राम मंदिर चढ़ावा विवाद: विपक्ष ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग, संसद में हंगामा
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर संसद में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन। डिंपल यादव ने एसआईटी से ऊपर की जांच की वकालत की।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर में इकट्ठा होकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
विपक्ष का मुख्य आरोप है कि राम मंदिर के नाम पर श्रद्धालुओं द्वारा जमा की गई दान राशि के प्रबंधन में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। इसलिए, इसके प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए एक विश्वसनीय जांच आवश्यक है।
जांच की मांग और विपक्ष का रुख
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि दान और चढ़ावे के प्रबंधन में किसी भी तरह की हेराफेरी हुई है, तो इसकी जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए। डिंपल यादव ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि जांच ऐसी संस्था द्वारा होनी चाहिए जिस पर सभी राजनीतिक दल भरोसा कर सकें।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यदि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो इससे देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं का सरकार और संबंधित संस्थानों पर से विश्वास उठ सकता है। डिंपल यादव ने सरकार से इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
संसद में विरोध प्रदर्शन
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद भी शामिल हुए। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में नारेबाजी करते हुए सरकार से कथित चढ़ावा घोटाले की निष्पक्ष जांच कराने और इस पर जवाब देने की मांग दोहराई। विपक्ष का यह भी कहना है कि धार्मिक संस्थाओं में जमा होने वाले दान के उपयोग और उसके लेखा-जोखे को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की शंका न रहे।
सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, संसद के भीतर और बाहर इस विषय को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। यह संभावना जताई जा रही है कि विपक्ष आगामी दिनों में भी इस मुद्दे को संसद में उठाता रहेगा और सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब की मांग करेगा। इस विवाद के चलते मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली है, जो आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।
