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राजस्थान: सरकारी अस्पतालों में 19 से अधिक मातृ मृत्यु पर जांच तेज

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद संक्रमण व किडनी फेल होने से 19 से अधिक महिलाओं की मौत पर सरकार ने चिंता जताई है। जांच तेज कर दी गई है।

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राजस्थान: सरकारी अस्पतालों में 19 से अधिक मातृ मृत्यु पर जांच तेज

द क्लिफ न्यूज़ | जयपुर | 28 जुलाई 2026

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मातृ मृत्यु की बढ़ती दर ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। मई 2026 से अब तक, राज्य भर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के दौरान या उसके तुरंत बाद 19 से अधिक गर्भवती और प्रसूता महिलाओं की दुखद मौत दर्ज की गई है। इन घटनाओं में से अधिकांश में सिजेरियन (सी-सेक्शन) डिलीवरी के बाद संक्रमण, पेशाब की मात्रा में भारी कमी (यूरिन आउटपुट का रुकना) और किडनी फेल होने जैसी गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा।

यह चिंताजनक स्थिति विशेष रूप से भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों में जुलाई के शुरुआती दिनों में लगातार हुई मौतों के बाद और गंभीर हो गई। इसके अलावा, कोटा, बीकानेर और जोधपुर जैसे प्रमुख शहरों के सरकारी अस्पतालों से भी इसी प्रकार की घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। इन मौतों के बाद, प्रभावित मरीजों के परिजनों ने अस्पतालों में मौजूद स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, संक्रमण नियंत्रण के उपायों और उपलब्ध उपचार पर सवाल उठाए हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल और प्रारंभिक जांच

स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें ऑपरेशन के बाद संक्रमण तेजी से फैला, किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हुई और विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता मिलने में देरी हुई। कुछ महिलाओं में प्रसव के बाद पेशाब आना बंद हो गया, जिससे उनकी हालत तेजी से बिगड़ी और अंततः मृत्यु हो गई। यह घटनाक्रम स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

लगातार सामने आ रही इन मौतों के मद्देनजर, राजस्थान सरकार ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में एक व्यापक जांच के आदेश जारी किए हैं। इस जांच के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीमों को संवेदनशील अस्पतालों में भेजा गया है। इन टीमों का मुख्य कार्य संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था, ऑपरेशन थिएटरों की स्वच्छता, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और वर्तमान उपचार प्रोटोकॉल की बारीकी से समीक्षा करना है। इसके साथ ही, सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए एक विशेष स्क्रीनिंग अभियान भी शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मामलों की समय रहते पहचान करना और उन्हें तत्काल आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

नीतिगत बदलाव और भविष्य की रणनीति

इन गंभीर घटनाओं के जवाब में, राजस्थान सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। राज्य के ब्लड बैंकों में गर्भवती महिलाओं के लिए 'रिप्लेसमेंट डोनर' लाने की पूर्व में अनिवार्य शर्त को समाप्त कर दिया गया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करना है। अब, प्रसूताओं को आवश्यकता पड़ने पर बिना किसी अतिरिक्त शर्त के रक्त उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से उपचार में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलेगी और मातृ मृत्यु दर को प्रभावी ढंग से घटाया जा सकेगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद उत्पन्न होने वाली संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, किडनी संबंधी समस्याएं और अन्य गंभीर जटिलताओं की समय पर पहचान तथा निरंतर निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण के कड़े मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, नियमित ऑडिट और विशेषज्ञ चिकित्सा टीमों द्वारा बढ़ी हुई निगरानी को भी इन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक बताया गया है।

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर व्यापक बहस

राजस्थान में मातृ मृत्यु के लगातार सामने आए ये मामले प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर एक व्यापक बहस छेड़ चुके हैं। वर्तमान में सभी की निगाहें राज्य सरकार की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट न केवल इन मौतों के कारणों का खुलासा करेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कौन से सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। लोगों को उम्मीद है कि सरकार गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी उपाय करेगी।