रातापानी जंगल सफारी 1 अक्टूबर से शुरू, 15 शावकों का दीदार खास आकर्षण
भोपाल के रातापानी अभ्यारण्य में 1 अक्टूबर से जंगल सफारी पुनः आरंभ हो रही है। इस बार 15 नन्हे बाघ शावकों की मौजूदगी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगी।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 6 सितंबर 2026
राजधानी भोपाल के निकट स्थित रातापानी अभ्यारण्य एक बार पुनः जंगल सफारी के रोमांच के लिए तैयार है। 1 अक्टूबर 2026 से यह वन क्षेत्र आम पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। इस वर्ष सफारी का मुख्य आकर्षण जंगल में विचरण कर रहे लगभग 15 नन्हे बाघ शावक होंगे, जिनकी मौजूदगी ने वन्यजीव प्रेमियों और संभावित पर्यटकों के उत्साह को काफी बढ़ा दिया है।
भोपाल से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर फैला रातापानी अभ्यारण्य अपने घने वनों, विशाल सागौन के वृक्षों, पहाड़ी भूभाग और प्राकृतिक चट्टानी संरचनाओं के लिए विख्यात है। सफारी के माध्यम से पर्यटक यहां के नैसर्गिक सौंदर्य का अनुभव कर सकेंगे और विभिन्न वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर प्राप्त करेंगे।
शावकों की मौजूदगी से बढ़ा रोमांच
रातापानी अभ्यारण्य में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इस बार करीब 15 बाघ शावकों की उपस्थिति पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है। अपनी मां के साथ जंगल में खेलते और घूमते हुए इन नन्हे शावकों को देखना, वन्यजीव उत्साही लोगों के लिए एक अत्यंत रोमांचक अनुभव साबित हो सकता है। हालांकि, वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियों के कारण उनके दर्शन की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती है।
विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास
रातापानी अभ्यारण्य केवल बाघों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह तेंदुआ, भालू, चीतल और सांभर जैसे कई अन्य वन्यजीवों का भी प्राकृतिक आवास है। यहां का घना जंगल और विविध प्रकार के प्राकृतिक आवास इन सभी जानवरों के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। सफारी के दौरान, आगंतुकों को विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों और पक्षियों की गतिविधियों को देखने का अवसर मिल सकता है।
टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने की आस
बाघों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण रातापानी को लंबे समय से टाइगर रिजर्व का दर्जा दिए जाने की मांग की जा रही है। बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण और क्षेत्र में उनकी निरंतर उपस्थिति, वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से इस स्थान को विशेष महत्व प्रदान करती है।
ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत का संगम
रातापानी क्षेत्र की विशेषता केवल वन्यजीवों तक ही सीमित नहीं है। इसके समीप स्थित भीमबैठका, अपने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। हजारों वर्ष पुराने इन शैलचित्रों में प्राचीन मानव जीवन और तत्कालीन प्रकृति से जुड़े अनेक दृश्य चित्रित हैं। इस प्रकार, रातापानी की यात्रा पर्यटकों को वन्यजीव, घने जंगल और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत—इन तीनों का एक अनूठा और समग्र अनुभव प्रदान करती है।
1 अक्टूबर से प्रारंभ होने वाली जंगल सफारी के साथ, भोपाल और इसके आसपास के क्षेत्रों के पर्यटकों के लिए वन्यजीवों के बीच जंगल सैर का एक नया मौसम आरंभ होगा। इस बार 15 नन्हे बाघ शावकों की उपस्थिति रातापानी के सफारी अनुभव को और भी खास बनाने की उम्मीद है।
