन का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि जब यात्रियों से यात्रा के लिए किराया लिया जाता है, तो उसके अनुरूप बुनियादी सेवाओं का स्तर भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यात्रियों को स्वच्छता, सुरक्षा, पेयजल, शौचालय और बेहतर खान-पान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना रेल सेवा की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों की यात्रा को लेकर भी डॉ. राजगोपाल ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली किराया रियायत या छूट को पुनः बहाल करने की जोरदार मांग की है। उनका तर्क है कि उम्र बढ़ने के साथ यात्रियों की आर्थिक और शारीरिक आवश्यकताएं भी बदलती हैं, इसलिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेल यात्रा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
संवाद और सुधार की भावना
डॉ. राजगोपाल का पत्र गांधीवादी दृष्टिकोण की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। उन्होंने रेलवे व्यवस्था को लेकर अपनी बात किसी आरोप या कठोर आलोचना के रूप में रखने के बजाय सुधार और संवाद की भावना से रेल मंत्री के सामने रखी है। उनका उद्देश्य रेलवे की आलोचना करना नहीं, बल्कि यात्रियों की वास्तविक समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना और समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल का आग्रह करना है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का मूल्यांकन केवल उसके विस्तार या तकनीकी प्रगति से नहीं होना चाहिए, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि आम यात्री को यात्रा के दौरान कितना सम्मान, आराम और सुरक्षा मिल रही है। भारत जैसे विशाल देश में करोड़ों लोग रोजाना रेल पर निर्भर हैं, इसलिए रेलवे की प्रत्येक व्यवस्था का प्रभाव समाज के व्यापक वर्ग पर पड़ता है।
डॉ. राजगोपाल ने रेल मंत्रालय से आग्रह किया है कि यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े इन मुद्दों पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने सफाई व्यवस्था, शौचालयों, खान-पान, कचरा प्रबंधन और वरिष्ठ नागरिकों की रियायत जैसे विषयों पर सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई है। उनका कहना है कि रेलवे को यात्रियों की शिकायतों और सुझावों को केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि यात्रियों के अनुभवों से व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आती है। यदि इन अनुभवों और शिकायतों का नियमित विश्लेषण किया जाए तो कई समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही किया जा सकता है।
रेलवे में आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मानवीय संवेदना को भी समान महत्व देने की जरूरत है। डिजिटल टिकटिंग, आधुनिक स्टेशन, तेज गति की ट्रेनें और तकनीकी सुविधाएं निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन उपलब्धियों के साथ यह भी जरूरी है कि सामान्य यात्री को साफ सीट, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण भोजन और सम्मानजनक व्यवहार मिले। डॉ. राजगोपाल ने अपने पत्र में इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखा है, जिनके अनुसार विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसकी सुविधाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि रेल मंत्री उनके सुझावों को सकारात्मक दृष्टि से देखेंगे और यात्रियों से जुड़े इन मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई की दिशा में पहल करेंगे। उनका पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब भारतीय रेल लगातार आधुनिकीकरण और विस्तार के दौर से गुजर रही है। डॉ. राजगोपाल पी.वी. के पत्र का मूल भाव यही है कि रेल केवल पटरियों पर दौड़ती हुई ट्रेन नहीं है, बल्कि यह भारत के करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, उम्मीदों और यात्राओं से जुड़ी व्यवस्था है। इसलिए रेलवे का विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब आधुनिकता के साथ स्वच्छता, सुविधा, सुरक्षा और मानवीय संवेदना भी हर यात्री की यात्रा का हिस्सा बने।
