रास्ते की समस्या पर सत्याग्रह समाप्त, विधायक ने आश्वासन के साथ करवाया धरना खत्म
इटावा के बढ़पुरा में 'रास्ता दो या मौत' सत्याग्रह समाप्त। सदर विधायक सरिता भदौरिया के आश्वासन पर महिलाओं ने तोड़ा अनशन, ओवरब्रिज निर्माण की मांग।

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 22 अगस्त 2026
इटावा जिले के बढ़पुरा विकासखंड की ग्राम पंचायत शेखूपुर जखोली में आवागमन की विकट समस्या को लेकर 'रास्ता दो या मौत' के नारे के साथ चल रहा सत्याग्रह धरना शनिवार को समाप्त हो गया। सदर विधायक श्रीमती सरिता भदौरिया ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुनते हुए और अधिकारियों को मौके पर बुलाकर शीघ्र समाधान का आश्वासन देते हुए धरने को खत्म कराया। विधायक द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद भूख हड़ताल पर बैठी महिलाओं ने अपना अनशन तोड़ा।
जानकारी के अनुसार, शनिवार को करीब 11 बजे सदर विधायक सरिता भदौरिया सत्याग्रह स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर रास्ते की समस्या और उनकी वर्षों पुरानी मांग को समझा। विधायक ने धरनारत लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्या का समाधान अतिशीघ्र किया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से धरना समाप्त करने की अपील की।
विधायक के आश्वासन पर महिलाओं ने तोड़ा अनशन
विधायक की अपील के बाद, भूख हड़ताल पर बैठी पांच महिलाओं - रामसखी, सरला, गिरजा, माधुरी और उर्मिला - ने सामूहिक रूप से अपना धरना समाप्त कर दिया। विधायक सरिता भदौरिया ने स्वयं अपने हाथों से उन्हें लड्डू खिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। इस मौके पर विधायक धरनारत महिलाओं के साथ बैठीं और उनकी मांगों को अत्यंत गंभीरता से सुना।
सत्याग्रह के संचालक दीपक राज ने बताया कि विधायक के हस्तक्षेप के बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। ग्रामीणों की मांग है कि जब तक उनकी मुख्य समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
ओवरब्रिज निर्माण की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
धरना समाप्त कराने के उपरांत, विधायक सरिता भदौरिया ने सत्याग्रह स्थल पर ही केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को संबोधित एक ज्ञापन प्राप्त किया। इस ज्ञापन में शेखूपुर जखोली और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने अपनी आवागमन की समस्या के स्थायी समाधान के तौर पर ओवरब्रिज निर्माण की प्रमुखता से मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान रास्ते की समस्या के कारण उन्हें रोज़मर्रा के जीवन, रोज़गार, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिसका एकमात्र स्थायी समाधान ओवरब्रिज का निर्माण ही है।
इस दौरान, मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर उपस्थित थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी ग्रामीणों की समस्याओं और स्थल की मौजूदा स्थिति का गहनता से जायजा लिया। विधायक ने अधिकारियों की उपस्थिति में समस्या के समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया।
आश्वासन पर भरोसा, पर अमल का इंतजार
भूख हड़ताल पर बैठी महिलाओं ने सामूहिक रूप से कहा कि वे विधायक के आश्वासन पर सत्याग्रह समाप्त कर रही हैं, परंतु उनकी मांगें केवल आश्वासन तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि काम वास्तव में धरातल पर दिखना चाहिए और ग्रामीणों को सुगम आवागमन की सुविधा मिलनी चाहिए। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे दोबारा सत्याग्रह पर बैठने को मजबूर होंगी।
ग्रामीणों के अनुसार, रास्ते की यह समस्या लंबे समय से उनके जीवन को प्रभावित कर रही है। आवागमन की सुविधा का अभाव दैनिक दिनचर्या को बेहद कठिन बना देता है। उन्होंने प्रशासन और स्थानीय जन प्रतिनिधियों से मांग की है कि दिए गए आश्वासनों को शीघ्रता से क्रियान्वित किया जाए और ओवरब्रिज निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
विधायक और अधिकारियों की उपस्थिति तथा महिलाओं द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद ग्रामीणों में कुछ हद तक राहत देखी गई। हालांकि, ग्रामीणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका आंदोलन स्थगित हुआ है और वे वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होने और उसके पूरा होने का धैर्यपूर्वक इंतजार करेंगे।
सत्याग्रह संचालक दीपक राज ने दोहराया कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा करते हुए फिलहाल सत्याग्रह समाप्त किया गया है। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि ओवरब्रिज और रास्ते की समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर कितनी तीव्रता से कार्रवाई होती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मूल मांग सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना है, और जब तक यह पूरा नहीं हो जाता, वे अपने अधिकार की आवाज उठाना जारी रखेंगे।
