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राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक डॉ. देवदास को राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान 2026

गरियाबंद के डॉ. मुन्नालाल देवदास को शिक्षक दिवस 2026 पर ऑनलाइन 'राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान 2026' से नवाजा गया। वे 19 वर्षों से जिले के एकमात्र राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक हैं।

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राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक डॉ. देवदास को राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान 2026

द क्लिफ न्यूज़ | गरियाबंद | 4 सितंबर 2026

शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के नगर पंचायत कोपरा निवासी डॉ. मुन्नालाल देवदास को 'ग्लोबल आइकन ऑफ इंडिया ई-मैगजीन' द्वारा 'राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान 2026' से ऑनलाइन सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें कला, संस्कृति, नवाचार, शिक्षा, साहित्य के संरक्षण-संवर्धन, समाजसेवा और श्रीराम चरित मानस के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। डॉ. देवदास, जो कि एक सेवानिवृत्त प्रधान पाठक, कवि, गीतकार, लेखक, साहित्यकार और समाजसेवी हैं, गरियाबंद जिले के एकमात्र ऐसे शिक्षक हैं जिन्हें 19 वर्षों से राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

डॉ. देवदास का जीवन संघर्षों से भरा रहा है, और उन्होंने विषम परिस्थितियों तथा चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पटल तक पहुंचाया है। उनकी यह बहुआयामी यात्रा शिक्षकों, विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह दर्शाती है कि किस प्रकार चुनौतियों का सामना करते हुए समाज और राष्ट्र के नवनिर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई जा सकती है।

36 वर्ष की सेवा और जनसेवा का अनुभव

डॉ. देवदास ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत 1982 में राजीव लोचन महाविद्यालय, राजिम से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद की। 1983 से जून 1987 तक, उन्होंने ग्राम पंचायत कोपरा के उपसरपंच के रूप में चार साल तक जनसेवा की। इसके पश्चात, उन्होंने जुलाई 1987 से अप्रैल 2023 तक, कुल 36 वर्षों तक स्वतंत्रता सेनानी ग्राम कौन्दकेरा में निष्ठापूर्वक शिक्षकीय सेवा प्रदान की। अपनी सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किए, जो उनकी कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण का प्रमाण हैं।

राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मानों से अलंकृत

गरियाबंद जिले के लिए एक अनूठी उपलब्धि हासिल करते हुए, डॉ. देवदास को वर्ष 2007 में भारत की तत्कालीन प्रथम महिला राष्ट्रपति, महामहिम प्रतिभा पाटिल द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। तब से लेकर अब तक, पिछले 19 वर्षों में गरियाबंद जिले से किसी अन्य शिक्षक को राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त नहीं हुआ है, जो डॉ. देवदास की विशिष्ट उपलब्धि को रेखांकित करता है।

शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को पहचानते हुए, छत्तीसगढ़ शासन ने उन्हें वर्ष 2020 में 'डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित किया। इस सम्मान ने गरियाबंद जिले को शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में प्रतिष्ठा दिलाई है।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर गूंजी रचनाएं, पद्मश्री गायकों को स्वर दिए

डॉ. देवदास की साहित्यिक प्रतिभा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उनके द्वारा लिखे गए गीतों को देश-विदेश के कई चर्चित गायकों ने अपनी आवाज़ दी है। इनमें भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा, पद्मश्री अनुराधा पौडवाल, पद्मश्री सुरेश वाडेकर और अमेरिकी गायिका वंदना श्रीवास्तव जैसे प्रतिष्ठित कलाकार शामिल हैं। उनके गीत टी-सीरीज मुंबई, सोनोटेक और जी म्यूजिक जैसे प्रमुख संगीत चैनलों से रिलीज़ हुए हैं। इस उपलब्धि के लिए उन्हें वर्ष 2022 में मुंबई में 'श्री दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म एंड टेलीविजन अवार्ड' से सम्मानित किया गया। वे छत्तीसगढ़ के ऐसे प्रथम ग्रामीण शिक्षक हैं जिन्होंने तीन पद्मश्री गायकों से गीत गवाकर उन्हें टी-सीरीज जैसे प्रतिष्ठित चैनल से रिलीज़ करवाया।

