रायसेन जेल में कैदी ने प्रहरी पर चलाई गोली, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
रायसेन जिला जेल में हत्या के मामले के विचाराधीन कैदी ने भागने की कोशिश में जेल प्रहरी पर देसी कट्टे से गोली चला दी, जिससे प्रहरी गंभीर रूप से घायल हो गया।

द क्लिफ न्यूज़ | रायसेन | 3 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के रायसेन जिला जेल में बुधवार, 2 सितंबर की सुबह एक चौंकाने वाली घटना हुई, जिसने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए। हत्या के मामले में विचाराधीन कैदी नीलेश ठाकुर ने कथित तौर पर जेल से भागने की कोशिश के दौरान जेल प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर पर देसी कट्टे से गोली चला दी। इस हमले में प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल रायसेन जिला अस्पताल ले जाया गया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें भोपाल स्थित एम्स रेफर किया गया है।
यह घटना सुबह करीब नौ बजे उस समय हुई जब कैदी नीलेश ठाकुर जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकलने का प्रयास कर रहा था। पुलिस के अनुसार, जब प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर ने उसे रोकने का प्रयास किया, तो कैदी ने अपने पास छिपा रखा देसी कट्टा निकालकर उन पर फायर कर दिया। गोली लगने से प्रहरी गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़े। इस घटना ने जेल परिसर के भीतर हथियारों की मौजूदगी और सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा दी हैं।
फल की टोकरी में छिपाया गया था हथियार?
घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक उच्च सुरक्षा वाली जेल में देसी कट्टा कैसे पहुंचा। प्रारंभिक जांच में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि हथियार को फल की टोकरी में छिपाकर जेल के भीतर लाया गया होगा। कैदी के फल की टोकरी के साथ जेल के मुख्य द्वार के पास पहुंचने और फिर अचानक हथियार निकालकर फायरिंग करने की बात सामने आ रही है। यह घटना जेल में प्रवेश करने वाली सामग्री की सुरक्षा जांच की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाती है। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह हथियार पहले से जेल के भीतर मौजूद था या किसी बाहरी व्यक्ति अथवा जेलकर्मी की मिलीभगत से इसे अंदर पहुंचाया गया।
प्रहरी की हालत गंभीर, उच्चस्तरीय जांच शुरू
गोली लगने के बाद, गंभीर रूप से घायल प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर को रायसेन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां मौजूद चिकित्सकों ने बताया कि गोली कैदी के पीठ के ऊपरी हिस्से में लगी है और एक्स-रे में यह फेफड़े के निचले हिस्से के पास फंसी पाई गई। तत्काल उपचार के बाद, उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें भोपाल एम्स रेफर कर दिया गया, जहां वह विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में हैं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक और जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। जेल परिसर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया। घटना के सभी पहलुओं की गहन पड़ताल शुरू कर दी गई है।
कैदी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज
आरोपी कैदी नीलेश ठाकुर हत्या के एक मामले में विचाराधीन है। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 307 (हत्या का प्रयास) जैसी गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। इसी पृष्ठभूमि में, उसके पास हथियार का पाया जाना एक सामान्य सुरक्षा चूक के बजाय एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। यह इस बात का संकेत है कि जेल के भीतर भी आपराधिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हो सकते हैं, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
जेल अधीक्षक निलंबित, आईजी स्तर पर जांच सौंपी गई
इस गंभीर सुरक्षा चूक के मद्देनजर, जेल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कार्यवाहक जेल अधीक्षक आर.के. चौरे को निलंबित कर दिया है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए आईजी स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि जेल के भीतर हथियार कैसे पहुंचा, कैदी को भागने का प्रयास करने और गेट तक पहुंचने का मौका कैसे मिला, और क्या ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया था।
सुरक्षा पर उठते प्रश्नचिह्न
रायसेन जेल की इस घटना ने पूरे प्रदेश की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विचाराधीन कैदी के पास अवैध हथियार का पहुंचना और उसका उपयोग प्रहरी पर हमला करने के लिए किया जाना, जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली में बड़ी खामियों की ओर इशारा करता है। यह घटना जेलों में आने वाले खाद्य पदार्थ, फल और अन्य सामानों की तलाशी की प्रक्रिया, बंदियों की निगरानी, मुख्य द्वार की सुरक्षा, कर्मचारियों की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों के संचालन की स्थिति पर भी सवाल उठाती है।
जेल की चारदीवारी के भीतर, जहां सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, वहीं एक कैदी का हथियार से लैस होना व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जेल की ऊंची दीवारें तभी सुरक्षा की गारंटी बन सकती हैं, जब उनके भीतर की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत और अभेद्य हो। जांच पूरी होने के बाद ही सुरक्षा में चूक के लिए जिम्मेदार लोगों का खुलासा हो पाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जा सकेंगे।
