राजपूत समाज ने शस्त्र पूजन कर कुरीतियों को मिटाने का लिया संकल्प
भोपाल में विजयादशमी पर राजपूत समाज ने शस्त्र पूजन किया। दहेज व मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों को त्यागने का संकल्प लिया गया। मेधावी छात्रों के...

Bhopal | संवाददाता: अंशुल त्रिपाठी
द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 20 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश राजपूत समाज संस्था द्वारा राजधानी भोपाल के महाराणा प्रताप भवन में विजयादशमी पर्व का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर पारंपरिक विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन किया गया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सतेंद्र भूषण सिंह मुख्य अतिथि रहे, जबकि विधायक भगवानदास सबनानी ने समारोह की अध्यक्षता की। वक्ताओं ने विजयादशमी के महत्व को शौर्य, साहस और धर्म से जोड़ते हुए समाज में आपसी भाईचारे को मजबूत करने पर बल दिया।
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान लोकायुक्त डीएसपी वीरेंद्र सिंह, जिन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जा चुका है, को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया। वक्ताओं ने युवाओं के लिए शिक्षा के अवसरों को बेहतर बनाने और गौसेवा को एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन का संकल्प
मध्य प्रदेश राजपूत समाज के अध्यक्ष विनय भदौरिया ने समारोह को संबोधित करते हुए समाज में व्याप्त दहेज प्रथा और मृत्यु भोज जैसी हानिकारक कुरीतियों को समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने समाज के संपन्न व्यक्तियों से अपील की कि वे इन अनावश्यक व्ययों को कम कर, उस धन का उपयोग जनकल्याण, शिक्षा के प्रसार और गौवंश के संरक्षण जैसे नेक कार्यों में करें। यह कदम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
नई छात्रवृत्ति योजना की घोषणा
कार्यक्रम में प्रदेश संगठन मंत्री हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने 'स्मृति छात्रवृत्ति योजना' के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। इस योजना के अंतर्गत, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राएं, जो कक्षा दसवीं में 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करेंगे, उन्हें कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं की दो वर्ष की पढ़ाई के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। समाज के पदाधिकारियों ने संपन्न सदस्यों से इस पुनीत पहल में आर्थिक सहयोग देने का आग्रह किया, ताकि कोई भी मेधावी विद्यार्थी आर्थिक तंगी के कारण अपनी शिक्षा अधूरी न छोड़ सके। समारोह का संचालन ऋतुराज परमार ने किया, जिसमें समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