30 पुस्तकें प्रकाशित, तीन को विश्व रिकॉर्ड

साहित्यिक साधना के क्षेत्र में डॉ. देवदास का योगदान अत्यंत व्यापक है। उनकी अब तक 30 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि तीन पुस्तकें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं। इसके अतिरिक्त, उनके सात शोधपरक आलेख भी प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने 'माता कौशल्या', 'स्वतंत्रता सेनानी पं. सुंदरलाल शर्मा', 'संत कवि पवन दीवान' और 'गरियाबंद की गौरव गाथा' जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चार बार अखिल भारतीय निःशुल्क काव्य लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की हैं, जिनके साहित्य संग्रह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल धरोहर साबित होंगे।

उनकी तीन पुस्तकों को विश्व रिकॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। इन पुस्तकों में 'कोपरा की प्रभात भजन परंपरा', 'श्यामनगर में सामूहिक राष्ट्रगान परंपरा' और 'पैरीनदी परिक्रमा सिरकट्टी आश्रम' शामिल हैं। बाल कहानी लेखन के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है, आकाशवाणी रायपुर से उनकी चार बाल कहानियों का प्रसारण हो चुका है।

मानस परंपरा के संगठक और शैक्षिक नवाचार

धार्मिक और सामाजिक सरोकारों के प्रति भी डॉ. देवदास सक्रिय रहे हैं। 25 मई 2014 को सिरकट्टी आश्रम में उन्होंने 'मम राजीव लोचन जिला मानस संघ' की स्थापना की, जिसके माध्यम से उन्होंने जिले की विभिन्न मानस मंडलियों को संगठित किया। विगत 12 वर्षों से यह संघ गांवों में मानस के माध्यम से जनजागरण का कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में, 2019 में विश्व प्रसिद्ध कौशल्या माता मंदिर, चंदखुरी में सबके सहयोग से पहली बार 'पितर मानस महोत्सव' मनाने की शुरुआत की। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. देवदास को 2024 में 'मानस दर्शन जीवन अर्पण संघ' द्वारा 'पितर मानस महोत्सव शिल्पी सम्मान' से नवाजा गया।

शैक्षिक नवाचार के क्षेत्र में, डॉ. देवदास का 'अंकों से अक्षर निर्माण' नामक शैक्षिक नवाचार प्राथमिक कक्षा शिक्षण, बालवाड़ी और 'साक्षर भारत अभियान' के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ है। वर्ष 2006 में महाराष्ट्र में आयोजित राष्ट्रीय शैक्षिक नवाचार सम्मेलन में उन्होंने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया था। उन्हें 'सर रतन टाटा इनोवेटिव टीचर अवार्ड' सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। 2021 में दूरदर्शन रायपुर से उनके इसी शैक्षिक नवाचार पर एक परिचर्चा का प्रसारण भी किया गया था।

उन्होंने अनेक गरीब और दिव्यांग बच्चों को अपनी निजी धनराशि से शिक्षा प्रदान कर उन्हें समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया है। उनकी यह पहल शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है।

सफलता का मूलमंत्र: निरंतर कर्म और नवाचार

डॉ. देवदास अपनी सफलता का श्रेय कुछ सरल किंतु प्रभावी सिद्धांतों को देते हैं। उनका मानना है कि अच्छे लोगों की संगति करना, व्यर्थ की चर्चाओं में समय और ऊर्जा बर्बाद न करना, हर कार्य को योजनाबद्ध तरीके से और धैर्यपूर्वक पूरा करना, प्रतिदिन कुछ नया सीखना, दैनिक डायरी बनाकर अपने कार्यों की स्वयं समीक्षा करना, तथा सभी का सम्मान करते हुए व्यवहार कुशल बने रहना, सफलता के लिए आवश्यक है। यह छोटी-छोटी बातें नई पीढ़ी के शिक्षकों और विद्यार्थियों को यह संदेश देती हैं कि चाहे संघर्ष कितना भी बड़ा क्यों न हो, निरंतर कर्म, नवाचार और समाजसेवा के माध्यम से उपलब्धियों की नई ऊंचाइयां अवश्य हासिल की जा सकती हैं।